बुलंद सोच, ग्वालियर।

शहर की सड़कों की खराब हालत को लेकर चल रही जनहित याचिका के संबंध में हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने NHAI की अपनी रिपोर्ट के आधार पर यह पाया कि उसके द्वारा संधारित सड़क निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यदि सड़क घटिया गुणवत्ता की बनाई गई है तो अधिकारियों, कन्सेशनायर या ठेकेदार को बचाने के किसी भी प्रयास को गंभीरता से लिया जाएगा। सार्वजनिक धन की कीमत पर ग्वालियर के लोगों को घटिया सड़क उपलब्ध नहीं कराई जा सकती।
वार्षिकी राशि रोकने के निर्देश
कोर्ट ने यह भी कहा कि सड़क निर्माण निर्धारित विनिर्देशों के अनुरूप हुआ या नहीं, यह जानने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और अनुबंध में दर्ज विनिर्देशों की जांच आवश्यक है। मामले में NHAI द्वारा कन्सेशनायर को दी जाने वाली 26.53 करोड़ रुपये की अगली वार्षिकी की राशि रोकने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि यह राशि किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में एफडीआर (FDR) के रूप में रखी जाए। ऐसा इसलिए ताकि यदि जांच में कन्सेशनायर इस राशि का हकदार पाया जाता है तो उसे ब्याज सहित भुगतान किया जा सके। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने कैलाश चंद अग्रवाल बनाम मध्यप्रदेश शासन एवं अन्य मामले में यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने प्रोजेक्ट डायरेक्टर को अगली सुनवाई तक यह रिपोर्ट देने के लिए कहा है कि एफडीआर बनाई गई है या नहीं।
एनएसवी सर्वे रिपोर्ट पर कोर्ट की टिप्पणी
कोर्ट ने उल्लेख किया कि 25 अगस्त को NHAI की ओर से बताया गया था कि नेटवर्क सर्वे वाहन (NSV) की मदद से सड़क के नमूने लिए जाएं। इस तकनीक से सड़क को खोदे बिना उसकी अंदरूनी स्थिति का परीक्षण किया जा सकता है। कोर्ट के निर्देश पर कराए गए सर्वे की अंतरिम रिपोर्ट NHAI ने पेश की। कोर्ट ने पाया कि NHAI की अपनी रिपोर्ट के अनुसार ही उसकी सड़क निर्धारित विनिर्देशों के अनुरूप नहीं है। NHAI की ओर से यह तर्क दिया गया कि सड़कों का मरम्मत कार्य प्रत्येक पांच साल में किया जाना है और संबंधित सड़क की एक साइड का मरम्मत कार्य हो चुका है, जबकि जिस हिस्से के नमूने लिए गए हैं वहां मरम्मत शुरू होना बाकी है। कोर्ट ने कहा कि इस दावे की वास्तविक स्थिति जानने के लिए NHAI द्वारा पिछले पांच एनएसवी सर्वे की रिपोर्ट देखना आवश्यक है। कोर्ट ने उल्लेख किया कि NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने पहले स्वयं कहा था कि एनएसवी से हर छह महीने में सड़कों का सर्वे कराया जाता है। इसके बावजूद आयोग को इन सर्वे की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई। अब कोर्ट ने NHAI को पिछले पांच एनएसवी सर्वे की रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

