मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पटवारियों की हड़ताल को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज कर दी है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने यह फैसला पटवारी संघ द्वारा हड़ताल वापस लेने की जानकारी दिए जाने के बाद सुनाया। यह याचिका नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के पी.जी. नाजपांडे और रजत भार्गव ने दायर की थी। याचिका में चार अगस्त से जारी पटवारियों की हड़ताल से राजस्व कार्यों और आम जनता को हो रही परेशानियों का उल्लेख किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने सरकारी कर्मचारियों के हड़ताल के अधिकार पर सवाल उठाते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की थी।
मध्य प्रदेश में चार अगस्त से चल रही पटवारियों की हड़ताल के खिलाफ मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव द्वारा दायर इस याचिका में हड़ताल से आम नागरिकों को हो रही परेशानी और राजस्व कार्यों के प्रभावित होने का हवाला दिया गया है। याचिका में तर्क दिया गया है कि शासकीय कर्मचारियों को जनसेवा से जुड़े दायित्वों के कारण हड़ताल का अधिकार नहीं है। अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय याचिकाकर्ताओं की पैरवी कर रहे हैं और इस पर जल्द सुनवाई की संभावना है।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने पटवारी भर्ती से जुड़े एक मामले में राज्य सरकार को राहत दी है। खंडपीठ ने सिंगल बेंच के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें एक अभ्यर्थी को पटवारी पद पर नियुक्ति देने के निर्देश थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल डिप्लोमा जारी होने से पात्रता सिद्ध नहीं होती, बल्कि संबंधित संस्थान और पाठ्यक्रम की नियमानुसार मान्यता भी साबित करनी होगी। राज्य सरकार ने शेर सिंह रावत की नियुक्ति के आदेश को चुनौती दी थी, क्योंकि उनका डिप्लोमा एक गैर-मान्यता प्राप्त डिस्टेंस एजुकेशन सेंटर से था।
मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) ने ग्रुप-2 उपसमूह-4 संयुक्त भर्ती परीक्षा-2026 का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भर्ती के माध्यम से राज्य के 61 विभागों में कुल 2,306 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी, जिसमें पटवारी के 200 पद भी शामिल हैं। उम्मीदवार 18 अगस्त 2026 तक esb.mp.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। परीक्षाएं 22 सितंबर 2026 से दो पालियों में आयोजित होंगी। स्नातक डिग्री और कंप्यूटर ज्ञान या CPCT स्कोर कार्ड अनिवार्य है।
मध्यप्रदेश में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव ई. रमेश कुमार ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि पटवारियों के विरुद्ध सीधी एफआईआर दर्ज न की जाए। एफआईआर से पहले पूरे मामले का प्रारंभिक परीक्षण अनिवार्य होगा। यह निर्णय पटवारी संघ के ज्ञापन और उनकी मांग पर लिया गया है, जिसमें वसीयत व अन्य राजस्व न्यायालयीन प्रकरणों में पटवारियों के प्रतिवेदन के आधार पर सीधे एफआईआर दर्ज होने की शिकायत की गई थी। हालांकि, इस आदेश के बावजूद 23 हजार पटवारी अपनी हड़ताल से वापस नहीं लौटे हैं, जो 3 अगस्त से जारी है।
मध्य प्रदेश में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव ई. रमेश कुमार ने कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि पटवारियों के विरुद्ध सीधे एफआईआर दर्ज न की जाए। किसी भी पटवारी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने से पहले पूरे मामले का प्रारंभिक परीक्षण किया जाना चाहिए। मप्र पटवारी संघ द्वारा 20 जुलाई को सौंपे गए ज्ञापन में पटवारियों पर सीधे एफआईआर दर्ज करने का मुद्दा उठाया गया था। सोमवार को पटवारियों के प्रतिनिधिमंडल की प्रमुख सचिव से मुलाकात के बाद सरकार ने प्रारंभिक जांच के बिना एफआईआर दर्ज न करने की इस प्रमुख मांग को स्वीकार कर लिया है।
भोपाल शहर और 731 गांवों के लाखों भू-स्वामियों को बड़ी राहत मिलने वाली है, क्योंकि वर्ष 1954 से अब तक के खसरे, खतौनी और नामांतरण के भू-अभिलेख अगले तीन महीनों में ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे लोगों को प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। जिला प्रशासन ने डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसमें स्कैनिंग, मेटाडेटा तैयार करना और पटवारी द्वारा ऑनलाइन सत्यापन शामिल है। सभी रिकॉर्ड भूलेख पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे।
इंदौर सहित पूरे प्रदेश के पटवारियों ने सोमवार से अपनी लंबित पांच सूत्री मांगों पर सरकार द्वारा निर्णय न होने के कारण अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। पटवारियों ने तहसीलों में बस्ते जमा कर राजस्व संबंधी कार्यों से खुद को अलग कर लिया है, जिससे राजस्व प्रकरणों के निपटारे पर असर पड़ेगा। जिला पटवारी संघ ने 8 जुलाई को मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा था और 15 जुलाई से 2 अगस्त तक विभिन्न चरणों में विरोध प्रदर्शन किए थे, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। पटवारियों की प्रमुख मांगों में कैडर रिव्यू, पदोन्नति, समयमान वेतनमान, नायब तहसीलदार की विभागीय परीक्षा और जज प्रोटेक्शन एक्ट में शामिल करना शामिल हैं।
लोकायुक्त पुलिस इंदौर की टीम ने झाबुआ जिले के ंगी उप-तहसील कार्यालय में हल्का पटवारी संजय अमलियार को 2,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। पटवारी ने फार्मर आईडी पर जमीन का सर्वे नंबर दर्ज कराने के एवज में यह राशि मांगी थी। आवेदक पुनिया भूरिया की शिकायत पर लोकायुक्त ने जांच के बाद 30 जुलाई 2026 को यह कार्रवाई की। आरोपित के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
इंदौर की राजेंद्र नगर पुलिस ने धोखाधड़ी के मामले में कॉलोनाइजर सुमित मंत्री से नौ घंटे पूछताछ की। सुमित, भरत पटवारी और नाना पटवारी के पार्टनर हैं। पूछताछ में सुमित ने डायरी पर सौदा करने और सबूत मिटाने की बात स्वीकार की। उसने बताया कि नाना पटवारी का नाम सामने आने के बाद उसने डायरियों को पानी में गलाकर नष्ट कर दिया। एक होटल में नाना के साथ बैठक में सुमित पटेल को झूठा बयान देने के लिए तैयार करने की साजिश रची गई थी। जोन-1 के डीसीपी नरेंद्र सिंह रावत के अनुसार, पुलिस अब भरत पटवारी और नाना पटवारी से दोबारा पूछताछ करेगी।