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उज्जैन के पंडित सूर्यनारायण व्यास ने तय की थी भारत की आजादी की तारीख और समय

भारत की स्वतंत्रता की तारीख और समय का निर्धारण उज्जैन के प्रसिद्ध पंडित सूर्यनारायण व्यास ने ज्योतिषीय गणना के आधार पर किया था। डॉ. राजेंद्र प्रसाद के आग्रह पर, पंडित व्यास ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता के लिए उपयुक्त बताया और आधी रात को औपचारिक ध्वजारोहण का सुझाव दिया, जिसे पंडित जवाहरलाल नेहरू ने स्वीकार किया। पंडित व्यास ने 1930 में ही भारत की आजादी और डॉ. राजेंद्र प्रसाद के राष्ट्रपति बनने की भविष्यवाणी कर दी थी, और पाकिस्तान के 14 अगस्त को बनने पर अस्थिरता की चेतावनी भी दी थी।

नवाब हमीदुल्ला ने जिन्ना को पत्र में पाकिस्तान से सहायता और समझौते की शर्तें पूछीं

नवाब हमीदुल्ला खान ने कायदे-आजम जिन्ना को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने भोपाल राज्य के भविष्य और पाकिस्तान से अपेक्षित सहायता पर मार्गदर्शन मांगा। उन्होंने पाकिस्तान के गठन में अपनी भूमिका का उल्लेख किया और भोपाल की भौगोलिक स्थिति तथा हिंदू बहुल आबादी पर चिंता व्यक्त की। नवाब ने स्पष्ट किया कि वे भारत में विलय के लिए तैयार नहीं हैं और पाकिस्तान से सहायता की शर्तों तथा समझौते के प्रावधानों पर स्पष्टीकरण चाहते थे। उन्होंने पाकिस्तान में सेवा करने की अपनी व्यक्तिगत इच्छा भी व्यक्त की। यह पत्र ‘जिन्ना पेपर्स’ Vol. IV’ में दर्ज है।

इंदौर-फतेहाबाद चंद्रावतीगंज और महू-इंदौर रेलखंड ने 150 वर्ष से अधिक की यात्रा पूरी की

इंदौर – फतेहाबाद चंद्रावतीगंज एवं डॉ. अंबेडकर नगर (महू) – इंदौर रेलखंड ने 150 वर्षों से अधिक की गौरवशाली यात्रा पूरी की है। तीन अगस्त 1876 को शुरू हुए इस रेलखंड ने मालवा क्षेत्र के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास में अहम भूमिका निभाई। पश्चिम रेलवे का रतलाम मंडल इस ऐतिहासिक मार्ग के आधुनिकीकरण, विरासत संरक्षण और यात्री सुविधाओं के विकास पर निरंतर कार्य कर रहा है। लगभग 21 किमी महू-इंदौर और 40 किमी फतेहाबाद चंद्रावतीगंज-इंदौर मीटरगेज रेलखंड को अब ब्रॉडगेज में परिवर्तित कर आधुनिक सिग्नलिंग और उन्नत सुविधाओं से लैस किया गया है, जो प्रतिदिन हजारों यात्रियों को सेवा प्रदान कर रहा है।

इंदौर में 125 वर्ष से अधिक प्राचीन महाकालेश्वर शिव मंदिर, होल्कर काल में हुआ निर्माण

इंदौर में हरसिद्धि माता मंदिर के समीप स्थित 125 वर्ष से अधिक प्राचीन महाकालेश्वर शिव मंदिर सावन में श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। होल्कर काल में निर्मित इस मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व आज भी कायम है। होल्कर राजवंश ने इंदौर में कई शिव, गणेश और देवी मंदिरों का निर्माण कराया था। यह मंदिर 19वीं शताब्दी में होल्कर शासकों द्वारा बनवाया गया था, जिसमें संगमरमर नंदी और प्रस्तर शिवलिंग स्थापित है। वर्तमान में यह मंदिर श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के अंतर्गत संचालित होता है।

लेखक अमीश त्रिपाठी: विरोध प्रदर्शन संवैधानिक दायरे में हों

प्रसिद्ध लेखक अमीश त्रिपाठी ने कहा है कि जेन-जी को विरोध प्रदर्शन का पूरा लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन यह हमेशा संविधान की सीमाओं के भीतर होना चाहिए। पुणे में अपनी नई बाल पुस्तक ‘ध्रुव-तारा: द ग्रेट इंडियन हिस्ट्री क्विज’ के प्रचार के दौरान उन्होंने कहा कि हर पीढ़ी ने आंदोलन किए हैं, इसलिए केवल जेन-जी को दोष देना उचित नहीं है। अमीश ने डॉ. आंबेडकर के ‘ग्रामर ऑफ अनार्की’ का जिक्र करते हुए संविधान की सर्वोच्चता पर जोर दिया। उन्होंने भारतीय इतिहास पढ़ाने के तरीके में बदलाव और औपनिवेशिक सोच को हटाने की भी बात कही, जिसका उनकी नई पुस्तक के माध्यम से प्रयास किया गया है।

शिवपुरी के करेरा में मिली शाहजहां की शाही तलवार

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करेरा में ज्ञान भारत मिशन के तहत एक दुर्लभ सोने की मूठ वाली तलवार मिली है। पुरातत्वविदों को यह तलवार पुरानी पांडुलिपियों के दस्तावेजीकरण के दौरान प्राप्त हुई। तलवार पर फारसी भाषा में अंकित शिलालेख के अनुसार, इसे मुगल सम्राट शाहजहां ने करेरा किले के सेनापति सैयद सालार को भेंट किया था। यह तलवार सैयद सालार की नौवीं पीढ़ी की वंशज इत्रत जैदी के निजी संग्रह में सुरक्षित थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आज भी मौजूद दुर्लभ मुगलकालीन हथियारों में से एक हो सकती है।

कारगिल युद्ध: भारतीय सेना ने साहस और तोपखाने से ऊंची चोटियों पर दुश्मन को हराया

कारगिल युद्ध भारतीय सेना के साहस, धैर्य और सैन्य कौशल का प्रतीक है, जिसे हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के रूप में याद किया जाता है। वर्ष 1999 में द्रास, बटालिक सहित दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में लड़े गए इस युद्ध में भारतीय सैनिकों ने सीमित ऑक्सीजन और ऊंची चोटियों पर दुश्मन की मौजूदगी जैसी विषम चुनौतियों का सामना किया। सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती सामरिक बढ़त के बावजूद, भारतीय सेना ने सुनियोजित अभियान, असाधारण साहस और प्रभावी तोपखाना समर्थन से सभी ठिकानों को मुक्त कराया। युद्ध में 527 सैनिक शहीद हुए और 1,300 से अधिक घायल हुए।

दतिया संग्रहालय में मिला रानी लक्ष्मीबाई का 175 साल पुराना जीवित अवस्था का चित्र

दतिया संग्रहालय में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का एक ऐतिहासिक 175 साल पुराना जीवित अवस्था का चित्र मिला है। दो फीट लंबा और पौने दो फीट चौड़ा यह चित्र रानी को घोड़े पर सवार कुलदेवी की पूजा के लिए जाते हुए दर्शाता है, जिसे 1849-50 के आसपास का माना जा रहा है। मध्य प्रदेश राज्य पुरातत्व संग्रहालय एवं अभिलेखागार के इतिहासकार डॉ. मो. वसीम खान के अनुसार, यह उनके पति गंगाधर राव के निधन से पहले का है। यह दुर्लभ चित्र ज्ञान भारतम मिशन के तहत पांडुलिपियों के संग्रहण के दौरान सामने आया है और इसका संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है।

कॉमनवेल्थ गेम्स: भारत ने 2010 में रचा इतिहास, पदक तालिका में हासिल किया दूसरा स्थान

कॉमनवेल्थ गेम्स की शुरुआत 1891 में ब्रिटिश पादरी जॉन एस्टली कूपर के एक विचार से हुई थी, जिसका उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य के देशों के बीच संबंध मजबूत करना था। भारत ने इन खेलों में 1934 में पदार्पण किया और पहलवान राशिद अनवर ने पहला कांस्य पदक जीता। 1958 में मिल्खा सिंह ने भारत को एथलेटिक्स का पहला स्वर्ण दिलाया। भारत ने 2010 में दिल्ली में इन खेलों की मेजबानी की और 101 पदकों के साथ पदक तालिका में दूसरा स्थान हासिल कर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया। 2026 के कॉमनवेल्थ गेम्स स्कॉटलैंड के ग्लासगो में हो रहे हैं और 2030 में अहमदाबाद इसकी मेजबानी करेगा।