पीएम ई-बस सेवा के तहत भोपाल में ड्राइवरों को ‘कोच कैप्टन’ और कंडक्टरों को ‘डिजिटल असिस्टेंट’ के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। अब ड्राइवरों को स्टीयरिंग संभालने से पहले एआई आधारित ड्राइविंग सिम्युलेटर परीक्षा पास करनी होगी। इस प्रशिक्षण में ड्राइविंग कौशल के साथ-साथ व्यवहार कुशलता पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। यात्रियों के अभिवादन, बुजुर्गों की सहायता और आपातकालीन स्थितियों से निपटने का अभ्यास कराया गया। बीसीएलएल का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन के अनुभव को बेहतर बनाना है, ताकि लोग निजी वाहनों की जगह ई-बसों को प्राथमिकता दें।
इंदौर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अभी भी अपेक्षानुरूप स्तर तक नहीं पहुंच पाई है, जिसके कारण बड़ी संख्या में लोग निजी वाहनों का उपयोग करने को मजबूर हैं। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत इंदौर में आधुनिक वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें शुरू की गई हैं, लेकिन वर्तमान में केवल तीन रूटों पर 36 ई-बसें ही चल रही हैं, जबकि 24 डिपो में खड़ी हैं। आगामी चरण में 90 नई ई-बसें मिलने की उम्मीद है। शहर में 250 सिटी बसें, 40 आईबस, 12,226 ई-रिक्शा और 46,777 ऑटो रिक्शा संचालित होते हैं, लेकिन सभी में समय की गड़बड़ी, मनमाना किराया या अव्यवस्था जैसी समस्याएं बनी हुई हैं, जिससे यात्रियों को परेशानी हो रही है।
भोपाल में ई-बसों का वाणिज्यिक संचालन 30 जुलाई से शुरू होगा। ट्रायल रन पूरा होने के बाद पहले चरण में 10 इलेक्ट्रिक बसें दो रूटों पर चलेंगी। यात्रियों से प्रति किलोमीटर 1.50 रुपये और न्यूनतम 7 रुपये किराया लिया जाएगा। बीसीएलएल के अनुसार, 30 ई-बसें भोपाल पहुंच चुकी हैं, और निगम का लक्ष्य अगले एक महीने में 100 ई-बसों का संचालन शुरू करना है। टिकिटिंग सॉफ्टवेयर की टेस्टिंग पूरी होने के बाद अब ये बसें शहर के विभिन्न स्टॉप पर रुकना शुरू करेंगी।