डिंडौरी के मेहंदवानी जनपद क्षेत्र में सात करोड़ दस लाख रुपये की लागत से बनी प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की एक पुलिया बारिश में बह गई, जिससे आवागमन बाधित हो गया और किसानों की फसलें चौपट हो गईं। ग्रामीणों ने निर्माण में मनमानी का आरोप लगाया है, जबकि विभागीय अधिकारी इसे अतिवृष्टि का परिणाम बता रहे हैं। इस घटना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और ठेकेदार तथा संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रीवा में ऐतिहासिक कोल गढ़ी के जीर्णोद्धार कार्य में कथित भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। करोड़ों रुपये की लागत से बन रही गढ़ी की बाउंड्री वॉल पहली ही बरसात में ढह गई। भाजपा के पूर्व विधायक श्याम लाल द्विवेदी ने एक माह पूर्व निर्माण में अनियमितता और घटिया सामग्री के उपयोग पर चेतावनी दी थी, जिसकी अनदेखी की गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाया है। स्थानीय लोगों में आक्रोश है, जबकि प्रशासन की ओर से अब तक कोई जांच या कार्रवाई नहीं हुई है। पूर्व विधायक ने पूरे कार्य की थर्ड पार्टी जांच की मांग की है।
मुरैना में जिला शिक्षा अधिकारी बीएस इंदौलिया के औचक निरीक्षण के दौरान पहाड़गढ़ ब्लॉक के पोखर का पुरा प्राइमरी स्कूल में हेडमास्टर अमरलाल रावत ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए। बच्चों को ₹4500 मासिक मेहनताने पर रखी प्रीति रावत नामक युवती पढ़ा रही थी। हेडमास्टर ₹65,000 मासिक वेतन ले रहा था। कलेक्टर के निर्देश पर हेडमास्टर को निलंबित कर दिया गया है। दो जनशिक्षकों को भी तलब किया गया है। अन्य स्कूलों में भी कम छात्र उपस्थिति और आवश्यक दस्तावेजों की कमी पाई गई, जिस पर संस्था प्रभारियों की वेतनवृद्धि रोकने की कार्रवाई की जा रही है।
मध्य प्रदेश के गवर्नमेंट प्रेस में रद्दी बिक्री में अनियमितताओं के मामले में दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। पांच अन्य अधिकारी-कर्मचारी भी जांच के दायरे में हैं। डिप्टी कंट्रोलर लॉरेंस रॉबर्टसन को सात दिन में जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। यह कार्रवाई 22 जुलाई को भास्कर ऐप के खुलासे के बाद हुई, जिसमें ट्रकों के वजन और धर्मकांटों की रसीदों में गड़बड़ी सामने आई थी। रद्दी उठाने वाली कंपनी मां ट्रेडर्स को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और संतोषजनक जवाब न मिलने पर एग्रीमेंट खत्म करने की चेतावनी दी गई है।
नेशनल एजुकेशन यूथ यूनियन (नेयू) के पदाधिकारियों ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) और मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (एमपीईएसबी) में अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उन्होंने वर्ष 2019 से भर्ती परीक्षाओं के परिणामों में 87-13 प्रतिशत के फॉर्मूले को समाप्त करने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे। नेयू ने 13 प्रतिशत होल्ड सूची के अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने, साक्षात्कार के अंक अधिकतम 100 निर्धारित करने और प्रारंभिक परीक्षा शुल्क समाप्त करने की भी मांग की। संगठन ने पुलिस पर उनके परिवार के सदस्यों को परेशान करने का आरोप भी लगाया।
कैग की रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल की पूर्व सरकार की चक्रवात अम्फान राहत योजना में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में नुकसान के आकलन को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने, राहत वितरण में गड़बड़ियों और लाभार्थियों की सूची में दोहराव जैसी खामियां सामने आईं। प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल मनीष कुमार ने बताया कि कैग ने राज्य सरकार को छह प्रमुख सिफारिशें दी हैं। कैग ऑडिट टीम ने राज्य सरकार के दावों का सत्यापन करने के लिए मौके पर जांच करने और कार्रवाई रिपोर्ट का सत्यापन करने की बात कही है।
मध्यप्रदेश सहकारिता विभाग की विभागीय पदोन्नति परीक्षा में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। कर्मचारी संघर्ष मोर्चा ने प्रमुख सचिव को शिकायत करते हुए प्रश्नपत्र लीक होने, गोपनीय प्रक्रिया में गड़बड़ी और नियम विरुद्ध पदोन्नति दिलाने का आरोप लगाया है। मोर्चा ने स्वतंत्र जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। आरोपों के अनुसार, 100 से अधिक बाबुओं को सहकारिता निरीक्षक पद पर पदोन्नत किया गया, जिसका प्रश्नपत्र आठवीं से दसवीं कक्षा के स्तर का था और परीक्षा से पहले ही परीक्षार्थियों तक पहुँच गया था, जिससे अधिकांश ने 99 अंक प्राप्त किए।
मध्य प्रदेश में कामकाजी महिलाओं के लिए बने 59 छात्रावासों की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 22 छात्रावासों का उपयोग महिलाओं के बजाय स्कूल, प्रशिक्षण केंद्र और सरकारी कार्यालयों जैसे अन्य कार्यों के लिए किया जा रहा था। 31 मार्च 2024 तक केवल 13 छात्रावास ही पूरी तरह या आंशिक रूप से संचालित पाए गए, जबकि चार बंद थे और 12 जर्जर स्थिति में थे। 11 स्वीकृत डे-केयर सेंटरों में से एक भी चालू नहीं मिला। महिला एवं बाल विकास विभाग ने 2019-2024 के दौरान वास्तविक आवश्यकता का कोई सर्वेक्षण नहीं किया।