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2026-08-01

पद्मश्री कैलाशचंद्र पंत का 90 वर्ष की आयु में निधन

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

लेखक एवं समाजसेवी पद्मश्री कैलाशचंद्र पंत का शुक्रवार को निधन हो गया। उनका निधन 90 वर्ष की आयु में भोपाल में हुआ। उनके निधन पर साहित्य एवं कला जगत में शोक व्याप्त हो गया है। पद्मश्री व राष्ट्रीय शरद जोशी सम्मान से अलंकृत पंत ने अपने दीर्घ सार्वजनिक जीवन में निष्पक्ष पत्रकारिता, उत्कृष्ट लेखन व समाजसेवा के माध्यम से अमूल्य योगदान दिया, जो सदैव स्मरणीय रहेगा। उनका जन्म 26 अप्रैल 1936 को महू (इंदौर) में हुआ था। उन्होंने एमए साहित्याचार्य एवं साहित्य रत्न की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन लेखन, संपादन एवं सामाजिक कार्यों को समर्पित किया।

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साहित्यिक एवं पत्रकारिता में योगदान

कैलाशचंद्र पंत ने हिंदी पत्रकारिता एवं साहित्य को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी कृतियां ‘कौन किसका आदमी’, ‘धुंध के आर-पार’, ‘शब्द का विचार पक्ष’, ‘संस्कार, संस्कृति और समाज’, ‘संकल्प की प्रतीक्षा में’ विशेष रूप से चर्चित रही हैं। इन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा पर दो पुस्तकों का संपादन भी किया है, जिनमें ‘भारतीय ज्ञान परंपरा : समय, समस्या और समाज’ (प्रथम खंड) व ‘भारतीय ज्ञान परंपरा : अपनी अस्मिता तलाशने की आकांक्षा’ (द्वितीय खंड) शामिल हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में इनका सफर एक व्याख्याता के रूप में प्रारंभ हुआ, जिसके बाद उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में बतौर संपादक कार्य किया। वह साप्ताहिक जनधर्म के संपादक रहे, जिसका संपादन उन्होंने 1977 से 1998 तक किया। साथ ही, उन्होंने वर्ष 2006 से 2021 तक मासिक पत्रिका अक्षरा का संपादन भी किया।

संस्थागत जुड़ाव और श्रद्धांजलि

मध्य प्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति और हिंदी भवन न्यास को अनेक वर्षों से पद्मश्री कैलाशचंद्र पंत का सानिध्य प्राप्त होता रहा। उनके द्वारा लिखे गए आलेखों के अनेक संग्रह पुस्तक आकार में प्रकाशित होकर हिंदी भवन न्यास की धरोहर बन चुके हैं। अक्षरा के संपादक एवं मप्र राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के मंत्री संचालक डॉ. विकास दवे ने कहा कि दादा ने देश, समाज, भाषा और साहित्य को इतना कुछ दिया है कि उनके इस ऋण से हम सब कभी भी उऋण नहीं हो सकते। वरिष्ठ साहित्यकार एवं महासचिव लघुकथा शोध केंद्र समिति भोपाल घनश्याम मैथिल अमृत ने कहा कि पद्मश्री कैलाशचंद पंत की उपस्थिति में सकारात्मकता थी, अपनेपन का अहसास था।