बुलंद सोच, भोपाल।

कलियासोत और केरवा डैम के फुल टैंक लेवल (एफटीएल) और बफर क्षेत्र का निर्धारण अब तीन सप्ताह में पूरा करना होगा। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की सेंट्रल जोन बेंच ने इसके लिए निर्देश दिए हैं।
अधिकरण ने जल संसाधन विभाग के उपलब्ध रिकॉर्ड, कंटूर मैप और टोपोग्राफिकल मैप का सहारा लेने के निर्देश दिए हैं। एफटीएल और बफर क्षेत्र के सीमांकन के लिए ड्रोन सर्वे, सैटेलाइट इमेजरी और ग्राउंड ट्रुथिंग के आधार पर पूरी प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है।
एनजीटी के निर्देश पर गठित संयुक्त समिति बीते दिनों केरवा डैम का एफटीएल निर्धारण के लिए ड्रोन सर्वे करने पहुंची थी। हालांकि, केरवा डैम पर बने पुल के टूटने के कारण नया पुल निर्माण किया जा रहा है, जिससे एफटीएल पूरा न होने के कारण सर्वे नहीं किया जा सका था। इसकी जानकारी अधिकरण को दी गई थी।
अधिकरण ने जल संसाधन विभाग को केरवा में पानी निकासी बंद करने के निर्देश दिए थे। 30 सितंबर को हुई सुनवाई में अधिकरण को बताया गया कि जल संसाधन विभाग ने जरूरी सुधारात्मक कार्रवाई और पानी की निकासी का काम किया जा चुका है। फिलहाल जलाशय का जलस्तर 80 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
अधिकरण ने केरवा डैम के एफटीएल निर्धारण को लेकर कंटूर मैप और टोपोग्राफिकल मैप के आधार पर ऊंचाई तय करने की बात कही।
कलियासोत के संरक्षण और एफटीएल व बफर क्षेत्र के निर्धारण के लिए गठित समिति सीमांकन, पहचान और ग्राउंड ट्रुथिंग कर रही है।
सुनवाई में एक प्रस्तावित इंटरवेनर की ओर से कहा गया कि इस प्रक्रिया का असर जमीन और वैध अधिकारों पर पड़ सकता है। इस पर एनजीटी ने साफ किया कि चल रही कार्रवाई किसी व्यक्ति की जमीन के अधिकार, टाइटल या हित का निर्धारण नहीं कर रही है।
याचिकाकर्ता डॉ. सुभाष सी. पांडे के अनुसार, पूर्व रिकॉर्ड में केरवा जलाशय का जलमग्न क्षेत्र करीब 462.150 हेक्टेयर दर्ज है। इसकी सीमा 1080 कंक्रीट खंभों से चिह्नित की गई थी। अब ग्राउंड ट्रुथिंग और भौतिक सत्यापन में यह भी जांच होगी कि इनमें से कितने सीमा-चिह्न मौके पर मौजूद हैं।
पूर्व जांच में केरवा जलाशय क्षेत्र में 33 अवैध निर्माण चिह्नित किए गए थे। इनमें 18 सरकारी और 15 निजी भूमि से जुड़ी संरचनाएं बताई गई थीं।

