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जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने पर जोर: ‘पेयजल का सम्मान और संरक्षण’ अभियान

जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाना एक साझा सामाजिक दायित्व है, जो भविष्य में पेयजल संकट से बचने के लिए महत्वपूर्ण है। ‘पेयजल का सम्मान और संरक्षण’ अभियान 21 जुलाई से 4 अगस्त तक पूरे देश में चलाया गया, जो ‘जल संचय जनभागीदारी: कैच द रेन-2026’ से जुड़ा है। यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्षा जल संचयन के आह्वान पर आधारित है और इसका उद्देश्य जल संग्रह, भूजल पुनर्भरण और जल स्रोतों के संरक्षण को बढ़ावा देना है। भारत को जनसंख्या वृद्धि और जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती जल चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके लिए पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियों और आधुनिक तकनीकों के समन्वय की आवश्यकता है।

पेड़ नहीं, पानी लगाने का समय आ गया: डॉ. अनिल प्रकाश जोशी

पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने इंदौर में ‘क्यों रूठ जाती है प्रकृति’ विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि अब पेड़ नहीं, पानी लगाने का समय आ गया है। उन्होंने नदियों को पुनर्जीवित करने और वर्षा जल संचय की आवश्यकता पर जोर दिया। डॉ. जोशी ने बताया कि जल संकट अब देशभर की समस्या है और भारत का ट्रॉपिकल देश होना एक लाभ है। उन्होंने मानवीय हस्तक्षेप के कारण बदलते मौसम, कृषि के नकारात्मक प्रभाव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बजाय प्राकृतिक बुद्धिमत्ता पर काम करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने पहाड़ों पर पर्यटकों की संख्या नियंत्रित करने की भी बात कही।

जबलपुर में मौसमी प्रणालियां सक्रिय, बारिश 447 मिमी पिछड़ी

जबलपुर में लगभग एक सप्ताह बाद मौसमी प्रणालियां फिर सक्रिय हो गई हैं, जिसके परिणामस्वरूप मंगलवार को जिले में खंड-खंड बारिश हुई। हालांकि, इस मानसून सीजन में अब तक केवल 324.7 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो गत वर्ष की तुलना में 447 मिमी कम है और औसत से काफी पीछे है। बारिश की कमी और संभावित जल संकट के मद्देनजर, अखिल भारतीय गायत्री परिवार ट्रस्ट, जबलपुर छह और सात अगस्त को पर्याप्त वर्षा के लिए वरुण गायत्री जप एवं यज्ञ का आयोजन करेगा।

जबलपुर आईएमए हाउस में सीढ़ीदार झरना, गणेश विसर्जन के लिए भी होगा उपयोग

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) जबलपुर शाखा ने अपने भवन का जीर्णोद्धार कर एक सीढ़ीदार जल झरना बनाया है। यह झरना भवन की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ गणेश प्रतिमा विसर्जन के लिए भी उपयोग होगा, जिससे जल और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। लगभग आठ लाख रुपये की लागत से छह माह से कम समय में पहले चरण का जीर्णोद्धार पूरा हुआ। वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. पवन स्थापक ने इस पहल की सराहना की। भवन में वाटर हार्वेस्टिंग और सोलर सिस्टम लगाने की भी योजना है, जिससे इसे आधुनिक और पर्यावरण हितैषी पहचान मिली है।

मध्य प्रदेश के सभी 55 जिलों में जल स्रोतों के बनेंगे हेल्थ रिपोर्ट कार्ड

मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई 35 मौतों के बाद जल स्रोतों की निगरानी और संरक्षण के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य के सभी 55 जिलों के डिस्ट्रिक्ट एनवायरनमेंट प्लान में संशोधन किया गया है। इंदौर में वॉटर क्वालिटी मॉनिटरिंग सेल बनेगी, जो नदियों, नालों और तालाबों की निगरानी कर हेल्थ रिपोर्ट कार्ड बनाएगी। नौ प्रमुख बिंदुओं पर कार्ययोजना बनी है, जिसमें भूजल, सतही जल और दूषित पानी का उपचार शामिल है। यह योजना 12 से 24 महीनों में लागू होगी।

भोपाल में प्राकृतिक संपदा संरक्षण की जिम्मेदारी बंटी; तेलंगाना और कर्नाटक में अलग अथॉरिटी, 5 साल तक जेल का प्रावधान

भोपाल, जिसे झीलों का शहर कहा जाता है, गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना कर रहा है, जहाँ तालाबों, पहाड़ियों और हरित क्षेत्रों पर लगातार अतिक्रमण हो रहा है। इसके विपरीत, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे दक्षिणी राज्यों ने तालाब संरक्षण के लिए अलग प्राधिकरण स्थापित किए हैं और नियम तोड़ने वालों के लिए 5 साल तक की जेल का प्रावधान किया है। भोपाल में प्राकृतिक संपदा के संरक्षण की जिम्मेदारी विभिन्न एजेंसियों में बंटी हुई है, जिससे समन्वय की कमी और कार्रवाई में जिम्मेदारी तय न हो पाने की समस्या है।

इंदौर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम न होने पर 17 भवनों पर 6.75 लाख का जुर्माना

इंदौर नगर निगम ने जल संरक्षण के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम न लगाने वाले 17 भवनों पर 6.75 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। अभियान के तहत 35 हजार भवनों को नोटिस जारी किए गए हैं और प्रतिदिन 100 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही, लाइसेंस विभाग ने जवाहर मार्ग क्षेत्र में बिना वैध व्यापार लाइसेंस के चल रही दुकानों पर कार्रवाई की। इसमें 55 लाइसेंसों का नवीनीकरण कर 62,812 रुपये वसूले गए, जबकि चार दुकानों को सील किया गया। निगम नए व्यापार लाइसेंस के लिए विशेष शिविर भी आयोजित करेगा।