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2026-10-17

सागा ग्रुप ठगी: समीर अग्रवाल के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस की प्रक्रिया, एमपी के 2 लाख निवेशकों के 492 करोड़ रुपये फंसे

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश में सागा ग्रुप द्वारा निवेश के नाम पर ठगे गए लोगों की संख्या दो लाख से ऊपर पहुंच गई है। इन पीड़ितों की कुल 492 करोड़ रुपये की राशि फंसी हुई है। पुलिस मुख्यालय की सीआईडी शाखा की जांच में यह जानकारी सामने आई है।

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जांच में पता चला है कि समूह के प्रबंध निदेशक समीर अग्रवाल ने अलग-अलग नाम से 10 कंपनियां बनाई थीं। इन कंपनियों के माध्यम से देशभर में कुल 30 लाख लोगों से ठगी की गई है। समीर अग्रवाल, कंपनी और अन्य आरोपितों के खिलाफ मध्य प्रदेश के अलावा दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड, बंगाल और असम सहित कई अन्य राज्यों में आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए हैं।

इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी कर रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने 13 से 16 अगस्त के बीच समूह से जुड़े स्थानों पर भोपाल और मुंबई में छापा मारा था। इस कार्रवाई के दौरान 30 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के शेयर, नकदी और ज्वेलरी जब्त की गई थी। पुलिस मुख्यालय का अनुमान है कि आगे की जांच में पीड़ितों की संख्या और फंसी हुई राशि में वृद्धि हो सकती है।

यह निवेश का खेल 2009 में सागा ग्रुप बनाकर शुरू हुआ था, जिसमें लोगों को तीन गुना तक रिटर्न का लालच दिया गया था। मध्य प्रदेश में भी दो लाख से अधिक लोगों ने इस योजना में निवेश किया था।

जब तय समय पर परिपक्व हुई राशि नहीं लौटाई गई, तो पीड़ितों ने प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराईं। अशोक नगर, टीकमगढ़, दमोह और विदिशा जिलों में स्थानीय पुलिस बल द्वारा कुल 11 एफआईआर दर्ज की गईं। संगठित अपराध का मामला होने के कारण पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने इसकी जांच सीआईडी को सौंप दी थी।

सीआईडी की अब तक की जांच से खुलासा हुआ है कि प्रदेश के 2 लाख 10 हजार लोगों से कंपनी ने निवेश के नाम पर 890 करोड़ रुपये जमा कराए थे। निर्धारित अवधि में परिपक्व होने पर उन्हें कुल 2067 करोड़ रुपये मिलने थे। कंपनी ने शुरू में कुछ रिटर्न दिए थे, लेकिन बाद में भुगतान बंद कर दिया। वर्तमान में प्रदेश के निवेशकों को कंपनी से 492 करोड़ रुपये मिलना बाकी है।

पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि कंपनी ने ‘लस्टीनेस जनहित क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी (एलजेसीसी)’ के माध्यम से मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में ठगी की है। इसी प्रकार, अलग-अलग कंपनियों के माध्यम से विभिन्न राज्यों में भी ठगी को अंजाम दिया गया।

जांच एजेंसियों को पता चला है कि समीर अग्रवाल देश छोड़कर जा चुका है। उसे वापस लाने के लिए मध्य प्रदेश पुलिस भी प्रयास करेगी। सभी कंपनियों और आरोपितों के विरुद्ध न्यायालय में चालान प्रस्तुत करने के बाद उसके विरुद्ध लुक आउट सर्कुलर और रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

मध्य प्रदेश पुलिस ने मुंबई निवासी समीर अग्रवाल के अतिरिक्त 16 अन्य आरोपितों को चिह्नित किया है। ये आरोपित ललितपुर, टीकमगढ़, मुंबई और झांसी के रहने वाले हैं। पुलिस का मानना है कि आरोपितों की संख्या और बढ़ सकती है।