पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में एक आलीशान रिसॉर्ट के निर्माण में नियमों की अनदेखी और शासन को गुमराह करने का आरोप है। गुरुग्राम के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बी. श्रीनिवास कुमार पर होमस्टे की अनुमति की आड़ में प्रतिबंधित वनभूमि पर रिसॉर्ट बनाने का आरोप है। राजगढ़ गांव के खसरा नंबर 1841 की यह भूमि वन्यजीव गलियारे का हिस्सा बताई जा रही है, जिससे वन्यजीवों का जीवन संकट में पड़ गया है। वन विभाग ने निर्माण की कोई अनुमति नहीं दी थी। डिप्टी डायरेक्टर वीरेंद्र पटेल ने शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
टीकमगढ़ के अमर शहीद नारायणदास खरे की शहीद स्थली और मेला ग्राउंड की भूमि पर विवाद सामने आया है। राजस्व विभाग के सीमांकन में शहीद स्थल की बाउंड्रीवाल और सामुदायिक भवन का हिस्सा निजी भूमि पर अतिक्रमण पाया गया है। यह भूमि वर्तमान में दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के पुत्र अभिषेक यादव के नाम दर्ज है। कांग्रेस विधायक यादवेंद्र सिंह बुंदेला ने कथित फर्जी बेचनामे का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है और आंदोलन की चेतावनी दी है। तहसीलदार ने रिपोर्ट मिलने पर कार्रवाई की बात कही है, जबकि कलेक्टर यादव ने इसे अपनी पैतृक संपत्ति बताया है और सरकारी भूमि देने का सुझाव दिया है।
सतना वन परिक्षेत्र के जमोड़ी-खजुराहा वन क्षेत्र में वन विभाग ने एक प्रभावी अतिक्रमणरोधी अभियान चलाया। इस कार्रवाई में कक्ष क्रमांक RF782 में लगभग 8 हेक्टेयर वन क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराया गया और दो अवैध खाली झोपड़ियों को गिराया गया। यह अभियान वनमंडल अधिकारी सतना के निर्देशन और वन परिक्षेत्र अधिकारी सतना के नेतृत्व में नायब तहसीलदार तथा पुलिस बल की मौजूदगी में संपन्न हुआ। वन विभाग ने पशु अवरोधक खंती का निर्माण भी कराया और सागौन रोपण क्षेत्र की सुरक्षा के इंतजाम किए। विभाग ने स्पष्ट किया कि वन भूमि संरक्षण और अतिक्रमण नियंत्रण के अभियान जारी रहेंगे।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को नोटिस जारी कर वनकर्मियों को हथियार चलाने का अधिकार न दिए जाने का कारण पूछा है। कोर्ट ने वन अधिकारियों को मोबाइल डेटा और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) न मिलने पर भी जवाब मांगा। यह मुद्दा वन क्षेत्रों में शिकारियों, अतिक्रमणकारियों और शरारती तत्वों पर लगाम कसने से संबंधित है। हाई कोर्ट ने धार जिले में बाओबाब पेड़ों की अवैध कटाई पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य जैव विविधता बोर्ड से रिपोर्ट मांगी है। अगली सुनवाई 17 अगस्त को निर्धारित है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने जबलपुर की खराब यातायात व्यवस्था पर दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने शहर के सभी ट्रैफिक सिग्नलों के रखरखाव की जिम्मेदारी जबलपुर नगर निगम को सौंपी है। इसके लिए ट्रैफिक पुलिस और जबलपुर स्मार्ट सिटी निगम को प्रत्येक सिग्नल हेतु सालाना 1.50 लाख रुपए प्रदान करेंगे। कोर्ट ने यातायात में बाधा बनने वाले अतिक्रमण और अन्य अवरोधों को हटाने के भी निर्देश दिए। अगली सुनवाई सितंबर के पहले सप्ताह में होगी। यह याचिका नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ.
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बड़ा तालाब, कालियासोत और केरवा डैम में अतिक्रमण के मामले में प्रशासन की जवाबदेही तय की है। एनजीटी ने वेटलैंड, एफटीएल और प्रतिबंधित क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने की पूरी जिम्मेदारी संबंधित एसडीएम और तहसीलदार पर डाली है। कार्रवाई में देरी पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से जवाब देना होगा। एनजीटी ने सरकार द्वारा पेश की गई रिपोर्ट से असंतुष्ट होकर तीन सप्ताह के भीतर सभी अवैध निर्माणों की सूची और हटाए गए अतिक्रमण का विस्तृत ब्यौरा शपथपत्र के साथ पेश करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 31 अगस्त को है।
पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में एक कथित अवैध रिसॉर्ट पर बंदूकधारी निजी गार्डों की तैनाती सामने आई है। वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी बी. श्रीनिवास कुमार और उनकी पत्नी हिमानी सरद द्वारा निर्मित इस रिसॉर्ट को वन विभाग ने अवैध घोषित किया है, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। लगभग 15 दिन पहले रिसॉर्ट के पास ही चीतल का शिकार हुआ था, जिसने सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं ने कोर क्षेत्र में हथियारों की मौजूदगी पर चिंता व्यक्त की है। पन्ना टाइगर रिजर्व में 2009 में बाघविहीन होने के बाद अब 80 से अधिक बाघ हैं।
भोपाल, जिसे झीलों का शहर कहा जाता है, गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना कर रहा है, जहाँ तालाबों, पहाड़ियों और हरित क्षेत्रों पर लगातार अतिक्रमण हो रहा है। इसके विपरीत, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे दक्षिणी राज्यों ने तालाब संरक्षण के लिए अलग प्राधिकरण स्थापित किए हैं और नियम तोड़ने वालों के लिए 5 साल तक की जेल का प्रावधान किया है। भोपाल में प्राकृतिक संपदा के संरक्षण की जिम्मेदारी विभिन्न एजेंसियों में बंटी हुई है, जिससे समन्वय की कमी और कार्रवाई में जिम्मेदारी तय न हो पाने की समस्या है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने भोपाल के बड़ा तालाब में अतिक्रमण और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर सरकार व अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। एनजीटी ने छह वर्षों से मामले के लंबित होने और वेटलैंड क्षेत्र का सीमांकन न होने पर आपत्ति व्यक्त की है, जिससे अवैध निर्माणों को संरक्षण मिलने की आशंका है। न्यायाधिकरण ने इसे गंभीर विषय बताते हुए अधिकारियों से जवाब मांगा है। भोपाल नगर निगम ने अतिक्रमणों की मौजूदगी स्वीकार की है। एनजीटी ने नगर निगम और कलेक्टर को एफटीएल व बफर जोन के अतिक्रमणों को हटाने और अगली सुनवाई से पहले विस्तृत प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।