बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश में वन और वन्यजीवों की सुरक्षा में लगे वनकर्मियों द्वारा गोली चलाने पर अब सीधे प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज नहीं की जाएगी। इसके लिए पहले एक मजिस्ट्रियल जांच करनी पड़ेगी।
इस जांच में यह देखा जाएगा कि वनकर्मी ने हथियार का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में किया है। यदि हथियार का उपयोग अनावश्यक या दुर्भावना से किया जाना सिद्ध होता है, तो फिर आपराधिक कार्रवाई की जाएगी, अन्यथा नहीं।
इस संबंध में वन विभाग ने शुक्रवार को अधिसूचना जारी की है। यह व्यवस्था भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 (बीएनएस) के तहत लागू की गई है।
यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वत: संज्ञान लेते हुए 2026 में जारी किए गए निर्देशों तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के प्रावधानों के अनुपालन में बनाई गई है। इसके तहत किसी भी वनकर्मी द्वारा जब भी हथियार का प्रयोग किया जाएगा, तब प्रत्येक ऐसी घटना की मजिस्ट्रियल जांच की जाएगी।
व्यवस्था का कारण
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कई बार वनकर्मियों को गंभीर परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। अपनी, वन भूमि, वन संपदा और वन्यजीवों की रक्षा के लिए उन्हें हथियार का उपयोग भी करना पड़ सकता है।
इसके बाद भी उनके विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज कर दिए जाते हैं। ऐसी स्थिति न हो, इसके कारण वन विभाग ने यह व्यवस्था बनाई है।
पुलिस कार्रवाई पर नियम
पुलिस द्वारा किसी भी प्रकार की कार्रवाई, जिसमें आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाना है या गिरफ्तारी की जानी सम्मिलित है, तभी की जाएगी जब जांच के परिणाम से यह निष्कर्ष प्राप्त हो जाएं कि हथियार का प्रयोग अनावश्यक या अनुचित था।
जांच का प्रतिवेदन शासन द्वारा स्वीकार करने के बाद ही पुलिस द्वारा कार्रवाई की जा सकेगी।
पृष्ठभूमि
उल्लेखनीय है कि वनकर्मी द्वारा हथियार के उपयोग और उसके बाद होने वाली कानूनी कार्रवाई का मुद्दा विदिशा जिले के लटेरी वन क्षेत्र में गोलीकांड के बाद चर्चा में आया था।
9 अगस्त 2022 को लटेरी क्षेत्र के खट्यापुरा जंगल में लकड़ी तस्करी रोकने गई वन विभाग की टीम और ग्रामीणों में विवाद हो गया था।
इस घटना में आदिवासी युवक चैन सिंह की मौत हो गई थी और तीन लोग घायल हुए थे। एक डिप्टी रेंजर पर हत्या का मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया था।
तत्कालीन शिवराज सरकार ने इस घटना की न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था।
इन पर लागू होगा प्रावधान
यह प्रावधान वनरक्षक, वनपाल, उपवन क्षेत्रपाल, वन क्षेत्रपाल, सहायक वन संरक्षक, उपवन मंडल अधिकारी, उप वन संरक्षक, उपसंचालक, वन मंडल अधिकारी, क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक और क्षेत्र संचालक पर लागू होगा।
इसके अतिरिक्त, यह प्रावधान ऐसे सभी वन अधिकारियों पर भी लागू होगा, जो वन एवं वन्य जीव संरक्षण संवर्धन तथा प्रबंधन से संबंधित लोक व्यवस्था बनाए रखने का दायित्व संभालते हैं।
अन्य घटनाक्रम
मध्य प्रदेश में 14.21 लाख एकड़ वन भूमि पर भू-माफिया का कब्जा है; इस संबंध में सवाल सुनते ही वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने फोन काट दिया था।

