नीमच में चार युवकों ने कलेक्टर कार्यालय परिसर में लोट लगाकर सड़क निर्माण की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि कानियाखेड़ी-अंबा माता रोड स्वीकृत होने और चार साल पहले भूमिपूजन होने के बावजूद पीडब्ल्यूडी और वन विभाग की एनओसी के कारण अटका है। इससे ग्रामीणों को कीचड़ भरे रास्ते से गुजरना पड़ रहा है। डिप्टी कलेक्टर चंद्र सिंह धार्वे सहित अन्य अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर युवकों की शिकायत सुनी। युवकों ने एनओसी की समस्या के समाधान और जल्द सड़क निर्माण की मांग करते हुए आवेदन भी दिया।
सतना जिले में इस वर्ष हुई अतिवृष्टि से सड़क अधोसंरचना को व्यापक क्षति पहुंची है। लोक निर्माण विभाग की 30 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 260.04 किलोमीटर विभिन्न मार्ग क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनकी स्थायी मरम्मत के लिए 421.50 लाख रुपये और अस्थायी मरम्मत के लिए 105.20 लाख रुपये की आवश्यकता है। मझगवां क्षेत्र सर्वाधिक प्रभावित रहा, जबकि उचेहरा, नागौद और रामनगर में भी सड़कों को नुकसान पहुंचा है। क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों की स्थायी मरम्मत पर 1209.50 लाख रुपये और अस्थायी मरम्मत पर 70.50 लाख रुपये का खर्च अनुमानित है।
सतना जिले के थरपहाड़ गांव में सड़क की बदहाली ग्रामीणों के लिए एक गंभीर समस्या बनी हुई है। हाल ही में एक 28 वर्षीय मरीज गोरे सिंह को उल्टी-दस्त के कारण अस्पताल ले जाने के लिए परिजनों को कंधे पर उठाकर मुख्य मार्ग तक पहुंचाना पड़ा। उपचार के बाद वापस गांव लाने में भी इसी तरह की कठिनाई का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि गंभीर बीमारियों या आपात स्थितियों में वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते, जिससे मरीजों को मुख्य मार्ग तक ले जाने में परेशानी होती है। बारिश में यह समस्या और बढ़ जाती है।
उज्जैन में सिंहस्थ महापर्व 2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण का कार्य तेज हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को अपने पैतृक मकान पर गेती चलाकर भवन हटाने की शुरुआत की। खजूर वाली मस्जिद से गणेश चौक तक 730 मीटर लंबे मार्ग को 15 मीटर चौड़ा किया जाएगा, जिसके लिए राज्य शासन ने 9.80 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। यह मार्ग सिंहस्थ के दौरान सुगम यातायात के लिए महत्वपूर्ण है, और मुख्यमंत्री की इस पहल से त्याग का संदेश भी दिया गया।
एनएचएआई की एक विशेषज्ञ टीम उज्जैन-गरोठ हाइवे के क्षतिग्रस्त हिस्से के लिए नई निर्माण योजना तैयार करेगी। बाहर से आए सेवानिवृत्त एनएच अधिकारियों की तीन सदस्यीय पैनल ने स्थल का निरीक्षण किया है। इस योजना का उद्देश्य 10 से 17 मीटर ऊंचाई पर स्थित इस हाइवे को भविष्य में होने वाले नुकसान से बचाना और सिंहस्थ-2028 के दौरान यातायात में किसी भी बाधा को रोकना है। यह हाइवे राजस्थान के यात्रियों और शहरी क्षेत्र के लिए बाईपास के रूप में महत्वपूर्ण होगा।
हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने शहर की सड़कों की खराब हालत को लेकर NHAI की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने NHAI की अपनी रिपोर्ट के आधार पर पाया कि उसकी सड़क निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। कोर्ट ने अधिकारियों या ठेकेदार को बचाने के प्रयासों पर कड़ी चेतावनी दी है। NHAI को कन्सेशनायर को दी जाने वाली 26.53 करोड़ रुपये की अगली वार्षिकी राशि रोकने और उसे एफडीआर के रूप में रखने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने NHAI को पिछले पांच एनएसवी सर्वे की रिपोर्ट भी उपलब्ध कराने को कहा है।
चित्रकूट विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार ने सतना जिले में पीडब्ल्यूडी अधिकारियों पर सड़कों के निर्माण में अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि करोड़ों रुपये की लागत से स्वीकृत कई सड़कें केवल कागजों में बनी हैं, जबकि जमीनी हकीकत अलग है। विधायक ने मझगवां एसडीओ अश्वनी निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए भ्रष्टाचार का आरोप लगाया, जिसके बाद मुख्य अभियंता पंकज खरादी ने एसडीओ को पद से हटा दिया। अब विभाग पर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांच को लेकर सबकी नजरें टिकी हैं, हालांकि भ्रष्टाचार के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
भोपाल में देर रात से जारी तेज बारिश के कारण शिवनगर कॉलोनी सहित कई इलाकों में भारी जलभराव हो गया, जिससे सड़कें जलमग्न हो गईं और घरों में पानी घुस गया। भोपाल-बैरसिया मार्ग समेत कई प्रमुख रास्ते बंद कर दिए गए। कलेक्टर के निर्देश पर नर्सरी से 12वीं कक्षा तक के स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है, हालांकि शिक्षकों को स्कूल पहुंचना होगा। मंत्री विश्वास सारंग ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत सामग्री पहुंचाने और नाले-नालियों की सफाई के निर्देश दिए। जलभराव ने शहर की निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
इंदौर नगर निगम सड़कों के गड्ढे भरने पर प्रतिदिन लगभग 14 लाख रुपये और सालाना 50 करोड़ रुपये खर्च करता है। इतनी भारी राशि खर्च होने के बावजूद शहर की सड़कें बदहाल हैं और गड्ढे कम नहीं हो रहे हैं। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी 50 करोड़ के वार्षिक बजट को स्वीकार किया है। लगभग 70 प्रतिशत सीमेंटेड सड़कों पर डामर के पैचवर्क की प्रासंगिकता पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि बारिश में डामर हट जाता है। जनकार्य प्रभारी राजेंद्र राठौर ने बताया कि वर्षा के कारण काम रुका है और ठेकेदार बारिश थमने पर बिना अतिरिक्त शुल्क के दोबारा पैचवर्क करेंगे।
इंदौर-देवास बायपास की बदहाली पर मंगलवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने गड्ढों के फोटोग्राफ पेश किए, जिस पर कोर्ट ने उन्हें ‘जानलेवा’ और ‘खतरनाक’ बताया। कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से 2023 से अब तक की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मौखिक रूप से सात दिन में स्थिति सुधारने के निर्देश दिए। मातृ फाउंडेशन ने यह जनहित याचिका दायर की है। NHAI ने ठेकेदार हटाने की बात कही, लेकिन याचिकाकर्ता ने 18 फीट चौड़े गड्ढे की तस्वीरें पेश कीं।