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2026-10-17

इंदौर में खजराना-बंगाली चौराहे के बीच अंडरग्राउंड मेट्रो का विरोध, 300 से अधिक रहवासियों ने किया प्रदर्शन

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, इंदौर।

रविवार को इंदौर के बंगाली चौराहे पर तिलकनगर, गोयल नगर और साईंनाथ कॉलोनी के रहवासियों ने मेट्रो को भूमिगत किए जाने के विरोध में प्रदर्शन किया। यह विरोध बंगाली चौराहे से पलासिया के बीच मेट्रो को भूमिगत किए जाने की योजना के खिलाफ था, जिसके तहत अब खजराना और बंगाली चौराहे के बीच अंडरग्राउंड मेट्रो चलेगी।
सुबह 300 से ज्यादा लोग हाथों में मेट्रो के विरोध में तख्तियां लेकर बंगाली चौराहे पर बने मेट्रो स्टेशन के सामने पहुंचे और उन्होंने जमकर नारेबाजी की।
साईंनाथ के रहवासी मनोज दलाल का कहना है कि रहवासी क्षेत्र से भूमिगत मेट्रो नहीं निकलनी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व में कनाड़िया मेन रोड से मेट्रो को एलिवेटेड ले जाने की योजना थी।
दलाल ने सुझाव दिया कि इस रोड के नीचे से भूमिगत मेट्रो की सुरंग बनाई जानी चाहिए। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि इस क्षेत्र में कई पुराने मकान हैं और सुरंग बनने से उनमें दरारें आने की आशंका है।
रहवासी विपुल जैन के मुताबिक, घरों के नीचे से मेट्रो की सुरंग का निर्माण होने पर कई लोगों के घरों के बोरिंग भी खत्म हो जाएंगे। रहवासियों ने मेट्रो प्रबंधन से इस क्षेत्र के अलावा किसी अन्य क्षेत्र से मेट्रो की सुरंग का निर्माण करने का आग्रह किया।

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राष्ट्रीय लोक अदालत में निगम को मिला रिकॉर्ड राजस्व

वर्ष 2026 की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत, जो 12 सितंबर को आयोजित हुई, नगर निगम इंदौर के लिए राहतभरी रही। इस लोक अदालत में नगर निगम को राजस्व के रूप में कुल 97.57 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।
प्राप्त राजस्व में से 92.71 करोड़ रुपये का राजस्व आम नागरिकों ने संपत्ति कर, जल कर और कचरा कर के रूप में जमा कराया। वहीं, इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) ने 3.36 करोड़ रुपये और मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने लगभग डेढ़ करोड़ रुपये टैक्स के रूप में जमा कराए।
नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी शनिवार देर रात तक रसीदों की एंट्री में जुटे रहे, जिसके बाद रविवार को ये आंकड़े जारी किए गए।
प्रभारी महापौर राजेंद्र राठौर, निगमायुक्त क्षितिज सिंघल और राजस्व प्रभारी निरंजन सिंह चौहान ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के प्रति नागरिकों में अपेक्षा से अधिक उत्साह देखा गया।
सुबह से ही जोनल कार्यालयों सहित निगम मुख्यालय पर करदाताओं की लंबी कतारें नजर आने लगी थीं। राष्ट्रीय लोक अदालत के दिन वर्षा होने के बावजूद नागरिकों का उत्साह कम नहीं हुआ।
राष्ट्रीय लोक अदालत में नगर निगम को संपत्ति कर के रूप में लगभग 89 करोड़ रुपये, जल कर के रूप में लगभग आठ करोड़ रुपये और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन शुल्क के रूप में 55 लाख रुपये प्राप्त हुए।
नागरिकों की सुविधा को देखते हुए निगम के सभी राजस्व कार्यालय देर रात तक खुले रहे।
इस बार ई-नगर पालिका पोर्टल ने राष्ट्रीय लोक अदालत में सफलतापूर्वक काम किया। पोर्टल के माध्यम से भुगतान की प्रक्रिया पूरे दिन सुचारु और निर्बाध रूप से चलती रही।
जोनल कार्यालयों सहित किसी भी जगह से पोर्टल को लेकर कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई। राष्ट्रीय लोक अदालत के दिन कुल 24,660 रसीदें बनीं।