हरदा जिले का गोराखाल झरना अब मध्य प्रदेश का एक खूबसूरत इको-टूरिज्म स्पॉट बन गया है। तहसील मुख्यालय से 26 किलोमीटर दूर स्थित यह झरना 150 फीट की ऊंचाई से गिरता है, जो जिले का सबसे ऊंचा झरना है। पूर्व विधायक संजय शाह और वन विभाग के प्रयासों से इसे इको पर्यटन में शामिल किया गया। मध्य प्रदेश इको पर्यटन विकास बोर्ड भोपाल ने इसके विकास के लिए 20.10 लाख रुपये स्वीकृत किए थे। झरने के पास अंग्रेजों के जमाने का एक रेस्ट हाउस भी है, और स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, ‘गोरी खाल वाले’ अंग्रेजों के नाम पर ही इस क्षेत्र का नाम गोराखाल पड़ा।
इंदौर वन मंडल देवगुराड़िया-दतुनी पहाड़ी और बोहरा कॉलोनी के बाद बिजासन रमणा क्षेत्र में तीसरा नगर वन विकसित कर रहा है। वन विभाग मुख्यालय ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। पहले चरण में 35 हेक्टेयर में पर्यटकों के लिए सुविधाएं जुटाई जाएंगी, जिसके लिए इको-टूरिज्म ने 1 करोड़ 35 लाख रुपये का बजट दिया है। इस नगर वन का उद्देश्य प्रकृति, शांति और अध्यात्म से जोड़ना है, जिसमें ध्यान-योग केंद्र, वॉकिंग ट्रैक और बोट क्लब जैसी सुविधाएं होंगी। भूजल स्तर सुधारने के लिए तालाब और चेकडैम भी बनेंगे।