श्रावण माह की शुरुआत के साथ ही श्री महाकालेश्वर मंदिर में लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं। मान्यता है कि श्रावण सोमवार व्रत से पाप नष्ट होते हैं और अक्षय पुण्य मिलता है। शाम 5 बजे जलाभिषेक बंद होने के बाद बाबा महाकाल राजा स्वरूप में दर्शन देते हैं। शाम 7 बजे संध्या आरती में दूध का भोग लगता है, जबकि रात 10:20 बजे शयन आरती में मेवे का प्रसाद चढ़ाया जाता है। मंदिर के पट इसके बाद बंद होते हैं। एक से एक लाख बिल्व पत्र चढ़ाने का विशेष धार्मिक महत्व है। माता सती और पार्वती ने शिव को पति रूप में पाने के लिए श्रावण व्रत किए थे।
इंदौर तहसील के तिल्लौर खुर्द ग्राम के समीप स्थित प्राचीन केवड़ेश्वर महाकाल शिव मंदिर लगभग 800 वर्ष पुराना है और इसे 12-13वीं सदी का माना जाता है। यह मंदिर शिप्रा नदी के उद्गम स्थल के समीप तीन कुंडों के उत्तर-पूर्वाभिमुख स्थित है। इसका शिवलिंग स्वयंभू है और होलकर राजाओं ने इसका जीर्णोद्धार करवाया था, जबकि संरचना परमार कालीन है। बाबा दूधाधारी महाराज की तपोस्थली के रूप में विख्यात यह स्थल आध्यात्मिक महत्व रखता है। समीप ही कंपेल और देवगुराड़िया जैसे ऐतिहासिक स्थल भी हैं।
जबलपुर में 10 अगस्त को 35 किलोमीटर की ‘संस्कार कांवड़ यात्रा’ आयोजित की जाएगी, जिसका उद्देश्य भगवान शिव का जलाभिषेक और प्रकृति संरक्षण का संदेश देना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी इसमें शामिल होंगे। यात्रा ग्वारीघाट से शुरू होकर मटामर स्थित कैलाश धाम पहुंचेगी, जहां अखिलेश्वर महादेव का अभिषेक किया जाएगा और देववृक्ष स्थापित कर प्रकृति संरक्षण का संकल्प लिया जाएगा। आयोजकों ने बताया कि यह यात्रा प्राचीन कांवड़ परंपरा को पर्यावरण चेतना से जोड़ती है, जिसमें नर्मदा जल के साथ देववृक्षों को शामिल किया गया है। महायोगी दादागुरु के सानिध्य में यह आयोजन सामाजिक और पर्यावरणीय चेतना का संदेश देगा।
रायसेन जिले का भगदेई शिव मंदिर अपनी अनूठी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है, जहां हर सुबह सूर्य की पहली किरण सीधे शिवलिंग पर पड़ती है। विंध्याचल पर्वत की तलहटी में स्थित यह प्राचीन मंदिर अपने अधूरे कलश और त्रेतायुग के जामवंत से जुड़ी कथाओं के कारण भी आस्था का केंद्र है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जामवंत ने एक रात में मंदिर का निर्माण अधूरा छोड़ दिया था, और उनके चरणचिह्न आज भी पास में मौजूद हैं। श्रावण मास और महाशिवरात्रि पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है, लेकिन मंदिर को बेहतर संरक्षण और विकास की आवश्यकता है।
सावन के पहले सोमवार, 3 अगस्त को ओंकारेश्वर में भगवान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंगों की भव्य शाही सवारी निकलेगी। इस दौरान नर्मदा में दिव्य नौका विहार और विशेष पूजन भी होगा। लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। नर्मदा तट पर पंचमुखी रजत प्रतिमा का स्नान, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अभिषेक और महाआरती प्रमुख आकर्षण रहेंगे। जिला प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट ने सुरक्षा व सुविधा के लिए व्यापक तैयारियां की हैं, जिसमें वन-वे दर्शन और भारी वाहनों पर प्रतिबंध शामिल है।
ईडी की जांच में स्वयंभू बाबा अशोक खरात के करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। आरोप है कि खरात और उनके सहयोगियों ने लोगों की आस्था का फायदा उठाकर मामूली बाजारू सामान को ‘चमत्कारी’ और ‘दिव्य’ बताकर लाखों रुपये वसूले। इसमें 300 रुपये प्रति लीटर का शहद 7 लाख रुपये तक में, 1000 रुपये की अंगूठियां 2.62 लाख रुपये में और 100 रुपये प्रति किलो के इमली के बीज एक लाख रुपये तक में बेचना शामिल है। ईडी अब बेनामी संपत्तियों की जांच कर रही है।
छतरपुर के गंगा सागर स्कूल के पास स्थित शिव मंदिर में मंगलवार को एक नाग लगभग दो घंटे तक शिवलिंग से लिपटा रहा। इस दौरान, सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए श्रद्धालुओं ने गर्भगृह में प्रवेश नहीं किया और बाहर से ही भगवान शिव के दर्शन किए। नाग के सुरक्षित रूप से बाहर निकलने के बाद ही मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना पुनः प्रारंभ हुई। इस घटना को कई श्रद्धालुओं ने आस्था और प्रकृति का अद्भुत संयोग बताया, जिसकी चर्चा मंदिर परिसर में लंबे समय तक होती रही।