सतना जिले में इस वर्ष हुई अतिवृष्टि से सड़क अधोसंरचना को व्यापक क्षति पहुंची है। लोक निर्माण विभाग की 30 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 260.04 किलोमीटर विभिन्न मार्ग क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनकी स्थायी मरम्मत के लिए 421.50 लाख रुपये और अस्थायी मरम्मत के लिए 105.20 लाख रुपये की आवश्यकता है। मझगवां क्षेत्र सर्वाधिक प्रभावित रहा, जबकि उचेहरा, नागौद और रामनगर में भी सड़कों को नुकसान पहुंचा है। क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों की स्थायी मरम्मत पर 1209.50 लाख रुपये और अस्थायी मरम्मत पर 70.50 लाख रुपये का खर्च अनुमानित है।
ग्वालियर में कम बारिश के कारण गर्मी में जल संकट की आशंका के मद्देनजर, जल संसाधन विभाग ने अपर ककैटो, ककैटो और पेही बांधों से पानी तिघरा बांध में स्थानांतरित करने की कवायद शुरू की है। इस कदम से तिघरा में लगभग दो महीने के अतिरिक्त पानी की व्यवस्था हो सकेगी, जिससे शहर की आगामी पेयजल जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। हालांकि, बांध को पूरी क्षमता तक भरने के लिए अच्छी बारिश अभी भी आवश्यक है। विभाग जून 2024 जैसी स्थिति से बचने के लिए योजना बना रहा है।
मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है, जिससे पूर्वी हिस्से में भारी बारिश हो रही है। सतना और चित्रकूट में स्थिति गंभीर है, जहां चित्रकूट में मंदाकिनी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है और मंगलवार को रामघाट की 400 दुकानें जलमग्न हो गईं। सतना जिले में 2 और 3 सितंबर को स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखने का आदेश दिया गया है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में 7 जिलों में अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
सतना जिले में भारी बारिश के कारण बाढ़ का खतरा बढ़ गया है, जिससे मंदाकिनी, सतना और सेमरावल जैसी नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी ने रौद्र रूप दिखाया, जहां सुबह 6 बजे जलस्तर 137.15 मीटर दर्ज किया गया। प्रशासन ने आरोग्यधाम क्षेत्र में मुनादी कराकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। सेमरावल नदी के उफान से 40 गांवों में अलर्ट जारी किया गया है, जबकि टमस नदी के रामनगर जलाशय के 12 गेट खोल दिए गए हैं। कलेक्टर ने पूरे जिले में प्रशासनिक अमले को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।
मध्य भारत में निम्न दबाव और उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ के कारण देश भर में मूसलाधार बारिश हो रही है। नदियों में उफान से बाढ़ की स्थिति बनी है और भूस्खलन के कारण 200 से अधिक सड़कें बंद हो गई हैं। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक भारी बारिश का अनुमान जताते हुए 12 से अधिक राज्यों के लिए अलर्ट जारी किया है। उत्तराखंड में आदि कैलाश मार्ग ठप पड़ा है, जम्मू-कश्मीर में एक पर्यटक की मौत हुई है, हरियाणा में एक कमांडो का शव मिला है और बिहार में प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है, जिससे सितंबर माह के आधे बीतने तक प्रदेश में कुल 88 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई है। भोपाल और ग्वालियर समेत 18 जिलों ने अपना बारिश का कोटा पूरा कर लिया है, जबकि इंदौर, उज्जैन और जबलपुर समेत 37 जिलों में यह लक्ष्य अधूरा रहा। मौसम विभाग के अनुसार, अगले चार दिनों में भारी बारिश की संभावना नहीं है और 15 सितंबर से बारिश का सिस्टम कमजोर हो गया है। पूर्वी हिस्सों में रिकॉर्ड बारिश दर्ज हुई है, वहीं पश्चिमी हिस्से सूखे रहे हैं, हालांकि पिछले सप्ताह आंकड़ों में सुधार देखा गया था।
मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई से पूर्व 19 सितंबर के बाद एक नया मौसम तंत्र सक्रिय होने की संभावना है। प्रदेश में अब तक 33 इंच बारिश दर्ज हुई है, जबकि सामान्य आंकड़ा 37.3 इंच है, जिससे 4.3 इंच बारिश की कमी बनी हुई है। वर्तमान में सामान्य से लगभग 6% कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, यह नया तंत्र मानसून का सामान्य कोटा पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। मानसून सीजन समाप्त होने में लगभग 14 दिन शेष हैं, और अब तक सामान्य बारिश का 88.5% कोटा पूरा हो चुका है। जून और जुलाई में कम बारिश के कारण यह कमी बनी हुई है।
मध्य प्रदेश में 23 सितंबर से बारिश की गतिविधियां बढ़ने और 24-25 सितंबर को तेज बारिश होने की संभावना है। पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में इसका अधिक असर रहेगा, साथ ही भोपाल और नर्मदापुरम में भी बारिश होगी। मौसम विभाग के अनुसार, निम्न दाब क्षेत्र के प्रभाव से लगभग 17 जिलों में भारी से अति भारी बारिश हो सकती है। प्रदेश में अब तक 33.7 इंच बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 6% कम है। मानसून की विदाई से पहले यह बारिश मौजूदा आंकड़ों में सुधार ला सकती है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के 2001 से 2020 तक के बारिश के आंकड़ों के विश्लेषण से मानसून के समय और मात्रा में महत्वपूर्ण बदलाव सामने आए हैं। गंगा के मैदानी इलाकों में बारिश का चरम समय पहले हो गया है, जबकि मध्य भारत में यह आगे खिसक गया है। वर्ष 2011-20 के दौरान पश्चिम-मध्य भारत में औसत बारिश लगभग दो मिलीमीटर प्रतिदिन बढ़ी, वहीं पूर्वी भारत में लगभग एक मिलीमीटर प्रतिदिन की कमी दर्ज हुई। वैज्ञानिकों ने इन बदलावों के संभावित कारणों में एयरोसोल के प्रभाव को भी देखा है, जो बादलों के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।
बालाघाट जिले में गुरुवार-शुक्रवार से जारी बारिश के कारण समरिया नाला उफान पर है, जिससे चार पंचायतों का आवागमन बाधित हो गया है। गढ़ी में तीन कच्चे मकान धराशायी हुए हैं। भीमगढ़ जलाशय का जलस्तर बढ़ने पर 26 सितंबर को दो गेट खोलकर वैनगंगा नदी में पानी छोड़ा गया। इसी बीच, बालाघाट में जन्में फिल्म अभिनेता मुश्ताक खान का मुंबई में निधन हो गया है।