बुलंद सोच, भोपाल।

ग्रामीणों को मकानों का मालिकाना हक देने के उद्देश्य से 17 सितंबर से शुरू हुई स्वामित्व योजना के तहत निःशुल्क रजिस्ट्री 72 घंटे बाद भी शुरू नहीं हो पाई है।
इस संबंध में पहले पटवारियों, फिर तहसीलदारों और अब नायब तहसीलदारों ने उप पंजीयक की शक्तियां लेने से इनकार कर दिया है।
प्रदेश के 55 जिलों में तीन दिनों में रजिस्ट्री का आंकड़ा शून्य से ऊपर नहीं उठ पाया है, जबकि सरकार ने एक महीने में लगभग 50 लाख निःशुल्क रजिस्ट्री करने का लक्ष्य निर्धारित किया था।
अधिकारियों के विरोध के बीच, शनिवार को आयुक्त भू-अभिलेख निधि निवेदिता ने अरेरा हिल्स स्थित अपने कार्यालय में पटवारी, तहसीलदार और नायब तहसीलदार संघ के प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई।
बैठक में आयुक्त ने प्रतिनिधियों से उनकी आपत्तियों और समस्याओं को लेकर प्रश्न किए।
पटवारियों की आपत्तियां
जवाब में पटवारी संघ ने कहा कि पटवारी को रजिस्ट्री का निष्पादक बनाने से भविष्य में कानूनी मामलों में फंसने का खतरा है। संघ ने मांग की कि पटवारी के नाम की जगह ‘मप्र शासन’ लिखा जाए।
पटवारी प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि निष्पादक का अर्थ विक्रेता का भी हो रहा है, जिसके कारण कोई भी पटवारी यह कार्य नहीं करना चाहता है। उन्होंने यह भी बताया कि पंजीयन विभाग के उप पंजीयक तकनीकी रूप से दक्ष हैं और वे साल भर में 15 लाख रजिस्ट्री करते हैं, ऐसे में एक महीने में 50 लाख रजिस्ट्री का दबाव कैसे संभाला जाएगा।
तहसीलदारों की आपत्तियां
तहसीलदार संघ ने अपनी आपत्ति जताते हुए कहा कि गलती होने पर सुधार और अपील का रास्ता स्पष्ट नहीं है, जिससे कानूनी मामले बढ़ सकते हैं।
संघ ने यह भी पूछा कि जब क्रेता और विक्रेता दोनों के नाम खसरे में पहले से दर्ज हैं, तो रजिस्ट्री कैसे होगी। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि अधिकार दिए जा रहे हैं, तो सरकार को हरियाणा की तरह ही देना चाहिए, जहां तहसीलदारों को उप पंजीयक बनाया गया है और वे रजिस्ट्री तथा नामांतरण दोनों कार्य करते हैं, न कि सिर्फ स्वामित्व योजना के लिए अधिकार दिए जाएं।
आयुक्त का जवाब
आयुक्त भू-अभिलेख निधि निवेदिता ने पटवारियों से कहा कि उनकी भूमिका केवल निष्पादक के तौर पर दस्तावेज प्रमाणीकरण तक ही सीमित है और इससे कोई कानूनी मामला नहीं होगा।
आयुक्त ने बताया कि पंजीयन विभाग के पास केवल 233 उप पंजीयक हैं, ऐसे में उनसे 50 लाख रजिस्ट्री का काम कराना मुश्किल है, इसलिए राज्य सरकार ने यह जिम्मेदारी अधिकारियों को दी है।
आयुक्त ने प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं को राज्य सरकार तक पहुंचाया जाएगा और इस पर दोबारा बातचीत की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से तब तक रजिस्ट्री का काम शुरू करने का आग्रह किया।

