केंद्र सरकार ने अधिवक्ता अमित लाहोटी को हाई कोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया है। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग ने सात अगस्त, 2026 को इस संबंध में अधिसूचना जारी की। राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 224 की धारा (एक) के तहत अमित लाहोटी को दो वर्ष की अवधि के लिए नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति पद का कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से प्रभावी होगी। इस नियुक्ति से हाई कोर्ट में न्यायिक कार्यक्षमता बढ़ने और लंबित प्रकरणों के निराकरण में मदद मिलने की उम्मीद है।
मनीष मिश्रा जबलपुर जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पद पर पुनः निर्वाचित हुए हैं। उन्होंने कड़े मुकाबले और उत्साहपूर्ण माहौल के बीच हुए चुनाव में जीत हासिल की, जिसमें अधिवक्ताओं ने उन पर दोबारा भरोसा जताया। परिणामों की घोषणा के बाद जिला अदालत परिसर में वकीलों ने आतिशबाजी और ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया, जबकि समर्थकों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने उन्हें बधाई दी। मनीष मिश्रा ने बार और बेंच के बीच बेहतर समन्वय तथा अधिवक्ताओं की समस्याओं के त्वरित समाधान को अपना मुख्य लक्ष्य बताया है।
जबलपुर हाई कोर्ट ने महाधिवक्ता कार्यालय में 157 सरकारी वकीलों की नियुक्तियों को चुनौती देने वाली याचिका पर कड़ा रुख अपनाया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने महाधिवक्ता से पूरी चयन प्रक्रिया का रिकॉर्ड तलब किया है। कोर्ट ने चयन मानदंड और उम्मीदवारों के चयन के आधार पूछे हैं। मप्र हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सह सचिव योगेश सोनी ने आरोप लगाया है कि 2013 की राजपत्र अधिसूचना में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को होगी।
अधिवक्ता शीराज कुरैशी की पुस्तक ‘इन सपोर्ट ऑफ यूसीसी-एमपी’ समान नागरिक संहिता विधेयक के विधानसभा में पेश होने के बाद चर्चा में है। कुरैशी का दावा है कि यह पुस्तक संविधान की मूल भावना और अनुच्छेद 44 के आलोक में यूसीसी की आवश्यकता और कानूनी पहलुओं को स्पष्ट करती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े संगठनों के पदाधिकारी कुरैशी ने 2006 से इस विषय पर अध्ययन किया है। पुस्तक में मुस्लिम समाज में यूसीसी को लेकर प्रचलित भ्रांतियों पर चर्चा की गई है, और यह न्याय तथा समानता की अवधारणा को मजबूत करती है। इसका अंग्रेजी संस्करण प्रकाशित हो चुका है।
जबलपुर जिला अधिवक्ता संघ चुनाव अव्यवस्था, बैलेट पेपर में गड़बड़ी और मतदान में देरी को लेकर अधिवक्ताओं के हंगामे के कारण निरस्त कर दिया गया। विरोध प्रदर्शन के बाद चुनाव अधिकारी जी.एस. ठाकुर ने मतदान प्रक्रिया रद्द कर दी और स्वयं को अपने पद से मुक्त कर लिया। इस संबंध में राज्य अधिवक्ता परिषद को सूचित कर दिया गया है। यह घटना चुनाव के दौरान प्रत्याशी और अधिवक्ताओं के बीच हुए व्यापक विरोध का परिणाम है।