बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश की उच्च माध्यमिक शिक्षक (वर्ग-1) भर्ती 2023 में कुल 8,721 पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ की गई थी। इनमें से केवल 2,901 अभ्यर्थियों को ही नियुक्ति प्रदान की गई है।
शेष पात्र अभ्यर्थी पदवृद्धि और द्वितीय काउंसलिंग की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। ये अभ्यर्थी पिछले 21 दिनों से भोपाल के नीलम पार्क में धरने पर बैठे हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि वर्ष 2018 की भर्ती के शेष पदों को वर्ष 2023 की भर्ती में शामिल किया गया था। उनके अनुसार, राजपत्र के प्रावधानों के आधार पर लगभग 17 हजार पदों की आवश्यकता थी।
स्कूल शिक्षा विभाग ने हालांकि केवल 8,721 पद ही जारी किए, जिनमें से 2,901 अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी गई। इससे बड़ी संख्या में पात्र अभ्यर्थी प्रतीक्षा सूची में शामिल हैं।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पद होने के बावजूद सीमित पदों पर भर्ती की जा रही है और कई बार जारी किए गए पद भी पूरी तरह नहीं भरे जाते। ऐसे रिक्त पदों को बैकलॉग के रूप में अगली भर्ती में जोड़ दिया जाता है।
पदवृद्धि और द्वितीय काउंसलिंग के संबंध में विभाग की ओर से कोर्ट केस का हवाला दिया जा रहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यह मामला ईडब्ल्यूएस में आयु-आरक्षण से संबंधित है और इसका पदवृद्धि से सीधा संबंध नहीं है।
अभ्यर्थियों ने सरकार से मांग की है कि 10 हजार पद बढ़ाकर द्वितीय काउंसलिंग कराई जाए और पात्र प्रतीक्षा सूची के अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर दिया जाए।
भोपाल में 26वें दिन चयनित शिक्षक सीधे डीपीआई (लोक शिक्षण संचालनालय) पहुंचे और रातभर दफ्तर के बाहर डेरा जमाए रखा। वे 10 हजार पद बढ़ाने की मांग पर अड़े हुए हैं।
प्रतीक्षा सूची के वर्ग-1 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थी 10 हजार अतिरिक्त पद जोड़ने और द्वितीय काउंसलिंग कराने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे पहले से चयन प्रक्रिया में शामिल पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर मिल सकता है। भर्ती प्रक्रिया शुरू हुए लगभग चार वर्ष होने को हैं और वे लंबे समय से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

