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लोक शिक्षण आयुक्त ने शिक्षकों को नदी-नाले पार न करने तथा 10:30 बजे तक ई-अटेंडेंस लगाने के निर्देश दिए

लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने शिक्षकों को उफनते नदी-नाले पार न करने और सुबह 10:30 बजे तक ई-अटेंडेंस लगाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि लापरवाही पर वेतन काटा जा सकता है और शिक्षकों को समय पर स्कूल में उपस्थित होकर पठन-पाठन में शामिल होना चाहिए। शासकीय शिक्षक संगठन ने ग्रामीण शिक्षकों के लिए आवास, सुरक्षित आवागमन और विशेष ग्रामीण भत्ता जैसी सुविधाओं की मांग की है। आयुक्त ने ऐप में अवकाश विकल्प न होने जैसी तकनीकी दिक्कतों के समाधान के लिए शिक्षक संघ से टीम बनाने को कहा है।

बीडीए परियोजनाओं और संपत्ति विक्रय में तेजी लाने के निर्देश

भोपाल विकास प्राधिकरण (बीडीए) के अध्यक्ष कर्मवीर शर्मा ने विकास परियोजनाओं और संपत्ति विक्रय में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने 15 अगस्त से पहले एक विशेष आवासीय मेला आयोजित करने और विक्रय योग्य संपत्तियों के प्रभावी प्रचार-प्रसार पर जोर दिया। बड़े भूखंडों को छोटे प्लॉट्स में विभाजित करने की योजना भी तैयार की जा रही है ताकि मध्यम वर्ग के खरीदार आसानी से संपत्ति खरीद सकें। एआईसीटी योजना को शिक्षा और ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित करने तथा लंबित न्यायालयीन मामलों के शीघ्र निराकरण के भी निर्देश दिए गए हैं।

मध्य प्रदेश के अतिथि शिक्षकों को 10 आकस्मिक अवकाश

मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों में कार्यरत लगभग 70 हजार अतिथि शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। नए नियमों के अनुसार, अब इन शिक्षकों को नियमित शिक्षकों की भांति एक शिक्षा सत्र में कुल 10 आकस्मिक अवकाश (सीएल) मिलेंगे। पहले अतिथि शिक्षकों को कोई वैधानिक आकस्मिक अवकाश सुविधा नहीं मिलती थी, जिससे उन्हें अवकाश लेने पर मानदेय कटौती या अनुपस्थिति का सामना करना पड़ता था। यह निर्णय शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करेगा और उन्हें कार्य के दौरान मानसिक व सामाजिक जरूरतों के लिए वैधानिक अवकाश का लाभ प्रदान करेगा।

अतिथि शिक्षकों को 10 दिन का आकस्मिक अवकाश, 90% ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता समाप्त

मध्य प्रदेश के अतिथि शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री ने सत्र में 10 दिन के आकस्मिक अवकाश की घोषणा की है, जिसके आदेश लोक शिक्षण संचालनालय जल्द जारी करेगा। इसके अतिरिक्त, लोक शिक्षण विभाग ने 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है। पहले, कम अटेंडेंस वाले अतिथि शिक्षक दोबारा रिजॉइन नहीं कर पाते थे, जिससे करीब 10 प्रतिशत शिक्षक प्रभावित थे। अब वे सीधे अपने पदों पर रिजॉइन कर सकेंगे, जिससे उन्हें शपथ पत्र की जटिल प्रक्रिया से मुक्ति मिल गई है।