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भोपाल में दो बड़े मामलों पर आज सुनवाई

भोपाल में मंगलवार को दो महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई निर्धारित है। सुप्रीम कोर्ट में रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े 62,500 प्रतिष्ठानों के मामले में नगर निगम की कार्रवाई रिपोर्ट और रहवासियों की आपत्तियों पर सुनवाई होगी। नगर निगम ने 5 अगस्त के आदेश के बाद 8084 प्रतिष्ठानों को नोटिस दिए और 190 को बंद किया, लेकिन व्यापारियों के विरोध के बाद कार्रवाई रुक गई। वहीं, एनजीटी में बड़ा तालाब-कलियासोत डैम के एफटीएल क्षेत्र में पांच दिवसीय सर्वे की रिपोर्ट पेश होगी। सर्वे में एफटीएल के भीतर निर्माण और अतिक्रमण पाए गए हैं, जिन पर एनजीटी के निर्देश अपेक्षित हैं।

ग्वालियर पीटीएस तिघरा के 172 एकड़ हरित आवरण को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने, कार्बन क्रेडिट के लिए ‘ग्रीन पाथ’ टीम का दौरा

ग्वालियर स्थित पुलिस ट्रेनिंग स्कूल (पीटीएस) तिघरा में पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को अब अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की उम्मीद है। परिसर के 172 एकड़ क्षेत्र में लाखों पौधे रोपकर विशाल हरित आवरण तैयार किया गया है और स्थानीय जैव विविधता को पुनर्जीवित करने के कदम उठाए गए हैं। संस्थान को ‘कार्बन क्रेडिट’ दिलाने की कवायद तेज हो गई है, जिसके तहत ‘ग्रीन पाथ आर्गेनाइजेशन’ की एक टीम ने परिसर का दौरा कर सघन पौधारोपण और अन्य पहलों का भौतिक सत्यापन व वैज्ञानिक मूल्यांकन शुरू किया है। पीटीएस में एक 20 हेक्टेयर का मॉडल बगीचा भी है, जिसे कार्बन क्रेडिट के योग्य बताया गया है।

केरवा और कलियासोत डैम के एफटीएल-बफर क्षेत्र का निर्धारण तीन सप्ताह में होगा

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कलियासोत और केरवा डैम के फुल टैंक लेवल (एफटीएल) और बफर क्षेत्र का निर्धारण तीन सप्ताह में पूरा करने का निर्देश दिया है। जल संसाधन विभाग को उपलब्ध रिकॉर्ड, कंटूर मैप, टोपोग्राफिकल मैप, ड्रोन सर्वे और सैटेलाइट इमेजरी का उपयोग करने को कहा गया है। केरवा डैम पर पुल टूटने से पहले सर्वे बाधित हुआ था, जिसके बाद पानी निकासी रोकने के निर्देश दिए गए। 30 सितंबर को बताया गया कि केरवा का जलस्तर 80 प्रतिशत हो गया है। एनजीटी ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी व्यक्ति के जमीन के अधिकारों का निर्धारण नहीं कर रही है।

जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने पर जोर: ‘पेयजल का सम्मान और संरक्षण’ अभियान

जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाना एक साझा सामाजिक दायित्व है, जो भविष्य में पेयजल संकट से बचने के लिए महत्वपूर्ण है। ‘पेयजल का सम्मान और संरक्षण’ अभियान 21 जुलाई से 4 अगस्त तक पूरे देश में चलाया गया, जो ‘जल संचय जनभागीदारी: कैच द रेन-2026’ से जुड़ा है। यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्षा जल संचयन के आह्वान पर आधारित है और इसका उद्देश्य जल संग्रह, भूजल पुनर्भरण और जल स्रोतों के संरक्षण को बढ़ावा देना है। भारत को जनसंख्या वृद्धि और जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती जल चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके लिए पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियों और आधुनिक तकनीकों के समन्वय की आवश्यकता है।

पेड़ नहीं, पानी लगाने का समय आ गया: डॉ. अनिल प्रकाश जोशी

पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने इंदौर में ‘क्यों रूठ जाती है प्रकृति’ विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि अब पेड़ नहीं, पानी लगाने का समय आ गया है। उन्होंने नदियों को पुनर्जीवित करने और वर्षा जल संचय की आवश्यकता पर जोर दिया। डॉ. जोशी ने बताया कि जल संकट अब देशभर की समस्या है और भारत का ट्रॉपिकल देश होना एक लाभ है। उन्होंने मानवीय हस्तक्षेप के कारण बदलते मौसम, कृषि के नकारात्मक प्रभाव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बजाय प्राकृतिक बुद्धिमत्ता पर काम करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने पहाड़ों पर पर्यटकों की संख्या नियंत्रित करने की भी बात कही।

जबलपुर में मौसमी प्रणालियां सक्रिय, बारिश 447 मिमी पिछड़ी

जबलपुर में लगभग एक सप्ताह बाद मौसमी प्रणालियां फिर सक्रिय हो गई हैं, जिसके परिणामस्वरूप मंगलवार को जिले में खंड-खंड बारिश हुई। हालांकि, इस मानसून सीजन में अब तक केवल 324.7 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो गत वर्ष की तुलना में 447 मिमी कम है और औसत से काफी पीछे है। बारिश की कमी और संभावित जल संकट के मद्देनजर, अखिल भारतीय गायत्री परिवार ट्रस्ट, जबलपुर छह और सात अगस्त को पर्याप्त वर्षा के लिए वरुण गायत्री जप एवं यज्ञ का आयोजन करेगा।

जबलपुर आईएमए हाउस में सीढ़ीदार झरना, गणेश विसर्जन के लिए भी होगा उपयोग

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) जबलपुर शाखा ने अपने भवन का जीर्णोद्धार कर एक सीढ़ीदार जल झरना बनाया है। यह झरना भवन की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ गणेश प्रतिमा विसर्जन के लिए भी उपयोग होगा, जिससे जल और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। लगभग आठ लाख रुपये की लागत से छह माह से कम समय में पहले चरण का जीर्णोद्धार पूरा हुआ। वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. पवन स्थापक ने इस पहल की सराहना की। भवन में वाटर हार्वेस्टिंग और सोलर सिस्टम लगाने की भी योजना है, जिससे इसे आधुनिक और पर्यावरण हितैषी पहचान मिली है।

मध्य प्रदेश के सभी 55 जिलों में जल स्रोतों के बनेंगे हेल्थ रिपोर्ट कार्ड

मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई 35 मौतों के बाद जल स्रोतों की निगरानी और संरक्षण के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य के सभी 55 जिलों के डिस्ट्रिक्ट एनवायरनमेंट प्लान में संशोधन किया गया है। इंदौर में वॉटर क्वालिटी मॉनिटरिंग सेल बनेगी, जो नदियों, नालों और तालाबों की निगरानी कर हेल्थ रिपोर्ट कार्ड बनाएगी। नौ प्रमुख बिंदुओं पर कार्ययोजना बनी है, जिसमें भूजल, सतही जल और दूषित पानी का उपचार शामिल है। यह योजना 12 से 24 महीनों में लागू होगी।

भोपाल में प्राकृतिक संपदा संरक्षण की जिम्मेदारी बंटी; तेलंगाना और कर्नाटक में अलग अथॉरिटी, 5 साल तक जेल का प्रावधान

भोपाल, जिसे झीलों का शहर कहा जाता है, गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना कर रहा है, जहाँ तालाबों, पहाड़ियों और हरित क्षेत्रों पर लगातार अतिक्रमण हो रहा है। इसके विपरीत, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे दक्षिणी राज्यों ने तालाब संरक्षण के लिए अलग प्राधिकरण स्थापित किए हैं और नियम तोड़ने वालों के लिए 5 साल तक की जेल का प्रावधान किया है। भोपाल में प्राकृतिक संपदा के संरक्षण की जिम्मेदारी विभिन्न एजेंसियों में बंटी हुई है, जिससे समन्वय की कमी और कार्रवाई में जिम्मेदारी तय न हो पाने की समस्या है।

इंदौर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम न होने पर 17 भवनों पर 6.75 लाख का जुर्माना

इंदौर नगर निगम ने जल संरक्षण के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम न लगाने वाले 17 भवनों पर 6.75 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। अभियान के तहत 35 हजार भवनों को नोटिस जारी किए गए हैं और प्रतिदिन 100 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही, लाइसेंस विभाग ने जवाहर मार्ग क्षेत्र में बिना वैध व्यापार लाइसेंस के चल रही दुकानों पर कार्रवाई की। इसमें 55 लाइसेंसों का नवीनीकरण कर 62,812 रुपये वसूले गए, जबकि चार दुकानों को सील किया गया। निगम नए व्यापार लाइसेंस के लिए विशेष शिविर भी आयोजित करेगा।