बुलंद सोच।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के 2001 से 2020 तक के हर घंटे के बारिश के आंकड़ों के विश्लेषण से मानसून के समय और मात्रा में बदलाव सामने आया है। इस विश्लेषण के अनुसार, गंगा के मैदानी इलाकों में बारिश का चरम समय पहले हो गया है, जबकि मध्य भारत में सबसे ज्यादा बारिश का समय आगे खिसक गया है। वर्ष 2011-20 के दौरान पश्चिम-मध्य भारत में औसत बारिश में 2001-10 के मुकाबले लगभग दो मिलीमीटर प्रतिदिन की वृद्धि दर्ज की गई। इसके विपरीत, पूर्वी भारत में बारिश में लगभग एक मिलीमीटर प्रतिदिन की कमी आई। यह दर्शाता है कि देश में मानसून के स्वरूप में आया बदलाव सभी क्षेत्रों में एक समान नहीं है।
अध्ययन का आधार
यह अध्ययन इसरो के जीएस मैप पर आधारित है, जिसमें जून से सितंबर के मानसून सीजन के 20 साल के आंकड़े शामिल किए गए। वैज्ञानिकों ने इन आंकड़ों को 2001-10 और 2011-20, इन दो दशकों में विभाजित किया। इस अध्ययन की एक विशेषता यह है कि इसमें हर घंटे की बारिश को दर्ज किया गया है। वैज्ञानिकों ने मानसून के दौरान रोजाना सबसे अधिक बारिश होने के समय का अवलोकन किया और फिर दोनों दशकों के औसत चरम समय की तुलना की।
बदलाव के संभावित कारण
वैज्ञानिकों ने बारिश के समय में बदलाव के संभावित कारणों में एयरोसोल, यानी हवा में मौजूद बेहद छोटे कणों के बदलाव को भी देखा है। अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2011-20 में गंगा के मैदानी क्षेत्र में एयरोसोल की मात्रा अन्य कई क्षेत्रों की तुलना में अधिक रही। एयरोसोल बादलों में होने वाली प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे बादलों के बनने की प्रक्रिया में परिवर्तन आ सकता है।
क्षेत्रवार बारिश की मात्रा में अंतर
बारिश की मात्रा में भी क्षेत्रवार अंतर आया है। 2011-20 की अवधि में, पश्चिम-मध्य भारत में 2001-10 की तुलना में बारिश में लगभग दो मिलीमीटर प्रतिदिन का सकारात्मक बदलाव दर्ज हुआ। वहीं, पूर्वी भारत में लगभग एक मिलीमीटर प्रतिदिन की कमी आई। पूर्वोत्तर में बदलाव एक जैसा नहीं था।

