बड़वानी के सेंधवा में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कारोबारी अशोक तायल और उनके परिवार के ठिकानों पर बुधवार को छापामार कार्रवाई की। ईडी की टीमें तायल के घर, मकान और राजराजेश्वर जिनिंग फैक्ट्री पहुंचीं। पुलिस अधीक्षक ने कार्रवाई की पुष्टि की, हालांकि इसका आधिकारिक कारण अभी अज्ञात है। सूत्रों के अनुसार, यह मामला करोड़ों रुपए के लोन से संबंधित हो सकता है। उल्लेखनीय है कि आठ महीने पहले सीबीआई ने नाबार्ड बैंक भोपाल से जुड़े 13 करोड़ रुपए के कथित लोन धोखाधड़ी मामले में भी तायल बंधुओं के खिलाफ कार्रवाई की थी, जिसमें उन पर धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप थे।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में इंदौर निवासी आलोक शारदा सहित अन्य आरोपियों की 13 करोड़ रुपए की 18 अचल संपत्तियां जब्त की हैं। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई। आरोपियों ने मानपुर स्थित शारदा वेयरहाउस में वेयरहाउस फाइनेंस स्कीम का दुरुपयोग कर आईडीबीआई बैंक को 14 करोड़ का नुकसान पहुंचाया। मेसर्स किसान धन एग्री फाइनेंशियल सर्विसेज भी 12 करोड़ के वेयरहाउस रिसीट फाइनेंस घोटाले में शामिल थी।
मध्य प्रदेश परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को जबलपुर हाईकोर्ट से 18 माह बाद जमानत मिल गई है। उन्हें फरवरी 2025 में गिरफ्तार किया गया था। सौरभ शर्मा पर ईडी, आयकर, लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू और भोपाल पुलिस सहित पांच एजेंसियां कई मामले दर्ज कर जांच कर रही हैं। उन पर अवैध कमाई और अधिकारियों को अपने इशारे पर चलाने के आरोप हैं। एक इनोवा कार से 52 किलोग्राम सोने के बिस्किट और 11 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए थे। अदालत ने जांच पूरी होने और लंबे ट्रायल की संभावना के कारण जमानत दी है, लेकिन उन्हें हर सुनवाई में उपस्थित रहना होगा।
मध्य प्रदेश में परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के भ्रष्टाचार मामले में लोकायुक्त संगठन ने विवेचना पूरी कर ली है। 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जुटाने के आरोप में सौरभ के अतिरिक्त 15 से अधिक लोगों को आरोपित बनाया जाएगा, जिनमें उसकी पत्नी, मां और दोस्त शामिल हैं। सितंबर में आरोप पत्र प्रस्तुत होने की संभावना है। मामले में 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपये नकद सहित करोड़ों की संपत्ति जब्त की गई है।
जबलपुर में सौ करोड़ रुपये से अधिक के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तार आरटीओ विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने ईडी की जांच पूरी होने, चालान पेश होने, आरोप तय होने और आरोपी के 16 माह से न्यायिक हिरासत में होने तथा सुनवाई में लगने वाले समय को आधार बनाया। इससे पूर्व हाईकोर्ट दो बार उसकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर चुका था। ईडी ने जमानत का विरोध करते हुए इसे गंभीर आर्थिक अपराध बताया था, लेकिन अदालत ने शर्तों के साथ जमानत मंजूर की।
ईडी की जांच में स्वयंभू बाबा अशोक खरात के करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। आरोप है कि खरात और उनके सहयोगियों ने लोगों की आस्था का फायदा उठाकर मामूली बाजारू सामान को ‘चमत्कारी’ और ‘दिव्य’ बताकर लाखों रुपये वसूले। इसमें 300 रुपये प्रति लीटर का शहद 7 लाख रुपये तक में, 1000 रुपये की अंगूठियां 2.62 लाख रुपये में और 100 रुपये प्रति किलो के इमली के बीज एक लाख रुपये तक में बेचना शामिल है। ईडी अब बेनामी संपत्तियों की जांच कर रही है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इंदौर नगर निगम के फर्जी बिल घोटाले में पीएमएलए कोर्ट में 20 हजार पेज की चार्जशीट दायर की है। घोटाले की राशि बढ़कर 103.42 करोड़ रुपए हो गई है, जिसमें 32 आरोपी शामिल हैं। ईडी ने 5 और 6 अगस्त 2024 को 20 ठिकानों पर छापे मारे, जिसमें 22.04 करोड़ रुपए की संपत्तियां फ्रीज की गईं और 37.14 करोड़ रुपए की 52 अचल संपत्तियां कुर्क की गईं। कुल 59.18 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं। विशेष पीएमएलए कोर्ट ने आरोपियों को समन जारी कर अगली सुनवाई की तारीख तय की है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इंदौर नगर निगम के दो साल पुराने फर्जी बिल घोटाले में 20,000 पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में पेश की है। इसमें कुल 32 लोगों को आरोपित बनाया गया है, जिनमें निगम इंजीनियर अभय राठौर, ड्रेनेज कर्मचारी, ठेकेदार फर्मों के संचालक और स्थानीय निधि लेखा परीक्षा कार्यालय के अधिकारी शामिल हैं। आरोपितों पर धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत आरोप तय किए गए हैं। जांच में पता चला कि 103.42 करोड़ रुपये से अधिक की सार्वजनिक धनराशि फर्जी बिलों के माध्यम से गबन की गई। ईडी ने 59.18 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क, जब्त या फ्रीज की हैं और तीन मुख्य आरोपितों को गिरफ्तार भी किया है।
प्रवर्तन निदेशालय के जालंधर जोनल कार्यालय ने मोहाली की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में अजय सहगल के खिलाफ एक प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की है। उन पर फर्जी सहमति पत्रों के माध्यम से ‘चेंज ऑफ लैंड यूज’ (CLU) हासिल कर अपराध की कमाई को लॉन्डर करने का आरोप है। शिकायत में कहा गया है कि आरोपियों ने पंजाब के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट को नकली सहमति पत्र देकर काम शुरू किया और पंजीकरण से पहले प्लॉट बेचे। इसके अतिरिक्त, ‘ला कैनेला फेज 2’ में रेरा की मंजूरी के बिना आवासीय इकाइयां भी बेची गईं।