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केंद्र ने मेट्रो स्टेशन नामकरण नियम शिथिल किए, राज्यों को मिली शक्तियां

केंद्र सरकार ने मेट्रो स्टेशन के नामकरण संबंधी नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जिससे अब राज्य सरकारों को अपने शहरों में मेट्रो स्टेशनों के नाम बदलने का अधिकार मिल गया है। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने इंदौर मेट्रो के एक कार्यक्रम में यह जानकारी दी। पहले केंद्र की अनुमति के बिना गजट नोटिफिकेशन में दर्ज नाम नहीं बदले जा सकते थे। इस बदलाव से इंदौर के जनप्रतिनिधियों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हो सकेगी, जिसमें बापट चौराहे स्टेशन का नाम पं. दीनदयाल उपाध्याय और गांधी नगर सहित अन्य स्टेशनों का नाम वीरांगनाओं के नाम पर रखने का सुझाव शामिल है।

इंदौर में खजराना-बंगाली चौराहे के बीच अंडरग्राउंड मेट्रो का विरोध, 300 से अधिक रहवासियों ने किया प्रदर्शन

इंदौर में बंगाली चौराहे से पलासिया के बीच प्रस्तावित भूमिगत मेट्रो परियोजना का विरोध तेज हो गया है, जिसमें अब खजराना और बंगाली चौराहे के बीच भी अंडरग्राउंड मेट्रो चलेगी। तिलकनगर, गोयल नगर व साईंनाथ कॉलोनी के 300 से अधिक रहवासियों ने बंगाली चौराहे पर प्रदर्शन किया। उन्होंने पुराने मकानों में दरारें आने और घरों के बोरिंग खत्म होने की आशंका जताई। उधर, नगर निगम को तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत से 97.57 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड राजस्व प्राप्त हुआ, जिसमें संपत्ति, जल और कचरा कर शामिल हैं। नागरिकों ने भारी उत्साह दिखाया, और ई-नगर पालिका पोर्टल ने भी सुचारु रूप से कार्य किया।

भोपाल मेट्रो प्रबंधन ने 21 फेरे घटाए, 15 सितंबर से लागू हुआ संशोधित टाइम टेबल

भोपाल मेट्रो प्रबंधन ने भारी खर्च और सीमित आय के दबाव के चलते फेरों की संख्या में कटौती की है। 15 सितंबर से लागू संशोधित समय-सारणी के तहत सामान्य दिनों में 21 और रविवार व अवकाश के दिनों में 6 फेरे कम किए गए हैं। अब सुबह 11:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक मेट्रो 30 मिनट के अंतराल पर चलेगी, जिससे कुल फेरे 62 से घटकर 41 रह गए हैं। यात्रियों की संख्या बढ़ाने के प्रयासों के बावजूद, एमपी मेट्रो का ऐप अभी भी अपडेट नहीं हुआ है, जिससे यात्रियों को गलत जानकारी मिल रही है।

इंदौर मेट्रो: भूमिगत सुरंग के 30 मीटर दायरे में सेंसर से निगरानी

इंदौर मेट्रो परियोजना अब भूमिगत निर्माण चरण में है। एयरपोर्ट से रेलवे स्टेशन तक बनने वाली सुरंग के 30 मीटर दायरे में आने वाले भवनों और जमीन की सुरक्षा पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। निर्माण से पहले विस्तृत सर्वे होगा और जमीन व भवनों पर सेंसर स्थापित किए जाएंगे। ये सेंसर खिसकाव, कंपन और सूक्ष्म बदलावों को रिकॉर्ड करेंगे। मामूली बदलाव की भी तत्काल रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जाएगी। निर्माण के लिए टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे यातायात पर न्यूनतम असर पड़ेगा।

भोपाल मेट्रो परियोजना: जमीन खाली कराने में देरी, 2028 की समयसीमा पर चिंता

भोपाल मेट्रो परियोजना जमीन खाली कराने में चुनौतियों का सामना कर रही है, जिससे 2028 की प्रस्तावित समयसीमा पर चिंता बढ़ गई है। एम्स-करोंद कॉरिडोर में 40 आरा मशीनों की शिफ्टिंग अटकी हुई है, जिसके लिए मेट्रो प्रशासन 5.50 करोड़ रुपये दे चुका है। वहीं, अंडरग्राउंड कॉरिडोर का बड़ा बाग एग्जिट प्वाइंट जमीन और कब्रिस्तान विवाद में उलझा है, जहां मुस्लिम पक्ष 24 से 30 मीटर गहरी खोदाई का विरोध कर रहा है। प्रशासन ने जियोलाजिकल सर्वे शुरू किया है और कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने जल्द समाधान का आश्वासन दिया है।

भोपाल में मेट्रो स्टेशनों के पास 500 मीटर क्षेत्र में बनेंगे बहुमंजिला दफ्तर और घर

भोपाल मास्टर प्लान-2047 के ड्राफ्ट में मेट्रो स्टेशनों के आसपास के 500 मीटर क्षेत्र को विशेष विकास क्षेत्र के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। इस योजना के तहत बहुमंजिला दफ्तर, घर, दुकानें और अन्य आवश्यक सुविधाएं एक ही क्षेत्र में विकसित की जाएंगी, जिससे लोगों को रोजमर्रा के कार्यों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। इसमें पुराने निर्माणों का पुनर्विकास, ऊंची इमारतों का निर्माण और मिश्रित उपयोग की अनुमति जैसे प्रावधान शामिल हैं। हालांकि, विशेषज्ञों ने घने इलाकों में बुनियादी ढांचे पर बढ़ते दबाव और शहर की पहचान खोने की चुनौती पर चिंता व्यक्त की है।

इंदौर के रेडिसन चौराहे पर चार लेन फ्लाईओवर का प्रस्ताव

इंदौर विकास प्राधिकरण (आइडीए) ने रेडिसन चौराहे पर यातायात जाम से राहत के लिए फ्लाईओवर निर्माण का फिजिबिलिटी अध्ययन पूरा कर लिया है। अध्ययन में एमआर-10 के समानांतर रेडिसन होटल की ओर चार लेन फ्लाईओवर को सबसे उपयुक्त पाया गया है। इस चौराहे से प्रतिदिन 1.78 लाख वाहन गुजरते हैं और भविष्य में यातायात में 20 प्रतिशत तक की वृद्धि का अनुमान है। अन्य विकल्पों में मेट्रो लाइन और सीवर पाइपलाइन जैसी बाधाएं थीं। अंतिम निर्णय सड़क सुरक्षा समिति लेगी, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।

इंदौर से गुजरात-राजस्थान की बसें अब कुमेड़ी आईएसबीटी से चलेंगी

इंदौर से गुजरात और राजस्थान जाने वाली बसें अब कुमेड़ी में बने इंटर-स्टेट बस टर्मिनल (आईएसबीटी) से संचालित होंगी, जिसे अगस्त में शुरू करने की तैयारी है। प्रारंभिक चरण में 50 बसें चलेंगी, जिसके बाद अन्य बसें भी स्थानांतरित की जाएंगी। 14 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैले इस टर्मिनल की क्षमता 1500 बसों और 50 हजार से अधिक यात्रियों की है। यह इंदौर को पड़ोसी राज्यों से जोड़ेगा और भविष्य में मेट्रो रेल से भी जुड़ेगा। टर्मिनल पर रेस्टोरेंट, दुकानें, लिफ्ट, लॉकर और पार्किंग जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी, साथ ही स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। एमआर-10 ब्रिज के पास एक नया रेलवे स्टेशन भी बनेगा।

भोपाल मेट्रो अंडरग्राउंड रूट पर दोनों टीबीएम ने 260 मीटर सुरंग बनाई

भोपाल मेट्रो के अंडरग्राउंड रूट पर दो टनल बोरिंग मशीनों (टीबीएम) ने अब तक 260 मीटर सुरंग का निर्माण कर लिया है। यह रूट भोपाल रेलवे स्टेशन और नादरा बस स्टैंड के नीचे से गुजर रहा है। मेट्रो अधिकारियों के अनुसार, यह कार्य अगले डेढ़ से दो साल में पूरा हो जाएगा। घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी और यातायात दबाव कम करने के उद्देश्य से भूमिगत कॉरिडोर बनाया जा रहा है। प्रदेश में पहली बार ऐसी दो टीबीएम मशीनों का उपयोग किया जा रहा है, जो जमीन से लगभग 60 फीट नीचे सुरंगें बना रही हैं। सुरक्षा उपायों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

इंदौर में भूमिगत मेट्रो सुरंग निर्माण शीघ्र, ‘क्षिप्रा’ और ‘नर्मदा’ टीबीएम बनाएंगी सुरंग

इंदौर में भूमिगत मेट्रो सुरंगों का निर्माण कार्य शीघ्र ही शुरू होगा। ‘क्षिप्रा’ और ‘नर्मदा’ नामक दो टनल बोरिंग मशीनें (टीबीएम) एयरपोर्ट से बीएसएफ परिसर के बीच 22 मीटर गहराई में सुरंगें बनाएंगी। पहली टीबीएम इंदौर पहुंच चुकी है और इसे अगले 10 दिन में उतारा जाएगा। मेट्रो के प्रबंध संचालक एस. कृष्ण चैतन्य ने निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। इंदौर मेट्रो की येलो लाइन 31.76 किमी लंबी है, जिसमें 12.72 किमी हिस्सा भूमिगत है। सतह पर स्थित भवनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक उपाय किए जा रहे हैं।