बुलंद सोच, भोपाल।
मध्य प्रदेश के फर्जी पासपोर्ट मामले में 2025 की पुलिस कार्रवाई अब सवालों के घेरे में आ गई है। उस समय पांच आवेदकों की सिफारिश वापस लेने के बाद रियल चौधरी को क्लीन चिट दिए जाने का दावा किया गया था। वर्तमान में एसटीएफ की जांच में करीब 69 पासपोर्ट सामने आए हैं। बांग्लादेशी नागरिकों द्वारा फर्जी दस्तावेजों से मध्य प्रदेश में पासपोर्ट बनवाने के मामले में एक पुराना घटनाक्रम सामने आया है। इस घटनाक्रम ने पुलिस की पिछली जांच पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
2025 में हुई कार्रवाई
दावा है कि इस मामले का सुराग पुलिस को 2025 में ही मिल गया था। तब रियल चौधरी उर्फ भंते मेतानंद से पूछताछ भी हुई थी। पांच पासपोर्ट आवेदकों की सिफारिश वापस ली गई थी। इसके बाद रियल चौधरी को क्लीन चिट दे दी गई। एसटीएफ की मौजूदा जांच में फर्जी दस्तावेजों से बड़ी संख्या में पासपोर्ट बनाए जाने का मामला सामने आने के बाद 2025 की वह कार्रवाई फिर चर्चा में है। 2025 में इंटेलीजेंस से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने रियल चौधरी से पूछताछ की थी। पूछताछ में रियल ने पासपोर्ट आवेदकों के वेरिफिकेशन में अपनी गवाही की जानकारी होने से इनकार किया था। इसके बाद पांच आवेदकों के लिए की गई सिफारिश वापस लिए जाने की बात सामने आई। दावा है कि पुलिस ने इसके बाद रियल चौधरी को क्लीन चिट दे दी थी।
एसटीएफ की मौजूदा जांच
एसटीएफ की जांच के अनुसार, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बनाए गए करीब 69 पासपोर्ट सामने आए हैं। इनमें से 40 पासपोर्ट भोपाल के अन्नानगर स्थित एक मठ से बने पाए गए हैं। 17 पासपोर्ट डबरा से, 11 पासपोर्ट बैतूल से, तथा एक-एक पासपोर्ट छिंदवाड़ा और पांढुर्णा से बनाए गए हैं। जांच में इन पासपोर्ट के लिए फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।
फर्जीवाड़े का तरीका
एसटीएफ के अनुसार, आरोप है कि कुछ बांग्लादेशी नागरिकों ने अपनी पहचान छिपाकर खुद को बौद्ध बताया। इसके बाद डबरा और आमला नगर पालिका से कथित तौर पर फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाए गए। इन दस्तावेजों के आधार पर आगे पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार कराए गए और फिर पासपोर्ट के लिए आवेदन किया गया। भोपाल नगर निगम से भी ऐसे दस्तावेज बनाए जाने की जांच की जा रही है। जांच का पूरा नेटवर्क केवल पासपोर्ट तक सीमित नहीं है। इसमें निवास प्रमाण पत्र, पहचान दस्तावेज और पुलिस वेरिफिकेशन की पूरी प्रक्रिया जांच के घेरे में है।
जांच के घेरे में सवाल
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल भोपाल के अशोक बौद्ध विहार से जुड़ा है। जांच में बड़ी संख्या में पासपोर्ट आवेदकों को बौद्ध बताए जाने की बात सामने आई है। सवाल यह है कि जहां प्रबंधक के लिए केवल एक कमरा होने की बात कही जा रही है, वहां इतनी बड़ी संख्या में आवेदकों का पता और पहचान कैसे जुड़ गई। दूसरा सवाल रियल चौधरी को लेकर है। वह खुद को बैतूल जिले के ग्राम बोरखी का बताता था। ऐसे में उसके आधार पर भोपाल में पासपोर्ट आवेदकों का वेरिफिकेशन किस प्रक्रिया के तहत हुआ, इसकी भी जांच हो रही है।
पुलिस थानों की भूमिका की जांच
एसटीएफ अब इस मामले में डबरा, आमला और भोपाल के गोविंदपुरा थाने में हुए पुलिस वेरिफिकेशन की जांच कर रही है। डबरा थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी विनायक शुक्ला, आरक्षक भूपेंद्र गुर्जर और अलग-अलग समय में बीट संभालने वाले पुलिसकर्मियों की भूमिका जांची जा रही है। संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए पत्राचार भी किया गया है। भोपाल के गोविंदपुरा थाने में तत्कालीन थाना प्रभारी अशोक सिंह परिहार समेत संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। आमला थाने में पासपोर्ट वेरिफिकेशन करने वाले पुलिसकर्मियों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
गिरफ्तारियां और आगे की जांच
एसटीएफ की कार्रवाई में रियल चौधरी और विप्लव अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद कथित बिचौलिए जॉय चौधरी को भी पकड़ा गया है। डबरा के फर्जी पते पर बने पासपोर्ट के एक धारक प्रियान अधिकारी की गिरफ्तारी भी हुई है। पूछताछ में पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कराने से लेकर पासपोर्ट बनवाने तक नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे।
पुराने मामले पर सवाल
इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब 2025 में ही पुलिस तक सूचना पहुंच गई थी, पांच आवेदकों की सिफारिश वापस भी हुई थी, तो जांच उसी समय आगे क्यों नहीं बढ़ी। क्या उस समय सिर्फ पांच आवेदकों तक मामला मान लिया गया था। क्या बाकी आवेदकों के दस्तावेजों की दोबारा जांच हुई थी। और अगर रियल चौधरी को क्लीन चिट दी गई थी, तो अब एसटीएफ की जांच में उसका नाम दोबारा क्यों सामने आया। इन सवालों के जवाब मौजूदा जांच से सामने आने हैं।
अधिकारी का बयान
एसटीएफ के डीआईजी राहुल लोढ़ा का कहना है कि इस मामले में अभी जांच चल रही है। इसमें अभी जो तथ्य सामने आ रहे हैं, उसके अनुसार कार्रवाई चल रही है। इसमें यदि पुलिस के कर्मचारियों की भी गड़बड़ी मिलती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए विभाग को लिखा जाएगा।

