बुलंद सोच, इंदौर।

दो साल बाद उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ में लगभग 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। ऐसे में उज्जैन पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा पुलिस व प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। इस चुनौती का समाधान करने में महू का मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (एमसीटीई) अपना सहयोग देगा। यह पहली बार होगा जब सिंहस्थ जैसे किसी बड़े जन समूह वाले आयोजन में भारतीय सेना सहयोग प्रदान करेगी।
प्रदेश सरकार के विज्ञान एवं तकनीकी विभाग और एमसीटीई, महू के बीच नवंबर 2025 में एक अनुबंध हुआ था। इसके बाद दो दौर की बैठकें हो चुकी हैं, जिनमें एमसीटीई ने सिंहस्थ में भीड़ प्रबंधन व अपराध प्रबंधन के लिए तकनीक उपलब्ध कराने पर सहमति व्यक्त की थी। अब सितंबर में उज्जैन में होने वाली तीसरे दौर की बैठक में प्रदेश सरकार व एमसीटीई, महू के प्रतिनिधियों के बीच इस विषय पर विस्तृत चर्चा होगी।
एमसीटीई की प्रमुख तकनीकें
एमसीटीई, महू के पास तीन महत्वपूर्ण तकनीकें उपलब्ध हैं। इनमें से एक एआई पर आधारित व्हीकल रिकॉग्निशन सिस्टम है, जिसके माध्यम से किसी भी वाहन का नंबर प्लेट से उसकी पहचान की जा सकती है। एमसीटीई के सिस्टम में देश के सभी वाहनों का डेटाबेस और उनकी जानकारी मौजूद है, जिससे सिंहस्थ क्षेत्र में किसी संदिग्ध वाहन के दिखाई देने पर पांच से सात सेकंड में उसकी पहचान हो सकेगी। उस क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरे वाहन के नंबर को पढ़कर राष्ट्रीय डेटाबेस से मिलान करेंगे, जिससे वाहन मालिक, उसके उपयोग का कार्य और परमिट की जानकारी प्राप्त हो सकेगी।
दूसरा महत्वपूर्ण सिस्टम फेस रिकॉग्निशन सिस्टम है, जिसे एमसीटीई ने विकसित किया है। इसमें देश-विदेश के सभी अपराधियों का डेटा फीड है। इसके अतिरिक्त, इस सिस्टम में फेसबुक और एक्स जैसे इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म पर मौजूद लोगों की जानकारी भी उपलब्ध है। इस सिस्टम में किसी व्यक्ति विशेष का फोटो डालते ही उसकी जानकारी और कुंडली सामने आ जाएगी।
तीसरी तकनीक साइबर सुरक्षा सिस्टम है, जो आईटी उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है और हैकिंग को रोकती है। सिंहस्थ में उपयोग होने वाले उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एमसीटीई के इस सिस्टम का उपयोग किया जाएगा।
महू के एमसीटीई द्वारा तकनीकी रूप से तैयार किए गए इन सिस्टम का उपयोग भारतीय सेना अपनी चेकपोस्ट पर जांच में कर रही है। भारतीय सेना की अलग-अलग इकाइयां भी सुरक्षा जांच में इन सिस्टम का उपयोग कर रही हैं।
प्रयागराज सिंहस्थ का सुरक्षा मॉडल
प्रयागराज सिंहस्थ में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए निजी एजेंसियों की सेवाएं ली गई थीं। वहां एआई संचालित फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक का उपयोग संदिग्धों व अपराधियों की पहचान में किया गया था। नौ प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर 100 से अधिक फेशियल रिकॉग्निशन कैमरे लगाए गए थे, वहीं एआई और स्मार्ट सीसीटीवी सर्विलांस सिस्टम से भीड़ नियंत्रण का कार्य किया गया था।
प्रयागराज में पूरे मेला परिसर में 2,700 से अधिक एआई-सक्षम सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। ये कैमरे किसी भी घाट या मार्ग पर भीड़ की संख्या का लाइव विश्लेषण करते थे और जैसे ही किसी निश्चित स्थान पर तय सीमा से अधिक भीड़ जुटती थी, सिस्टम तुरंत कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज देता था।
प्रयागराज में एक एकीकृत कमांड और नियंत्रण केंद्र भी तैयार किया गया था। यहां पर सभी कैमरों की लाइव फीड को मुख्य व्यूइंग सेंटर्स से जोड़ा गया था, जिससे मेले की रियल टाइम निगरानी संभव हुई।
उज्जैन में अभी इस तरह का कंट्रोल कमांड सेंटर बनाने की कवायद की जा रही है। उज्जैन संभाग के कमिश्नर आशीष सिंह ने बताया कि सिंहस्थ में सुरक्षा के लिए एमसीटीई महू द्वारा उपलब्ध करवाई जाने वाली तकनीक पर उनसे चर्चा की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि साइबर सुरक्षा व सिंहस्थ में श्रद्धालुओं की सुरक्षा वाली तकनीक का उपयोग किया जाएगा।

