ग्वालियर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अपने अधिकारों के प्रति दशकों तक उदासीन रहने वाले व्यक्ति को राहत देने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के की पीठ ने भोलाराम किरार की याचिका खारिज करते हुए कहा कि पुराने विवादों को दोबारा खोलने से न्यायिक निर्णयों की अंतिमता प्रभावित होगी। याचिकाकर्ता ने वर्ष 1999 के एक आदेश को 23 साल बाद चुनौती दी थी, और फिर हाईकोर्ट आने में भी तीन साल की देरी की। कोर्ट ने अनुच्छेद-226 के तहत राहत मांगने के लिए समयबद्धता और सतर्कता को आवश्यक बताया।
सुप्रीम कोर्ट ने नीट पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित पुलिस ज्यादती पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और केवल प्रदर्शन होने भर से पुलिस लाठीचार्ज को सही नहीं ठहराया जा सकता। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी दोनों का जीवन महत्वपूर्ण है और पूरे देश में प्रदर्शन के लिए एक समान प्रोटोकॉल होना चाहिए। कोर्ट ने सभी संबंधित याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई करने का फैसला किया है।