इंदौर में इस वर्ष सावन में छिटपुट वर्षा ही देखने को मिल रही है, और आगामी सप्ताह में भी केवल रुक-रुककर बूंदाबांदी का ही अनुमान है। भोपाल स्थित मौसम केंद्र के विज्ञानी एचएस पांडे के अनुसार, मानसून का कोई प्रभावी सिस्टम सक्रिय न होने के कारण वर्षा की गति धीमी है। बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र और मानसून द्रोणिका के ऊपरी हिस्से में होने से मध्य प्रदेश में वर्षा गतिविधियां कम हैं। आगामी दिनों में बनने वाला नया सिस्टम भी केवल उत्तरी और उत्तर-पूर्वी संभागों को प्रभावित करेगा। अलनीनो के प्रभाव से इस वर्ष कम वर्षा का अनुमान सही साबित हो रहा है।