भोपाल में अतिथि विद्वानों का नियमितीकरण और नौकरी में स्थायित्व की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन 3 अक्टूबर तक स्थगित कर दिया गया है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार को समस्या समाधान के लिए समय दिया है। यदि 3 अक्टूबर तक ‘फॉलन आउट’ प्रक्रिया रोकने और नीति बनाने पर ठोस फैसला नहीं हुआ, तो 4 अक्टूबर से प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू होगा। अतिथि विद्वानों ने मंत्री इंदर सिंह परमार के सुझाव पर ‘विद्वान जनता पार्टी’ बनाकर चुनाव लड़ने पर भी विचार करने की बात कही है। उच्च शिक्षा आयुक्त से मांगों पर चर्चा हुई है।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एमपीपीएससी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया से जुड़े वर्षों पुराने विवादों पर फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की पीठ ने विभिन्न वर्षों की चयन प्रक्रियाओं के सभी अंतिम परिणामों को अदालत में तलब किया है। कोर्ट ने एमपीपीएससी को रजिस्ट्रार विकास शर्मा के समक्ष इन परिणामों को तुरंत प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए, हाईकोर्ट ने याचिकाओं को पांच श्रेणियों में बांटकर सुनवाई की रणनीति बनाई है, जिसमें जनभागीदारी अतिथि विद्वानों के विवाद और शैक्षणिक योग्यता से संबंधित मामले शामिल हैं।