अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल को अब स्थायी नेतृत्व मिलने जा रहा है। केंद्र सरकार की कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) नरेंद्र कोटवाल को एम्स भोपाल का एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। उनकी नियुक्ति अनुबंध के आधार पर तीन साल के लिए की गई है या 70 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो। कोटवाल के पास सैन्य चिकित्सा प्रशासन का व्यापक अनुभव है, और उनकी नियुक्ति से एम्स भोपाल की प्रशासनिक व्यवस्था और चिकित्सा सेवाओं को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
सतना जिला अस्पताल की मॉर्चुरी में शुक्रवार को स्कूल की दो छात्राओं की मौजूदगी में एक पोस्टमॉर्टम किया गया। छात्राएं लगभग पौने दो घंटे तक मॉर्चुरी के भीतर रहीं, जहां मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर प्रतीक शुक्ला सहित चार अन्य लोग उपस्थित थे। इस घटना ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि मॉर्चुरी एक प्रतिबंधित क्षेत्र है और नाबालिगों की उपस्थिति नियमों के विपरीत है। विभिन्न अधिकारियों ने इस मामले को अनुचित करार दिया है और जांच की बात कही है।
भोपाल के कमला नेहरू अस्पताल के पीडियाट्रिक सर्जरी वार्ड में गंभीर अव्यवस्थाएं उजागर हुई हैं। वार्ड में छह बेड एक छोटे कमरे में ठूंसकर लगे हैं, एसी बंद है और खिड़कियां टूटी हुई हैं। एक मासूम बच्ची बेड में दौड़ रहे करंट की चपेट में आने से बाल-बाल बची। परिजनों ने बताया कि बच्चे के ऑपरेशन के टांके खुलने और गर्मी से बच्चे के तड़पने जैसी घटनाएं भी हुईं। गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. कविता एन. सिंह और हमीदिया अस्पताल के सह-अधीक्षक डॉ. विजय वर्मा ने समस्याओं को स्वीकार करते हुए सुधार का आश्वासन दिया है।