BREAKING NEWS

Latest News

छिंदवाड़ा साइबर सेल ने 1 करोड़ रुपये से अधिक के 501 गुम मोबाइल बरामद किए

छिंदवाड़ा जिला सायबर सेल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 1 करोड़ 6 हजार रुपये की अनुमानित बाजार कीमत के 501 गुम मोबाइल फोन बरामद किए हैं। ये मोबाइल फोन तकनीकी विश्लेषण के माध्यम से जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में प्राप्त शिकायतों के आधार पर ट्रेस किए गए। बरामद मोबाइलों को आज पुलिस कंट्रोल रूम छिंदवाड़ा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनके वास्तविक मालिकों को सौंपा गया। रक्षाबंधन से पहले अपने मोबाइल वापस पाकर कई बहनों समेत नागरिकों के चेहरों पर खुशी लौट आई। यह सफलता साइबर सेल की तकनीकी दक्षता और निरंतर प्रयासों का परिणाम है।

महाराष्ट्र सरकार ने Sarvam AI के स्वदेशी समाधानों को दी मंजूरी

महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी विभागों में Sarvam AI के स्वदेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समाधानों को लागू करने की मंजूरी दे दी है। इस परियोजना पर दो वर्षों में 11.26 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिससे करीब 2,500 सरकारी कर्मचारियों के लिए ‘इंडस’ एआई वर्कस्पेस बनेगा। Sarvam AI के समाधान भारत के सुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर पर होस्ट होंगे और इसमें ‘संवाद’, ‘सारस’ और ‘बुलबुल’ एआई मॉडल भी शामिल हैं। वहीं, ठाणे सत्र अदालत ने 40 वर्षीय इंजीनियर विकार जैनुद्दीन शेख को अपनी गर्भवती पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप से बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित नहीं कर सका और जांच में खामियां पाई गईं।

2027 जनगणना का दूसरा चरण 17 अगस्त से, 1931 के बाद पहली बार दर्ज होगी जाति

2027 की जनगणना का दूसरा चरण 17 अगस्त से शुरू होगा, जिसमें 1931 के बाद पहली बार लोगों की जाति दर्ज की जाएगी। गृह मंत्रालय ने इसकी अधिसूचना जारी की है। लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले इलाकों में यह चरण 1 सितंबर से 30 सितंबर तक चलेगा। लोग 17 अगस्त से 30 अगस्त तक ऑनलाइन भी जानकारी भर सकेंगे। जाति व्यक्ति द्वारा बताई गई जानकारी के आधार पर दर्ज होगी और इसके लिए कोई प्रमाण पत्र आवश्यक नहीं होगा। माता-पिता की जन्म तिथि और स्थान की जानकारी भी ली जा सकती है, जो नागरिकता तय करने में महत्वपूर्ण मानी जाती है, हालांकि इसके लिए भी कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा।

जबलपुर मेडिकल कॉलेज में रोबोटिक सर्जरी की राह साफ

जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत का मार्ग प्रशस्त हो गया है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने कॉलेज के प्रस्ताव को सैद्धांतिक सहमति दी है, जिसका उद्देश्य सरकारी चिकित्सा में सटीक और सुरक्षित सर्जरी प्रदान करना है। पहले चरण में यह सुविधा स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (एससीआई) में शुरू होगी। हालांकि, कॉलेज की 2 करोड़ रुपये की ई-म्यूजियम परियोजना को अभी विभागीय मंजूरी का इंतजार है। रोबोटिक सर्जरी एक आधुनिक तकनीक है जिसमें प्रशिक्षित सर्जन रोबोटिक भुजाओं को नियंत्रित कर जटिल ऑपरेशन करते हैं, जिससे रिकवरी तेज होती है।

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने मेडिकल डिवाइस सॉफ्टवेयर के लिए अंतिम दिशानिर्देश जारी किए

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने देश में मेडिकल सॉफ्टवेयर के सुरक्षित उपयोग के लिए मेडिकल डिवाइस सॉफ्टवेयर (एमडीएसडब्ल्यू) के लिए अंतिम दिशानिर्देश जारी किए हैं। ये दिशानिर्देश 21 जुलाई से लागू हो गए हैं। औषधि महानियंत्रक डॉ. राजीव रघुवंशी द्वारा जारी सर्कुलर में कहा गया है कि ये गाइडलाइंस मेडिकल डिवाइस नियम-2017 के तहत मेडिकल सॉफ्टवेयर से जुड़े नियमों को स्पष्ट करती हैं। इनमें सॉफ्टवेयर की श्रेणी, सुरक्षा, गुणवत्ता, जरूरी दस्तावेज और बाजार में आने के बाद उसकी निगरानी के नियम शामिल हैं। कंपनियों को मंजूरी के लिए आवेदन करते समय इनका पालन करना होगा।

‘कवच 5.0’ से मुंबई लोकल ट्रेनें हर दो मिनट पर मिलेंगी, बढ़ेगी रफ्तार और सुरक्षा

मुंबई के लाखों लोकल ट्रेन यात्रियों को जल्द ही बड़ी राहत मिलेगी क्योंकि रेलवे ‘कवच 5.0’ स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम लागू कर रहा है। इसके तहत लोकल ट्रेनों के बीच का अंतर तीन मिनट से घटकर दो मिनट हो जाएगा, जिससे प्रतिदिन ट्रेनों की संख्या 3,000 से बढ़कर 4,000 तक पहुंचाई जा सकेगी। यह प्रणाली सुरक्षा में भी उल्लेखनीय सुधार करेगी, स्वचालित रूप से ब्रेकिंग लगाकर टक्करों को रोकेगी और कम दृश्यता में भी कार्य करेगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अप्रैल 2025 में इसकी घोषणा की थी।

महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के एआई नवाचार को भारत सरकार की मान्यता

महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय द्वारा विकसित शिक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के संगम पर एक नवाचार को भारत सरकार ने मान्यता दी है। डॉ. देव रस पाण्डेय के नेतृत्व में तैयार यह एआई आधारित डिवाइस विद्यार्थियों की सीखने की गति, रुचि और कमजोरियों का विश्लेषण कर उनकी आवश्यकता के अनुरूप अध्ययन सामग्री व मार्गदर्शन उपलब्ध कराएगा। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे ने इसे संस्थान के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

एम्स भोपाल और डीआरडीओ सैनिकों के लिए नई तकनीक विकसित करेंगे

एम्स भोपाल और डीआरडीओ की प्रमुख प्रयोगशाला डीआईपीएएस ने देश की सुरक्षा में तैनात सैनिकों को कठिन परिस्थितियों में अधिक सक्षम और सुरक्षित बनाने के लिए हाथ मिलाया है। यह समझौता स्वदेशी तकनीकों और चिकित्सा समाधानों के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा, जिससे सियाचिन, लद्दाख, ऊंचे पहाड़ों और युद्ध क्षेत्र में तैनात जवानों को सीधा लाभ मिलेगा। शोध में सैनिकों पर अत्यधिक ठंड, कम ऑक्सीजन और तनाव के प्रभावों का अध्ययन कर ऐसे उपाय विकसित किए जाएंगे, जिससे उनकी कार्यक्षमता बढ़े। परियोजना में पहनने योग्य स्मार्ट उपकरण भी बनाए जाएंगे। यह पहल विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करेगी और इसके लाभ आम मरीजों को भी मिलेंगे।