बुलंद सोच, इंदौर।

स्वच्छ सर्वेक्षणों में लगातार आठ वर्षों से देश के सबसे स्वच्छ शहर का ताज पहनने वाले इंदौर के सार्वजनिक सुविधाघर (पब्लिक टॉयलेट) इन दिनों नागरिकों के लिए असुविधा का कारण बन गए हैं। इन सुविधाघरों का उपयोग करना तो दूर, इनके पास से गुजरना भी मुश्किल हो गया है, क्योंकि गंदगी सड़क पर बहती रहती है।
चौंकाने वाली बात यह है कि 90 प्रतिशत से अधिक सुविधाघरों में पानी ही नहीं है। पानी के इंतजाम के नाम पर टंकियां तो लगाई गई हैं, लेकिन ये कब भरी गईं, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। ज्यादातर सुविधाघरों में यूरिनल गायब हैं, और बाहर लगाए गए वॉश-बेसिन भी नदारद हैं।
नगर निगम की कार्यप्रणाली और रखरखाव
नगर निगम हर साल स्वच्छ सर्वेक्षण से पहले इन सुविधाघरों की सफाई के लिए एक विशेष अभियान चलाता है, क्योंकि सर्वेक्षण में इसके लिए अंक निर्धारित होते हैं। सर्वेक्षण में हर बार इंदौर को सुविधाघरों की सफाई के लिए शत प्रतिशत अंक भी मिलते रहे हैं, बावजूद इसके शहरभर के सुविधाघर बदहाल हैं। इसकी मुख्य वजह यह है कि सर्वेक्षण टीम के लौटते ही इन्हें लावारिस छोड़ दिया जाता है।
सुविधाघरों की दीवारों पर सीएसआई का नाम और नंबर तो लिखा होता है, लेकिन वे भी कोई कार्रवाई नहीं करते। रखरखाव के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति हो रही है। न तो सुविधाघरों में सफाई का कोई इंतजाम है और न ही पानी की व्यवस्था।
शहर के ज्यादातर सुविधाघरों में पानी के इंतजाम के नाम पर प्लास्टिक की टंकियां रखी हैं, जिनमें से अधिकांश में पानी नहीं है। कुछ जगहों पर सुविधाघर के बाहर सीमेंट की टंकियां रखी हैं, जिनमें से कुछ में पानी है जिसका उपयोग मनुष्य और पशु दोनों कर रहे हैं। ज्यादातर सुविधाघरों में टंकियों से पानी यूरिनल तक पहुंचाने के लिए बिछाई गई पाइपलाइन उखड़ चुकी है।
नईदुनिया का अभियान
सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए, नईदुनिया समाचार अभियान की श्रृंखला में शहर के बदहाल सुविधाघरों को पाठकों के सामने ला रहा है। शहर में लगभग साढ़े तीन सौ सुविधाघर मौजूद हैं।
समाचार अभियान के तहत नईदुनिया की टीमें शहर की सड़कों पर उतरकर अलग-अलग क्षेत्रों का जायजा लेंगी। यह देखा जाएगा कि कागजों पर साफ-स्वच्छ दिखाए जाने वाले ये सुविधाघर वास्तव में सुविधाजनक हैं भी या नहीं।
कचरा फैलाने पर नए नियम
इंदौर में कचरा फैलाने पर भारी जुर्माना लगेगा, नए नियम लागू किए गए हैं, जिसके तहत 150% तक पर्यावरण क्षतिपूर्ति और सख्त डिजिटल निगरानी होगी।

