मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण मामले में हाई कोर्ट की विशेष युगलपीठ के समक्ष आठवें दिन सुनवाई हुई। ओबीसी पक्ष ने तर्क दिया कि संविधान में आरक्षण का आधार जनसंख्या और प्रतिनिधित्व है, न कि क्वांटिफायबल डेटा। अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह ने कहा कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू होने से कुल आरक्षण 60% तक पहुंच गया है, ऐसे में केवल ओबीसी के 27% आरक्षण को असंवैधानिक बताना अनुचित है। उन्होंने अनुच्छेद 15(4), 16(4) और विभिन्न आयोगों का हवाला देते हुए आरक्षण की अधिकतम सीमा निर्धारित न होने की बात कही। मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी।