सुप्रिया सुले की बेटी के शादी रिसेप्शन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, शरद पवार और अमित शाह की एक साथ उपस्थिति ने राजनीतिक ध्यान खींचा। उसी दिन, शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) के आठ लोकसभा सांसदों ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात कर सूखा, सिंचाई, किसानों की कर्जमाफी सहित विभिन्न क्षेत्रीय और महाराष्ट्र से जुड़े मुद्दे उठाए। सांसदों ने बैठक को सकारात्मक बताया और प्रधानमंत्री से ध्यान देने का आश्वासन मिला। इन मुलाकातों को लेकर एनसीपी (एसपी) का कहना है कि ये जनहित के मुद्दों के लिए हैं, न कि राजनीतिक गठबंधन बदलने के लिए, हालांकि पवार की राजनीतिक रणनीति पर चर्चा तेज हो गई है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में इंडिया गठबंधन के फ्लोर लीडर्स की बैठक संसद भवन में हुई। इस बैठक में संसद के मौजूदा मानसून सत्र के लिए रणनीति बनाई गई। विपक्ष ने सरकार को विभिन्न अहम मुद्दों पर घेरने और सदन में अपनी भूमिका तय करने पर चर्चा की। गठबंधन के प्रमुख दलों के नेताओं ने साझा रणनीति के साथ आगे बढ़ने पर सहमति जताई, जिसमें जनहित के मुद्दों पर एकजुट होकर सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
विपक्षी सांसदों ने मंगलवार को संसद परिसर में अयोध्या के राम मंदिर में कथित दान चोरी और छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस ज्यादती के विरोध में प्रदर्शन किया। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई सांसदों ने मकर द्वार के सामने तख्तियां लेकर “चंदा चोर, गद्दी छोड़” और “अमित शाह जवाब दो” जैसे नारे लगाए। उन्होंने दान पेटियों का प्रतीकात्मक इस्तेमाल किया। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए गए। इंडिया गठबंधन की रणनीति के तहत यह प्रदर्शन किया गया, जिससे लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा से पहले विपक्ष ने छात्र प्रदर्शन पर सरकार से जवाब मांगा है। कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने स्पष्ट किया है कि वे विधेयक के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार को अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई वरिष्ठ नेता चर्चा में हिस्सा लेंगे। संसद सत्र से पहले मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यालय में इंडिया गठबंधन की बैठक में संयुक्त रणनीति तैयार की गई। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक पेश किया, जिसका उद्देश्य पेपर लीक के खिलाफ सजा को सख्त करना है।