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जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने पर जोर: ‘पेयजल का सम्मान और संरक्षण’ अभियान

जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाना एक साझा सामाजिक दायित्व है, जो भविष्य में पेयजल संकट से बचने के लिए महत्वपूर्ण है। ‘पेयजल का सम्मान और संरक्षण’ अभियान 21 जुलाई से 4 अगस्त तक पूरे देश में चलाया गया, जो ‘जल संचय जनभागीदारी: कैच द रेन-2026’ से जुड़ा है। यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्षा जल संचयन के आह्वान पर आधारित है और इसका उद्देश्य जल संग्रह, भूजल पुनर्भरण और जल स्रोतों के संरक्षण को बढ़ावा देना है। भारत को जनसंख्या वृद्धि और जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती जल चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके लिए पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियों और आधुनिक तकनीकों के समन्वय की आवश्यकता है।

कम बारिश की आशंका के बीच 24 जिलों में जल स्रोतों का आकलन लंबित

मध्य प्रदेश सरकार ने इस वर्ष कम बारिश की आशंका के मद्देनजर तैयारियां शुरू कर दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक माह पूर्व सभी जिलों को जल स्रोतों का आकलन करने और डैशबोर्ड तैयार करने के निर्देश दिए थे। एक माह बीतने के बाद भी 55 में से केवल 31 जिले ही पानी की उपलब्धता का आकलन कर पाए हैं, जबकि 24 जिलों में यह प्रक्रिया अभी जारी है। किसी भी जिले ने अभी तक डैशबोर्ड तैयार नहीं किया है, जिससे पानी की स्थिति स्पष्ट होनी थी। रिपोर्ट 15 अगस्त तक आने की उम्मीद है।

जबलपुर के गांवों में भूजल स्तर गिरने से पेयजल संकट गहराया

जबलपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश के कारण गहराते पेयजल संकट की समस्या सामने आई है। पहले 70-80 फीट पर मिलने वाला पानी अब 100 फीट पर भी उपलब्ध नहीं है। जिले के 500 से अधिक ग्राम पंचायतों में स्थापित 10 हजार हैंडपंपों में से 3500 से अधिक का जलस्तर 10 से 30 फीट नीचे गिर गया है, जिससे लगभग 40 प्रतिशत हैंडपंप पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे हैं। शिकायतें बढ़ने के बावजूद भूजल स्तर में गिरावट के कारण समस्या बनी हुई है, और अमृत जल योजना का शुरू न होना भी संकट को बढ़ा रहा है।

इंदौर में 65 दिन में सिर्फ 15 इंच बारिश, 10 साल में सबसे कम; प्रदेश के 50 जिले भी कम वर्षा वाले

इंदौर में मानसून के 65 दिन बीतने के बाद भी अच्छी बारिश का इंतजार जारी है, जहां अब तक केवल 15 इंच वर्षा दर्ज की गई है, जो पिछले 10 वर्षों में सबसे कम है। इसका असर शहर के जलाशयों और पेयजल पर दिख रहा है। पूरे मध्य प्रदेश में सामान्य से 18% कम बारिश हुई है, जिससे सोयाबीन, धान जैसी फसलों की बढ़त प्रभावित हुई है। राज्य के 55 में से 50 जिले कम वर्षा की श्रेणी में हैं, जबकि देवास एकमात्र अपवाद है।

भोपाल का बड़ा तालाब 2050 तक 60% तक सिकुड़ सकता है: AI अध्ययन

भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आइसर) भोपाल और मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) के विज्ञानियों के एक एआई अध्ययन से खुलासा हुआ है कि भोपाल का बड़ा तालाब वर्ष 2050 के प्री-मानसून सीजन तक 40 से 60 प्रतिशत तक सिकुड़ सकता है। यह शोध रिमोट सेंसिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग कर 1980 से 2024 तक के आंकड़ों पर आधारित है। अध्ययन चेतावनी देता है कि वैश्विक तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि से तालाब का जलभराव क्षेत्र 40 प्रतिशत तक घट जाएगा, जिसका सबसे अधिक असर मई-जून में दिखेगा।

बड़े तालाब का जलस्तर 7.10 फीट नीचे, तीन लाख लोगों की जलापूर्ति पर चिंता

भोपाल की जीवनरेखा बड़े तालाब का जलस्तर कमजोर मानसून के कारण अपने पूर्ण स्तर से 7.10 फीट नीचे पहुंच गया है। पिछले वर्ष की तुलना में भोपाल और सीहोर में कम वर्षा दर्ज की गई है, जिससे तालाब में पानी की आवक प्रभावित हुई है। यह स्थिति पुराने भोपाल, संत हिरदाराम नगर और आसपास के क्षेत्रों की तीन लाख से अधिक आबादी को प्रतिदिन पेयजल उपलब्ध कराने वाली व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। मौसम विभाग ने अगले पांच दिनों तक प्रदेश में रुक-रुक कर बारिश और कुछ जिलों के लिए ऑरेंज व येलो अलर्ट जारी किया है।

इंदौर के तालाब जुलाई बीतने के बाद भी खाली, यशवंत सागर में 12 फीट पानी

इंदौर में जुलाई माह में पर्याप्त बारिश के बावजूद शहर के तालाबों का जलस्तर अपेक्षित स्तर तक नहीं बढ़ा है। शहर की प्यास बुझाने वाले यशवंत सागर में अभी 12 फीट पानी है, जबकि इसकी क्षमता 19 फीट है और यह अभी भी 7 फीट खाली है। पिछले साल जुलाई में यह तालाब लबालब था। अन्य तालाब जैसे बिलावली और लिंबोदी भी बायपास निर्माण के कारण चैनलों के अवरुद्ध होने से धीमी गति से भर रहे हैं, जिससे भूजल स्तर पर असर पड़ रहा है। तालाबों को पूरी तरह भरने में अगस्त माह का समय लग सकता है।

ग्वालियर: तिघरा बांध में 50 दिन का पानी शेष, वैकल्पिक जलापूर्ति का प्रस्ताव परिषद को भेजा गया

ग्वालियर के तिघरा बांध में वर्तमान में 840 एमसीएफटी उपयोग योग्य पानी बचा है, जो शहर में लगभग 50 दिनों की जलापूर्ति के लिए पर्याप्त है। कुल 1290 एमसीएफटी पानी में से 450 एमसीएफटी डेड स्टोरेज है। इस स्थिति के मद्देनजर, शहर में एक दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति का प्रस्ताव परिषद को भेजा गया है। जल संसाधन विभाग से पत्र मिलने के बाद निगम आयुक्त ने यह प्रस्ताव आगे बढ़ाया है। परिषद की मंजूरी के बाद ही यह निर्णय लागू होगा। पीएचई अधिकारियों के अनुसार, पेही से प्रतिदिन लगभग 12 एमसीएफटी पानी की आवक हो रही है, लेकिन भविष्य को देखते हुए यह प्रस्ताव भेजा गया है।

इंदौर में 28 जुलाई 2026 को 19 क्षेत्रों में बाधित रहेगी जलापूर्ति

इंदौर में 28 जुलाई 2026 को मुख्य फीडर लाइन के वाल्व में तकनीकी खराबी के सुधार कार्य के कारण 19 क्षेत्रों में जलापूर्ति बाधित रहेगी। नर्मदा पंपों के बंद रहने से पानी की टंकियां पूरी तरह नहीं भर पाईं। इस बीच, नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने सोमवार को इंदौर में निगम के विभिन्न विभागों की समीक्षा की। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना में ईडब्ल्यूएस आवंटन को समग्र आईडी से जोड़ने और अमृत 2.0 योजना में एसटीपी निर्माण में देरी पर निर्माणकर्ता एजेंसी पर पेनल्टी लगाने तथा ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए।

स्लीमनाबाद जल सुरंग परियोजना अंतिम चरण में, 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी

कटनी जिले के स्लीमनाबाद में निर्मित 11.95 किलोमीटर लंबी ग्रेविटी फ्लो जल सुरंग परियोजना अपने अंतिम चरण में है। इस वर्ष इसके संचालन की उम्मीद है, जिससे नर्मदा का पानी पहली बार सतना, मैहर, रीवा और पन्ना के खेतों तक पहुँचेगा। लगभग 17 वर्षों में पूरी हुई इस परियोजना की लागत 799 करोड़ से बढ़कर 1,600 करोड़ रुपये हो गई है। यह परियोजना कुल 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचित करेगी और जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा, पन्ना के लगभग 1450 गाँवों को लाभान्वित करेगी। इससे कृषि उत्पादन बढ़ेगा, भूजल स्तर सुधरेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।