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ग्वालियर का पुलिसकर्मी पत्नी से विवाद के बाद उत्तराखंड से बरामद, मोहना में सवा दो किलो गांजे के साथ दो तस्कर गिरफ्तार

ग्वालियर के कंपू इलाके में रहने वाले रेडियो पुलिस आरक्षक संदीप तोमर को पत्नी से विवाद के बाद उत्तराखंड से बरामद किया गया है। छह अगस्त को पत्नी प्रियंका की शिकायत पर अपहरण की एफआईआर दर्ज की गई थी। दूसरी घटना में, मोहना क्षेत्र में पुलिस ने दो गांजा तस्करों, मोनू परिहार और नरोत्तम जाटव को सवा दो किलो गांजे के साथ गिरफ्तार किया है। ये तस्कर लंबे समय से राजस्थान से गांजा लाकर मोहना में सप्लाई कर रहे थे, जिसके संबंध में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है।

15 राज्यों में भारी बारिश का यलो अलर्ट, दिल्ली-एनसीआर में जलभराव से लंबा जाम

मौसम विभाग ने 15 राज्यों में भारी बारिश के लिए यलो अलर्ट जारी किया है। दिल्ली-एनसीआर में लगातार मानसूनी बारिश से जलभराव और लंबा ट्रैफिक जाम देखा गया। बृहस्पतिवार को दिल्ली में 56 मिमी बारिश हुई, जिससे अधिकतम तापमान में 5 डिग्री की गिरावट आई और लोगों को गर्मी से राहत मिली। गुरुग्राम में 117 मिमी बारिश दर्ज की गई। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन के कारण 250 से अधिक सड़कें बंद हो गईं, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ। स्कूली बच्चों और वाहन चालकों को विशेष परेशानी का सामना करना पड़ा।

पेड़ नहीं, पानी लगाने का समय आ गया: डॉ. अनिल प्रकाश जोशी

पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने इंदौर में ‘क्यों रूठ जाती है प्रकृति’ विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि अब पेड़ नहीं, पानी लगाने का समय आ गया है। उन्होंने नदियों को पुनर्जीवित करने और वर्षा जल संचय की आवश्यकता पर जोर दिया। डॉ. जोशी ने बताया कि जल संकट अब देशभर की समस्या है और भारत का ट्रॉपिकल देश होना एक लाभ है। उन्होंने मानवीय हस्तक्षेप के कारण बदलते मौसम, कृषि के नकारात्मक प्रभाव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बजाय प्राकृतिक बुद्धिमत्ता पर काम करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने पहाड़ों पर पर्यटकों की संख्या नियंत्रित करने की भी बात कही।

कांवड़ यात्रा सावन माह में प्रारंभ, लाखों भक्त करेंगे जलाभिषेक

सावन माह की शुरुआत के साथ कांवड़ यात्रा प्रारंभ हो गई है, जिसमें लाखों केसरिया वस्त्रधारी कांवड़िए गंगा नदी का पवित्र जल लेकर भगवान शिव के ज्योतिर्लिंगों और मंदिरों में जलाभिषेक करेंगे। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड सरकारों ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। इस यात्रा का इतिहास पौराणिक काल के समुद्र मंथन से जुड़ा है, जहां भगवान शिव ने हलाहल विष पीकर सृष्टि की रक्षा की थी। रावण, परशुराम और भगवान राम से जुड़ी मान्यताएं भी इस यात्रा के महत्व को दर्शाती हैं, जिसमें विभिन्न जल संग्रहण केंद्रों और प्रमुख मार्गों से भक्त शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं।