बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के निजी प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग विज्ञान महाविद्यालयों में बैचलर ऑफ नैचुरोपैथी एंड यौगिक साइंस (बीएनवायएस) में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए नए नियम जारी किए हैं। इन नए नियमों के अनुसार, अब इस पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) अनिवार्य नहीं होगी। विद्यार्थियों का चयन 12वीं कक्षा में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (पीसीबी) में प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार मेरिट सूची से किया जाएगा। प्रवेश प्रक्रिया एमपी ऑनलाइन के आयुष पोर्टल के माध्यम से केंद्रीकृत ऑनलाइन काउंसिलिंग से पूरी होगी।
योग्यता और आयु मानदंड
नए नियमों के तहत, अभ्यर्थी का 10 प्लस 2 में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी विषयों से अलग-अलग पास होना आवश्यक है। अनारक्षित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के विद्यार्थियों के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए हैं, जबकि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक अनिवार्य होंगे। प्रवेश वर्ष की 31 दिसंबर तक अभ्यर्थी की आयु कम से कम 17 वर्ष होनी चाहिए। मेरिट सूची 12वीं के फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी में प्राप्त कुल अंकों के आधार पर तैयार की जाएगी, जिससे प्रवेश में नीट स्कोर के बजाय 12वीं की मार्कशीट महत्वपूर्ण होगी।
काउंसिलिंग प्रक्रिया
प्रवेश के लिए अभ्यर्थियों को एमपी ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा, जिसके लिए 600 रुपये शुल्क निर्धारित है। पंजीकरण के बाद कॉलेज की पसंद भरने के लिए 50 रुपये का शुल्क देय होगा। ऑनलाइन आवेदन के उपरांत मूल दस्तावेजों का सत्यापन प्रदेश के किसी भी सरकारी आयुर्वेद, होम्योपैथी या यूनानी कॉलेज में उपस्थित होकर कराना होगा। काउंसिलिंग प्रक्रिया चार चरणों में संपन्न होगी, जिसमें प्रथम चरण, द्वितीय चरण, तृतीय चरण और अंत में स्ट्रे वेकेंसी राउंड शामिल हैं।
आरक्षण प्रावधान
प्रवेश में राज्य शासन के प्रचलित आरक्षण नियम लागू होंगे, जिसके तहत अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और ईडब्ल्यूएस वर्ग को निर्धारित आरक्षण मिलेगा। इसके अतिरिक्त, क्षैतिज आरक्षण के तहत दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए 6 प्रतिशत, सैनिक संवर्ग के बच्चों के लिए 3 प्रतिशत, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों के लिए 3 प्रतिशत और महिला अभ्यर्थियों के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
सीधे प्रवेश पर रोक
नियमों में कॉलेजों को सीधे प्रवेश देने से भी प्रतिबंधित किया गया है। यदि किसी कॉलेज ने काउंसिलिंग प्रक्रिया से बाहर जाकर सीधे प्रवेश दिया, तो उसकी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) रद्द की जा सकती है और प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, अभ्यर्थी द्वारा आवेदन में गलत जानकारी देने या आपराधिक मामला सामने आने पर प्रवेश निरस्त करने के साथ प्राथमिकी (एफआईआर) की कार्रवाई भी की जा सकती है।

