खरगोन में 2022 की रामनवमी पर हुए सांप्रदायिक तनाव से जुड़े एक मामले में चतुर्थ अपर सत्र न्यायालय ने 11 आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया है। न्यायाधीश मुकेश नाथ ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। गवाहों के बयानों में विरोधाभास, आरोपितों की पहचान न हो पाना और एफएसएल रिपोर्ट में दावों की पुष्टि न होने के कारण सभी को संदेह का लाभ दिया गया। 10 अप्रैल 2022 को हुई इस घटना में बलवा, पथराव और आगजनी के आरोप थे।
नरसिंहपुर में विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार लढ़िया की अदालत ने एक दलित अधेड़ सुखलाल मेहरा की हत्या और जातिगत अत्याचार के मामले में त्वरित न्याय सुनाया है। अदालत ने एक ही परिवार के पांच आरोपितों – कमलेश प्रजापति, अन्नीलाल प्रजापति, अखिलेश प्रजापति, छोटू उर्फ उमेश और सविता बाई को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई। यह घटना 14 मार्च 2025 को गोटेगांव के ग्राम उमरिया में भूसा छोड़ने के मामूली विवाद और जातिगत विद्वेष के कारण हुई थी। आरोपितों ने सुखलाल को लाठी और लात-घूसों से बेरहमी से पीटा था, जिससे उनकी मौत हो गई।
सागर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायालय ने ईपीएफओ के तत्कालीन क्षेत्रीय आयुक्त सतीश कुमार को रिश्वतखोरी का दोषी ठहराया है। न्यायालय ने उन्हें गिरफ्तार कर पेश करने के लिए वारंट जारी किया है और सजा पर फैसला 30 जुलाई को सुनाया जाएगा। यह मामला जून 2022 का है जब ईओडब्ल्यू सागर ने सतीश कुमार को एक बीड़ी निर्माता फर्म से कथित अनियमितताओं को दबाने के लिए 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। कुल 10 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की गई थी।
लक्षद्वीप की एक अदालत ने नाबालिग लड़के से यौन अपराध के दोषी 37 वर्षीय व्यक्ति को पॉक्सो और आईपीसी के तहत कुल 40 साल कारावास की सजा सुनाई है। दोषी को 20 साल की वास्तविक कैद काटनी होगी और उस पर 1.20 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने रिश्ते के भरोसे के दुरुपयोग और बार-बार अपराध के कारण सजा में नरमी से इनकार किया। कोर्ट ने बच्चों के खिलाफ अपराधों पर चिंता जताई और पीड़ित को जुर्माने में से 1 लाख रुपये तथा पीड़ित मुआवजा योजना के तहत 2 लाख रुपये अतिरिक्त देने की सिफारिश की।