भोपाल शहर और 731 गांवों के लाखों भू-स्वामियों को बड़ी राहत मिलने वाली है, क्योंकि वर्ष 1954 से अब तक के खसरे, खतौनी और नामांतरण के भू-अभिलेख अगले तीन महीनों में ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे लोगों को प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। जिला प्रशासन ने डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसमें स्कैनिंग, मेटाडेटा तैयार करना और पटवारी द्वारा ऑनलाइन सत्यापन शामिल है। सभी रिकॉर्ड भूलेख पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे।