भोपाल में मंगलवार को दो महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई निर्धारित है। सुप्रीम कोर्ट में रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े 62,500 प्रतिष्ठानों के मामले में नगर निगम की कार्रवाई रिपोर्ट और रहवासियों की आपत्तियों पर सुनवाई होगी। नगर निगम ने 5 अगस्त के आदेश के बाद 8084 प्रतिष्ठानों को नोटिस दिए और 190 को बंद किया, लेकिन व्यापारियों के विरोध के बाद कार्रवाई रुक गई। वहीं, एनजीटी में बड़ा तालाब-कलियासोत डैम के एफटीएल क्षेत्र में पांच दिवसीय सर्वे की रिपोर्ट पेश होगी। सर्वे में एफटीएल के भीतर निर्माण और अतिक्रमण पाए गए हैं, जिन पर एनजीटी के निर्देश अपेक्षित हैं।
भोपाल के बड़े तालाब और कलियासोत डैम के किनारों पर अतिक्रमण की विस्तृत ड्रोन सर्वे रिपोर्ट मंगलवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के सामने पेश की जाएगी। पांच दिवसीय सर्वेक्षण में बैरसिया विधायक विष्णु खत्री के फार्म हाउस सहित कई नामी रेस्टोरेंट और अवैध निर्माण पाए गए हैं, जिससे रसूखदारों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। एनजीटी आज इस मामले में कड़ा आदेश जारी कर सकता है। यह सर्वे भदभदा डैम के गेट खुलने से हुए विवाद के बाद शुरू किया गया था। केरवा डैम का सर्वे जलस्तर कम होने के कारण फिलहाल रुका हुआ है।
जबलपुर हाई कोर्ट ने एमआर-फोर से लगी लक्ष्मीपुर बस्ती से 200-250 परिवारों को हटाने के मामले में अपना आदेश सुरक्षित कर लिया है। कोर्ट ने नगर निगम, जबलपुर विकास प्राधिकरण, केसरवानी शिक्षा समिति और बस्ती के रहवासियों का पक्ष सुना। हस्तक्षेपकर्ताओं ने बताया कि 1990 में लगभग आठ हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण हुआ था और 1998 में कई परिवारों को 28 वर्ष की पट्टेदारी दी गई थी। रहवासियों का तर्क है कि बिना सुनवाई, पुनर्वास और मुआवजे के उन्हें नहीं हटाया जा सकता।
राज्य सरकार ने जबलपुर की बिगड़ती ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार और मॉनिटरिंग के लिए हाईकोर्ट के समक्ष पांच विशेषज्ञों के नाम प्रस्तावित किए हैं, हालांकि इन्हें अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है। मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे व न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या जबलपुर की तर्ज पर प्रदेश के अन्य शहरों में भी ट्रैफिक सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की जा सकती है। याचिका में जबलपुर में ट्रैफिक सिग्नल, जाम और अतिक्रमण की गंभीर समस्या का उल्लेख है।
पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में एक आलीशान रिसॉर्ट के निर्माण में नियमों की अनदेखी और शासन को गुमराह करने का आरोप है। गुरुग्राम के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बी. श्रीनिवास कुमार पर होमस्टे की अनुमति की आड़ में प्रतिबंधित वनभूमि पर रिसॉर्ट बनाने का आरोप है। राजगढ़ गांव के खसरा नंबर 1841 की यह भूमि वन्यजीव गलियारे का हिस्सा बताई जा रही है, जिससे वन्यजीवों का जीवन संकट में पड़ गया है। वन विभाग ने निर्माण की कोई अनुमति नहीं दी थी। डिप्टी डायरेक्टर वीरेंद्र पटेल ने शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
टीकमगढ़ के अमर शहीद नारायणदास खरे की शहीद स्थली और मेला ग्राउंड की भूमि पर विवाद सामने आया है। राजस्व विभाग के सीमांकन में शहीद स्थल की बाउंड्रीवाल और सामुदायिक भवन का हिस्सा निजी भूमि पर अतिक्रमण पाया गया है। यह भूमि वर्तमान में दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के पुत्र अभिषेक यादव के नाम दर्ज है। कांग्रेस विधायक यादवेंद्र सिंह बुंदेला ने कथित फर्जी बेचनामे का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है और आंदोलन की चेतावनी दी है। तहसीलदार ने रिपोर्ट मिलने पर कार्रवाई की बात कही है, जबकि कलेक्टर यादव ने इसे अपनी पैतृक संपत्ति बताया है और सरकारी भूमि देने का सुझाव दिया है।
सतना वन परिक्षेत्र के जमोड़ी-खजुराहा वन क्षेत्र में वन विभाग ने एक प्रभावी अतिक्रमणरोधी अभियान चलाया। इस कार्रवाई में कक्ष क्रमांक RF782 में लगभग 8 हेक्टेयर वन क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराया गया और दो अवैध खाली झोपड़ियों को गिराया गया। यह अभियान वनमंडल अधिकारी सतना के निर्देशन और वन परिक्षेत्र अधिकारी सतना के नेतृत्व में नायब तहसीलदार तथा पुलिस बल की मौजूदगी में संपन्न हुआ। वन विभाग ने पशु अवरोधक खंती का निर्माण भी कराया और सागौन रोपण क्षेत्र की सुरक्षा के इंतजाम किए। विभाग ने स्पष्ट किया कि वन भूमि संरक्षण और अतिक्रमण नियंत्रण के अभियान जारी रहेंगे।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को नोटिस जारी कर वनकर्मियों को हथियार चलाने का अधिकार न दिए जाने का कारण पूछा है। कोर्ट ने वन अधिकारियों को मोबाइल डेटा और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) न मिलने पर भी जवाब मांगा। यह मुद्दा वन क्षेत्रों में शिकारियों, अतिक्रमणकारियों और शरारती तत्वों पर लगाम कसने से संबंधित है। हाई कोर्ट ने धार जिले में बाओबाब पेड़ों की अवैध कटाई पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य जैव विविधता बोर्ड से रिपोर्ट मांगी है। अगली सुनवाई 17 अगस्त को निर्धारित है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने जबलपुर की खराब यातायात व्यवस्था पर दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने शहर के सभी ट्रैफिक सिग्नलों के रखरखाव की जिम्मेदारी जबलपुर नगर निगम को सौंपी है। इसके लिए ट्रैफिक पुलिस और जबलपुर स्मार्ट सिटी निगम को प्रत्येक सिग्नल हेतु सालाना 1.50 लाख रुपए प्रदान करेंगे। कोर्ट ने यातायात में बाधा बनने वाले अतिक्रमण और अन्य अवरोधों को हटाने के भी निर्देश दिए। अगली सुनवाई सितंबर के पहले सप्ताह में होगी। यह याचिका नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ.
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बड़ा तालाब, कालियासोत और केरवा डैम में अतिक्रमण के मामले में प्रशासन की जवाबदेही तय की है। एनजीटी ने वेटलैंड, एफटीएल और प्रतिबंधित क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने की पूरी जिम्मेदारी संबंधित एसडीएम और तहसीलदार पर डाली है। कार्रवाई में देरी पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से जवाब देना होगा। एनजीटी ने सरकार द्वारा पेश की गई रिपोर्ट से असंतुष्ट होकर तीन सप्ताह के भीतर सभी अवैध निर्माणों की सूची और हटाए गए अतिक्रमण का विस्तृत ब्यौरा शपथपत्र के साथ पेश करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 31 अगस्त को है।