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पन्ना में प्लास्टिक कचरे से ग्रामीण महिलाओं को मिला रोजगार, बन रहे उपयोगी उत्पाद

पन्ना राष्ट्रीय उद्यान के आसपास के गांवों में प्लास्टिक कचरा अब ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार का स्रोत बन गया है। मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा 2022 में शुरू किए गए ‘प्रोजेक्ट क्लीन डेस्टिनेशंस’ के तहत 14 ग्राम पंचायतों के 30 गांवों से 45 टन से अधिक प्लास्टिक एकत्र कर उसे उपयोगी उत्पादों जैसे बैग और स्मृति चिन्ह में बदला गया है। यह पहल महिलाओं को प्रशिक्षण, आय और आर्थिक आत्मनिर्भरता प्रदान कर रही है, साथ ही पारंपरिक कारीगरी को पर्यावरणीय उद्देश्य से जोड़ रही है। 2025 में बांधवगढ़ तक विस्तारित इस मॉडल को SKOCH सिल्वर अवार्ड भी मिला है, जो संरक्षण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को जोड़ता है।

पेनकिलर के सेवन से जितेंद्र कुमार की दोनों किडनी खराब, चार साल से डायलिसिस पर

इंदौर के 37 वर्षीय जितेंद्र कुमार की दोनों किडनी पेनकिलर के सेवन से खराब हो गईं, जिसके बाद वे पिछले चार साल से डायलिसिस पर हैं। शारीरिक कमजोरी के कारण नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने स्वयं का व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया। रेडक्रॉस से ₹20,000 की सहायता से उन्होंने फल का ठेला खरीदा, लेकिन बीमारी के चलते डेढ़ महीने अस्पताल में रहे। बाद में महाकाल संस्था के जय्यु जोशी और करीम खान ने ₹10,000 की मदद की, जिससे जितेंद्र ने फिर से फल का ठेला लगाना शुरू किया। वे परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।

प्रदेश में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बनेंगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार

प्रदेश सरकार स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की महिलाओं को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार बनाने की दिशा में अग्रसर है। झाबुआ के थांदला में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ₹300 करोड़ के ऋण वितरण कार्यक्रम में यह संकेत दिया। सरकार का लक्ष्य महिलाओं को केवल हितग्राही नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था की संचालक के रूप में स्थापित करना है। अगले वर्ष से सरकारी स्कूलों की यूनिफॉर्म एसएचजी की महिलाएं तैयार करेंगी, जिससे उन्हें स्थायी आय मिलेगी।

मध्यप्रदेश में ग्रामीण पर्यटन से ग्रामीणों ने कमाए 6.76 करोड़ रुपये

मध्यप्रदेश में ग्रामीण पर्यटन ग्रामीणों की आजीविका का एक प्रमुख स्रोत बन गया है। चालू वित्तीय वर्ष में 98 गांवों में होम-स्टे संचालकों ने 6.76 करोड़ रुपये कमाए हैं, जहां 34 हजार पर्यटक रुक चुके हैं। पारंपरिक खान-पान, स्थानीय लोक-नृत्य और बैलगाड़ी की सैर जैसे अनुभव पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। सरकार 1,000 नए होम-स्टे विकसित करने और 100 गांवों को जोड़ने की योजना पर काम कर रही है। गणेश उइके का ‘ताप्ती विहार होम-स्टे’ और चिमटीपुर का ‘आंकला होम-स्टे’ सफलता के उदाहरण हैं। ऑनलाइन बुकिंग और सौर ऊर्जा कवरेज पर भी कार्य जारी है।