BREAKING NEWS

Latest News

इंदौर में गणेश उत्सव की तैयारियों पर बैठक, राजबाड़ा से निगम प्रांगण तक जुलूस निकालने का निर्णय

इंदौर में गणेश उत्सव की तैयारियों को लेकर बुधवार को नगर निगम महापौर के सभाकक्ष में सामान्य प्रशासन विभाग और श्री गणेश उत्सव समिति की बैठक हुई। समिति प्रभारी नंदकिशोर पहाड़िया की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में गणेश स्थापना से लेकर अनंत चतुर्दशी के चल समारोह तक की व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। समिति ने राजबाड़ा से निगम प्रांगण तक गणेश प्रतिमा के साथ जुलूस निकालने का निर्णय लिया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों और नगर निगम कर्मचारियों के मेधावी बच्चों के सम्मान समारोह पर भी विचार किया गया।

धमतरी के प्राचीन रुद्रेश्वर महादेव मंदिर में पहली बार वाराणसी की तर्ज पर महानदी आरती

धमतरी के महानदी तट स्थित प्राचीन रुद्रेश्वर महादेव मंदिर में सावन के दौरान हजारों श्रद्धालु दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंच रहे हैं। इस वर्ष पहली बार वाराणसी की तर्ज पर महानदी आरती का आयोजन किया जा रहा है। युवा ब्रिगेड की पहल पर यह आरती सावन के प्रत्येक सोमवार की शाम रुद्रेश्वर महादेव मंदिर के घाट पर आयोजित हो रही है। राम वनगमन परंपरा से जुड़ा यह स्वयंभू शिवधाम छत्तीसगढ़ के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है, जहां भगवान श्रीराम ने वनवास काल में आराधना की थी। इसकी महिमा का उल्लेख शिवपुराण और स्कंद पुराण में भी मिलता है।

रामघाट पर शिप्रा आरती को लेकर विवाद, महाकाल समिति के बटुकों ने संभाली जिम्मेदारी

उज्जैन के रामघाट पर शिप्रा आरती को लेकर विवाद हो गया है, जहाँ महाकाल मंदिर समिति ने आरती की जिम्मेदारी अपने बटुकों को सौंप दी है। करीब 11 साल से आरती करा रहे तीर्थ पुरोहितों ने इसका विरोध किया और शुक्रवार शाम को बटुकों को रोकने का प्रयास किया। प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में पुरोहितों को घाट से हटाकर बटुकों द्वारा आरती कराई गई। प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय वैदिक शिक्षा को सम्मान देने और बटुकों के लिए नए अवसर खोलने के लिए लिया गया है, जबकि पंडा समिति इसे प्राचीन परंपरा में हस्तक्षेप मान रही है।

उज्जैन में शिप्रा आरती पर तीर्थ पुरोहितों और महाकाल मंदिर समिति में विवाद

उज्जैन में शिप्रा नदी की आरती को लेकर तीर्थ पुरोहितों और महाकाल मंदिर समिति के बीच विवाद छिड़ गया है। यह विवाद समिति द्वारा अपने वैदिक प्रशिक्षण संस्थान के 21 बटुकों से आरती कराने के बाद शुरू हुआ। तीर्थ पुरोहित इसे अपनी 500 वर्ष पुरानी परंपरा का हनन बता रहे हैं और उन्होंने जल सत्याग्रह भी किया। मंदिर समिति का कहना है कि यह आयोजन निःशुल्क है और इसका उद्देश्य वैदिक शिक्षा को सम्मान दिलाना है, जिसमें वे पुरोहितों की परंपराओं में हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं।

श्रावण-भाद्रपद में महाकाल मंदिर की व्यवस्थाएं बदलेंगी, प्रतिदिन दो लाख श्रद्धालु संभावित

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण-भाद्रपद मास के दौरान प्रतिदिन दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इसे देखते हुए 30 जुलाई से 7 सितंबर तक मंदिर की दर्शन व्यवस्था, समय-सारिणी, सुरक्षा, यातायात और प्रवेश व्यवस्था में विशेष बदलाव किए गए हैं। मंदिर के पट रविवार को रात 2:30 बजे और अन्य दिनों में रात 3:00 बजे खुलेंगे। विभिन्न श्रेणियों के दर्शनार्थियों के लिए अलग-अलग प्रवेश मार्ग निर्धारित किए गए हैं। इस दौरान भगवान महाकाल की छह पारंपरिक सवारियां भी निकलेंगी, और प्रत्येक शनिवार को अखिल भारतीय श्रावण महोत्सव का आयोजन होगा।