देश के 19 राज्यों के 181 जिलों में लगभग 7,500 भूस्खलन संभावित स्थान चिन्हित किए गए हैं, जिनमें हिमालयी क्षेत्र, पूर्वोत्तर और पश्चिमी घाट सर्वाधिक प्रभावित हैं। भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार, 4.3 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र भूस्खलन संभावित है। अंधाधुंध निर्माण और वनों की कटाई को प्रमुख कारण माना गया है, जिससे सड़कों और सामरिक अवसंरचना को खतरा है। संसदीय समिति ने अनियंत्रित निर्माण रोकने और भू-तकनीकी आकलन कराने की सिफारिश की है।
पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल में इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन परियोजना के तहत सुरंग निर्माण कार्य तेजी से जारी है। 03 अगस्त 2026 तक की प्रगति के अनुसार, 2957 मीटर लंबी सुरंग में लाइनिंग का कार्य पूरा हो चुका है। इसके बाद बैलास्टलेस ट्रैक बिछाने का काम प्रगति पर है, जिसमें 1216 मीटर ट्रैक का निर्माण पूर्ण हो चुका है। जल निकासी, कट एंड कवर सेक्शन और आधुनिक सुरक्षा तंत्र जैसे वेंटिलेशन डक्ट तथा एग्जॉस्ट फैन लगाने का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है। यह परियोजना मध्य प्रदेश और गुजरात के बीच रेल संपर्क को मजबूत करेगी, जिससे यात्री और माल परिवहन को लाभ मिलेगा।
इंदौर मेट्रो के भूमिगत सफर की तैयारी शुरू हो गई है, जिसमें थाईलैंड से आई टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) का असेंबल किया जा रहा है। यह 1000 टन वजनी अत्याधुनिक मशीन एक महीने बाद जमीन से 20 मीटर नीचे उतरेगी और 24 घंटे लगातार काम करते हुए प्रतिदिन 20 मीटर तक सुरंग तैयार करेगी। टीबीएम की खासियत यह है कि यह खुदाई के साथ ही सुरंग की मजबूत कंक्रीट की दीवारें भी बनाती जाएगी, जिससे निर्माण कार्य तेजी से पूरा होगा और सुरंग सुरक्षित व टिकाऊ बनेगी। इंदौर में कुल 12 किलोमीटर मेट्रो भूमिगत रहेगी, जिसका काम 4-5 साल में पूरा होने का अनुमान है।
इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन परियोजना में 2957 मीटर लंबी सुरंग में लाइनिंग का कार्य पूर्ण हो गया है। पश्चिम रेलवे के अनुसार, यह कार्य सुरंग को स्थायित्व और सुरक्षा प्रदान करता है। परियोजना में 1216 मीटर बैलास्टलेस ट्रैक का निर्माण भी पूरा हो चुका है, जबकि 810 मीटर पर कार्य प्रगति पर है। पीसीसी फाइनल और फर्स्ट लेयर का अधिकांश काम भी संपन्न हो गया है। आपातकालीन शरण स्थल, रेस्क्यू शाफ्ट और वेंटिलेशन डक्ट का निर्माण भी तेजी से किया जा रहा है। टीही से धार के बीच 95% सिग्नलिंग कार्य भी पूरा हो गया है। यह परियोजना मध्य प्रदेश और गुजरात के बीच रेल संपर्क को मजबूत करेगी।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मैहर में मां शारदा मंदिर मार्ग पर प्रस्तावित सड़क निर्माण को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि सड़क निर्माण तकनीकी विशेषज्ञों की रिपोर्ट और आवश्यक तकनीकी आकलन पर आधारित होता है, और ऐसे तकनीकी निर्णयों में अदालत हस्तक्षेप नहीं कर सकती। इसके अतिरिक्त, हाई कोर्ट ने 40 बस रूटों की नई परिवहन योजना पर सरकार को फटकार लगाते हुए नोटिफिकेशन पर अंतरिम रोक लगाई और राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
इंदौर में अंडरग्राउंड मेट्रो निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए थाईलैंड से पहली टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) के पुर्जे पहुंच गए हैं। इन पुर्जों को असेंबल करने में लगभग डेढ़ माह का समय लगेगा, जिसके बाद जमीन से लगभग 20 मीटर नीचे ट्रैक की खुदाई शुरू होगी। कुल चार टीबीएम मशीनों का उपयोग किया जाएगा, जिनमें से पहली मशीन एयरपोर्ट क्षेत्र में स्थापित की जा रही है। मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के जनसंपर्क अधिकारी धीरज शुक्ला ने बताया कि मशीन का कटर हेड अभी आना बाकी है, जो सुरंग बनाने का मुख्य कार्य करता है। खुदाई के बाद कंक्रीट के सेगमेंट लगाकर सुरंग को मजबूती प्रदान की जाएगी।
इंदौर में लवकुश चौराहे पर डबल डेकर ब्रिज निर्माण के चलते सर्विस रोड और एक पेट्रोल पंप के सामने हुई खुदाई से सोमवार सुबह लंबा जाम लग गया। इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा कराए जा रहे इस कार्य से उज्जैन-इंदौर मार्ग पर वाहन चालक डेढ़ घंटे तक परेशान रहे। यातायात विभाग को बिना सूचना दिए की गई इस खुदाई के कारण यातायात बाधित हुआ, जिसके बाद पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली। औद्योगिक क्षेत्र से अरविंदो अस्पताल तक सर्विस रोड की खराब हालत भी लंबे समय से वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है।
इंदौर में मेट्रो अंडरग्राउंड प्रोजेक्ट के तहत सितंबर से सुरंग निर्माण शुरू होगा। एयरपोर्ट के पास भूमिगत स्टेशन से 18 मीटर नीचे दो सुरंगें बनाई जाएंगी। सुरंग बनाने वाली टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) के पुर्जे इंदौर पहुंचना शुरू हो गए हैं। एक टीबीएम के लिए 17 ट्रेलर की आवश्यकता है, जिसमें से 12 ट्रेलर में मशीन के पिछले हिस्से के पुर्जे मुंबई से इंदौर पहुंचे हैं। थाईलैंड की टेराटेक कंपनी द्वारा निर्मित यह 320 टन वजनी मशीन 18-20 मीटर गहराई में सुरंग बनाएगी और एक माह में 150 मीटर का हिस्सा खोदेगी।