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छत से टपकता पानी, गिरती दीवारें… बच्चे पढ़ने नहीं, डरने जाते हैं स्कूल

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छत से टपकता पानी, गिरती दीवारें… बच्चे पढ़ने नहीं, डरने जाते हैं स्कूल
कटनी के सरकारी स्कूल की ये तस्वीर सिर्फ एक कक्षा नहीं, बल्कि सिस्टम की उपेक्षा का आईना है। टपकती छत, गिरती दीवारें और पढ़ाई करतीं मजबूर बच्चियाँ — ये है गांव की शिक्षा की सच्ची तस्वीर।

By Buland Soch News Desk | 📅 31 जुलाई 2025

मध्य प्रदेश के कटनी जिले के सधुराम हाई स्कूल की हालत ऐसी हो चुकी है कि वहां पढ़ाई नहीं, बल्कि जान बचाने की चुनौती है। छतों से पानी टपकता है, दीवारें दरक रही हैं और दरवाजे-खिड़कियाँ टूटी हुई हैं। यह स्कूल अब शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की जीती-जागती मिसाल बन चुका है।

स्कूल नहीं, खंडहर!

Buland Soch News की टीम जब Vista News की रिपोर्ट के बाद सधुराम स्कूल पहुंची, तो हालात और भी खराब निकले। बरसात के मौसम में छत से लगातार पानी टपकता है, दीवारें सीलन से भर चुकी हैं और क्लासरूम्स में मलबा गिर रहा है। कुछ कमरों की छत कभी भी गिर सकती है।

ब्रिटिश काल की इमारत, आज बन चुकी है मौत का खतरा

स्थानीय जानकारी के अनुसार, यह स्कूल भवन 1856-57 के आसपास बना था और इसे बाद में हाई स्कूल के रूप में मान्यता दी गई। लेकिन आज यह इमारत न तो बच्चों के लिए सुरक्षित है, न ही किसी आपात स्थिति के लिए तैयार

सवालों के घेरे में प्रशासन

कटनी नगर निगम, जिला शिक्षा अधिकारी और शिक्षा विभाग — सभी को इस भवन की हालत की जानकारी है, लेकिन अब तक कोई भी मरम्मत कार्य शुरू नहीं हुआ है। प्रशासनिक स्तर पर इस स्कूल का कोई स्ट्रक्चरल ऑडिट तक नहीं हुआ

देश में बढ़ते स्कूल हादसे: क्या सरकार को कोई सबक मिलेगा?

हाल ही में राजस्थान के झालावाड़ जिले में एक सरकारी स्कूल की छत गिरने से 7 बच्चों की मौत हो गई थी और 21 घायल हो गए थे। NDTV और TOI की रिपोर्टों के अनुसार, बच्चों ने हादसे से पहले शिकायत की थी कि छत झुकी हुई है — लेकिन स्कूल प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया।

क्या कटनी प्रशासन भी किसी ऐसी ही अनहोनी का इंतजार कर रहा है?

आँकड़े जो डराते हैं:

  • मध्य प्रदेश में 59,000 से ज्यादा क्लासरूम मरम्मत योग्य घोषित किए गए हैं।
  • 6,798 स्कूलों में सिर्फ एक ही शिक्षक पदस्थ है।
  • कई स्कूलों के भवन आज भी प्री-इंडिपेंडेंस एरा के हैं, जिनकी नियमित जांच नहीं होती।

बच्चों की जान जोखिम में, लेकिन सरकार मौन क्यों?

स्कूल में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं और उनके अभिभावक इस बात से सहमे हुए हैं कि कहीं राजस्थान जैसा कोई बड़ा हादसा यहाँ भी न हो जाए। लेकिन प्रशासन या शिक्षा विभाग ने अब तक न कोई वैकल्पिक स्कूल व्यवस्था की है, न किसी तरह की अस्थायी शिफ्टिंग।

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