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मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार पर ब्रेक, 37 जिलों में बारिश का कोटा अधूरा

मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है, जिससे सितंबर माह के आधे बीतने तक प्रदेश में कुल 88 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई है। भोपाल और ग्वालियर समेत 18 जिलों ने अपना बारिश का कोटा पूरा कर लिया है, जबकि इंदौर, उज्जैन और जबलपुर समेत 37 जिलों में यह लक्ष्य अधूरा रहा। मौसम विभाग के अनुसार, अगले चार दिनों में भारी बारिश की संभावना नहीं है और 15 सितंबर से बारिश का सिस्टम कमजोर हो गया है। पूर्वी हिस्सों में रिकॉर्ड बारिश दर्ज हुई है, वहीं पश्चिमी हिस्से सूखे रहे हैं, हालांकि पिछले सप्ताह आंकड़ों में सुधार देखा गया था।

मानसून के समय और मात्रा में बदलाव, गंगा के मैदान में चरम समय पहले आया, मध्य भारत में खिसका

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के 2001 से 2020 तक के बारिश के आंकड़ों के विश्लेषण से मानसून के समय और मात्रा में महत्वपूर्ण बदलाव सामने आए हैं। गंगा के मैदानी इलाकों में बारिश का चरम समय पहले हो गया है, जबकि मध्य भारत में यह आगे खिसक गया है। वर्ष 2011-20 के दौरान पश्चिम-मध्य भारत में औसत बारिश लगभग दो मिलीमीटर प्रतिदिन बढ़ी, वहीं पूर्वी भारत में लगभग एक मिलीमीटर प्रतिदिन की कमी दर्ज हुई। वैज्ञानिकों ने इन बदलावों के संभावित कारणों में एयरोसोल के प्रभाव को भी देखा है, जो बादलों के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।

मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई शुरू, अगले चार दिन बारिश पर ब्रेक

मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई शुरू होने वाली है, जिसके चलते अगले चार दिनों तक बारिश की गतिविधियां कमजोर रहेंगी। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर संभाग समेत कई हिस्सों में तेज धूप निकलने के आसार हैं। उज्जैन और ग्वालियर संभाग से मानसून सबसे पहले लौट सकता है। प्रदेश में अब तक सामान्य से लगभग 4% कम बारिश दर्ज की गई है, खासकर पश्चिमी जिलों में अधिक कमी देखी गई है। जून की शुरुआती कमी जुलाई और अगस्त की अच्छी बारिश के बावजूद पूरी नहीं हो पाई, जिससे कुल बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा।

मध्य प्रदेश में औसत से 19 प्रतिशत कम वर्षा, इंदौर संभाग के अधिकांश जिले प्रभावित

मध्य प्रदेश में इस वर्ष मानसून की स्थिति औसत से 19 प्रतिशत कम वर्षा के साथ बनी हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 20 प्रतिशत और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 18 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इंदौर संभाग के अधिकांश जिले, बुरहानपुर, खरगोन और देवास को छोड़कर, औसत से कम वर्षा से प्रभावित हैं। इंदौर जिले में औसत से 10 प्रतिशत और इंदौर शहर में 133.2 मिमी कम बारिश हुई है। वर्तमान में उत्तर-पूर्व मध्य प्रदेश पर एक कम दबाव का क्षेत्र और अन्य मौसम प्रणालियाँ सक्रिय हैं, जिससे पूर्वी मध्य प्रदेश में अच्छी बारिश हो रही है।

मालवांचल में कम वर्षा पर मंथन आज, पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी होंगे शामिल

इंदौर में गुरुवार सुबह हल्की वर्षा दर्ज की गई, जबकि दोपहर में उमस ने परेशान किया। अधिकतम तापमान सामान्य से कम और न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहा। शुक्रवार को बूंदाबांदी की संभावना है। इसी बीच, मालवांचल में कम वर्षा को लेकर सामाजिक संस्था सेवा सुरभि सात अगस्त को शाम साढ़े चार बजे एक मंथन कार्यक्रम आयोजित करेगी। इसमें पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी सहित कई पर्यावरणविद और शहर के नागरिक पर्यावरण संरक्षण की दिशा में आम आदमी की उदासीनता जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

देश के कई हिस्सों में शनिवार को भारी बारिश की संभावना

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने शनिवार को देश के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई है। विभाग ने उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्वी, पूर्वोत्तर, पश्चिमी और प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान लगाया है। लोगों को जलभराव और बाढ़ वाले इलाकों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। उत्तरी राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में भी तेज बारिश की उम्मीद है। पूर्वी, पूर्वोत्तर, पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों में भी व्यापक बारिश का पूर्वानुमान है। शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर में मूसलाधार बारिश से सड़कें जलमग्न हो गईं और यातायात बाधित हुआ।

मध्य प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां तेज, शिवपुरी में छह इंच तक वर्षा दर्ज

मध्य प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां एक बार फिर तेज हो गई हैं, जिसका मुख्य कारण प्रदेश के पास से गुजर रहा मानसून ट्रफ है। शुक्रवार-शनिवार रात शिवपुरी जिले में छह इंच तक भारी वर्षा दर्ज की गई, जिसमें धनियाधाना में सर्वाधिक 160 मिमी बारिश हुई। भोपाल में बादल छाए रहे लेकिन वर्षा नहीं हुई। मौसम विभाग के अनुसार, कमजोर हुए कम दबाव के क्षेत्र और बंगाल की खाड़ी में बने नए सिस्टम के प्रभाव से अगले दो दिन प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश जारी रहने की संभावना है, खासकर पूर्वी और मध्यवर्ती जिलों में।

मध्य प्रदेश में मानसून सुस्त: 42 जिलों में सामान्य से कम बारिश, अगले दो दिन भारी वर्षा नहीं

मध्य प्रदेश में मानसून का सीजन आधा गुजरने के बाद भी प्रदेश में लगभग 15 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है, जिससे 42 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। अब तक औसतन 15.8 इंच (401.9 मिमी) वर्षा हुई है, जबकि 18.5 इंच (470.5 मिमी) होनी चाहिए थी। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक भारी बारिश की संभावना नहीं जताई है, हालांकि 4 अगस्त से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से 5 अगस्त के बाद पूर्वी और उत्तरी हिस्सों में बारिश तेज हो सकती है।

मध्यप्रदेश के 18 जिलों में भारी वर्षा का अलर्ट, पूर्वी-मध्य हिस्सों में मानसून होगा और तेज

उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बना हवा का दबाव गहरा अवदाब बनकर 27 जुलाई दोपहर तक ओडिशा-बंगाल तट से टकराएगा, जिससे मध्यप्रदेश में मानसूनी गतिविधियां तेज होंगी। रीवा, सतना, जबलपुर सहित 18 जिलों में भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है। पूर्वी और मध्य हिस्सों में तेज हवाओं के साथ भारी से अति भारी वर्षा की संभावना है, जबकि पश्चिमी क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बौछारें पड़ सकती हैं। वर्षा के बावजूद, दिन के तापमान में 1-4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे उमस बढ़ी है।

मध्य प्रदेश में मानसून सुस्त, वर्षा का घाटा 16 प्रतिशत

मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से वर्षा का घाटा बढ़कर 16 प्रतिशत हो गया है। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 23 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। प्रदेश के 39 जिलों में सामान्य से कम वर्षा हुई है, जिनमें अनूपपुर, बालाघाट, जबलपुर और सागर जैसे जिले शामिल हैं। भोपाल मौसम केंद्र के अनुसार, अब तक 261.4 मिमी बारिश हुई है, जबकि सामान्यतः 311.8 मिमी होनी चाहिए थी। मौसम विभाग ने जुलाई के अंतिम सप्ताह में मजबूत मौसम तंत्र सक्रिय होने से अच्छी बारिश की उम्मीद जताई है, जिससे वर्षा की कमी पूरी हो सकती है।