इंदौर में शासकीय आवासों पर अवैध कब्जे को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। अपात्र होने के बावजूद आवास खाली न करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों से अब बाजार दर पर किराया वसूला जाएगा। संभागायुक्त भास्कर लक्षकार ने जिले में शासकीय आवासों की स्थिति की समीक्षा की और एसडीओ रितेश सिसोदिया तथा राम कुमार सविता को अपात्र व्यक्तियों से आवास खाली कराने के निर्देश दिए हैं। जिन अधिकारियों ने आवास आवंटित होने के बाद भी उन्हें ताला लगाकर रखा है, उन पर भी कार्रवाई की जाएगी। दोनों एसडीओ ने प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे नए अधिकारियों को आवास उपलब्ध हो सकें।
टीकमगढ़ में कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए सेवानिवृत्त अपर कलेक्टर के रीडर शंकर प्रसाद श्रीवास्तव, उनकी पत्नी, मां और पुत्र के नाम दर्ज 3.5 एकड़ से अधिक सरकारी भूमि का नामांतरण निरस्त कर दिया है। जांच में पाया गया कि श्रीवास्तव ने अपने पद और प्रशासनिक प्रभाव का दुरुपयोग कर फर्जी दस्तावेजों तथा नियमों की अनदेखी करते हुए इन जमीनों को अपने और परिवार के सदस्यों के नाम करा लिया था। इनमें ग्राम उत्तरी कर्री और मोगनगढ़ की भूमि शामिल है। प्रशासन ने सभी विवादित आदेश रद्द कर जमीनों को पुनः सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करने का निर्देश दिया है।
कर्नाटक सरकार ने ‘द आर्ट ऑफ लिविंग’ संस्था के खिलाफ सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के आरोपों की जांच के लिए एसआईटी गठित की है। यह मामला बेंगलुरु के कागलीपुरा गांव से संबंधित है, जहां 290 एकड़ से अधिक गोमाला भूमि पर कब्जे का आरोप है। संस्था को 1985 में लीज पर मिली 41 एकड़ जमीन की अवधि 2015 में समाप्त हो चुकी है, फिर भी कब्जा बरकरार है। आर्ट ऑफ लिविंग ने आरोपों को बेबुनियाद बताया है और जांच का स्वागत किया है।