मध्य प्रदेश में साइबर ठगी के मामलों में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है, जहाँ एक वर्ष में 600 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी दर्ज की गई है। इन अपराधों की जांच के लिए साइबर पुलिस के पास केवल 300 कर्मी हैं, जिनमें आईटी एक्ट के तहत विवेचना के लिए केवल 19 निरीक्षक अधिकृत हैं। आरोपितों का अंतरराज्यीय नेटवर्क और पहचान छिपाने की प्रवृत्ति जांच को जटिल बनाती है। संसाधनों की कमी और अलग कैडर न होने के कारण जांच में देरी होती है, जबकि पिछले चार वर्षों में ठगी की राशि में 1100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।
जीआरपी भोपाल ने “ऑपरेशन हमदर्द” के तहत 11 दिन में एक माह की लावारिस बच्ची के माता-पिता को खोज निकाला है। बच्ची 10 जुलाई को भोपाल रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म-6 पर मिली थी। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी जांच और सोशल मीडिया की मदद से परिवार का पता लगाया। दंपती ने आर्थिक तंगी के कारण बच्ची को स्टेशन पर छोड़ा था। वे पुणे में मजदूरी करते हैं और बिहार के निवासी हैं। समाचार देखकर उन्हें पछतावा हुआ और वे बच्ची का हाल जानने भोपाल पहुंचे, जहां जीआरपी ने उन्हें पहचान लिया। माता-पिता के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई शुरू की गई है, और बच्ची के भविष्य का निर्णय बाल कल्याण समिति करेगी।