मध्य प्रदेश में केंद्र सरकार की ‘अपार ID’ योजना धीमी गति से चल रही है, जिसके कारण लगभग 37 लाख (30%) छात्र अभी भी डिजिटल पहचान से वंचित हैं। प्रदेश के कुल 1.40 करोड़ छात्रों में से केवल 1.03 करोड़ का ही पंजीकरण हो पाया है। भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहर इस अभियान में पिछड़ गए, जबकि डिंडौरी, मंडला और उज्जैन जैसे छोटे जिलों ने बेहतर प्रदर्शन किया। आधार संबंधी विसंगतियां, नाम की अशुद्धियां और अभिभावकों की सहमति न मिलना पंजीकरण में मुख्य बाधाएं हैं। यह आईडी शैक्षिक रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखती है और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं में सहायक है।