बुलंद सोच, इंदौर।

इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड सड़क के लिए अपनी जमीन देने वाले किसान छह माह से मुआवजे की राह देख रहे हैं। ग्राम जमूड़ी सरवर सहित अन्य गांवों के कई किसानों के मुआवजा प्रकरण मंजूर हो चुके हैं, लेकिन राशि अब तक उनके खातों में नहीं पहुंची है। परेशान किसान एसडीएम कार्यालय से लेकर कलेक्ट्रेट तक चक्कर लगा रहे हैं।
हातोद तहसील के ग्राम जमूड़ी सरवर की किसान रामीबाई उर्फ राजूबाई ने बीते दिनों कलेक्टर जनसुनवाई में आवेदन दिया। उनका कहना था कि सर्वे नंबर 12/2/1 की 0.902 हेक्टेयर भूमि सड़क परियोजना में प्रभावित हुई है। सर्वे और अन्य प्रक्रिया के बाद उनका प्रकरण एसडीएम स्तर से होकर कलेक्ट्रेट पहुंचा। अवार्ड फरवरी में पारित हुआ और कहा गया था कि मार्च अंत तक राशि खाते में आ जाएगी, लेकिन छह माह बाद भी भुगतान नहीं हुआ।
ग्राम जमूड़ी सरवर के मेहरबान सिंह के दो खसरे इस सड़क में प्रभावित हुए थे। दोनों के प्रकरण एक साथ तैयार हुए थे। एक खसरे की राशि मिल चुकी है, लेकिन दूसरे खसरे की राशि अब तक नहीं आई, किसान उसी का इंतजार कर रहे हैं।
बयाना डूबने का संकट
मुआवजे की देरी से किसानों के सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है। सड़क में जमीन जाने के बाद कई किसानों ने अन्य स्थानों पर जमीन खरीद ली थी। बयाना दे चुके किसानों को अब रजिस्ट्री कराने के लिए बाजार से ब्याज पर राशि उठानी पड़ रही है। मुआवजा नहीं मिलने और ब्याज का बोझ बढ़ने से किसान दोहरी मार झेल रहे हैं। यदि खरीदी गई जमीन का पूरा पैसा नहीं दिया तो बयाना डूबने की आशंका उन्हें सता रही है।
इधर अधिकारियों का कहना है कि प्रकरणों के सत्यापन और कोष से राशि जारी करने की प्रक्रिया चल रही है। किसानों को जल्द भुगतान किया जाएगा।
परियोजना के आंकड़े
इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड सड़क 48 किलोमीटर लंबी है और इसकी कुल लागत 2935 करोड़ रुपये है। इस परियोजना के लिए 917 किसानों की 242.939 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई है, जिसमें से 816 करोड़ रुपये से अधिक मुआवजा वितरित किया जा चुका है। यह सड़क इंदौर के 20 और उज्जैन के आठ गांवों से गुजर रही है। ग्रीन फील्ड कॉरिडोर का भूमिपूजन हुआ है और इसे मध्य प्रदेश के लिए एक बड़ी सौगात बताया गया है, जो छह जिलों को एक साथ जोड़ेगा और 15 लाख लोगों को सीधा फायदा पहुंचाएगा।

