मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य को ड्रोन निर्माण, परीक्षण, अनुसंधान और नवाचार का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए रोडमैप तैयार करना शुरू कर दिया है। बुधवार को एक राउंड टेबल बैठक हुई, जिसमें ग्वालियर में ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग एंड टेस्टिंग क्लस्टर और आइसर भोपाल में ड्रोन टेक्नोलाजी आधारित सेंटर आफ एक्सीलेंस स्थापित करने पर चर्चा हुई। आइसर भोपाल के सेंटर के लिए ₹85.51 करोड़ की परियोजना को मंजूरी मिली है, जो अनुसंधान और व्यावसायीकरण पर केंद्रित होगा। सरकार का लक्ष्य कुशल मानव संसाधन तैयार करना और रोजगार के अवसर पैदा करना भी है, जिसमें कई कंपनियों ने साझेदारी में रुचि दिखाई है।
ग्लोबल इन्वेस्टर समिट- 2027 से पहले मध्य प्रदेश सरकार को मुंबई में आयोजित एक रोड शो के दौरान 90 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की बैठकों में आरपीजी समूह, वेलस्पन एंटरप्राइजेज और आईनाक्स एयर प्रोडक्ट्स जैसी कंपनियों ने निवेश की घोषणा की, जिससे राज्य में 14,375 रोजगार के अवसर सृजित होंगे। नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में एसीएमई ग्लोबल 47 हजार करोड़ रुपये का निवेश करेगा। फार्मा, सूचना प्रौद्योगिकी और केमिकल विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में भी निवेशकों ने रुचि दिखाई है। सरकार प्रदेश को निवेश और रोजगार का केंद्र बनाने के लिए प्रयासरत है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 12 अगस्त को अहमदाबाद में अरविंद लिमिटेड के वाइस चेयरमैन कुलीन लालभाई से मुलाकात की, जिसके बाद अरविंद समूह ने मध्यप्रदेश में अपनी इकाई स्थापित करने की घोषणा की। कंपनी पीएम मित्र पार्क में लगभग 1200 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित कर रही है, जिसके लिए 105 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। इस निवेश से अगले वर्ष तक उत्पादन शुरू होने का लक्ष्य है, जिससे प्रदेश के युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री ने निवेश प्रक्रिया को गति देने और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS)-2027 में सहभागिता के लिए भी आमंत्रित किया।
राजधानी भोपाल के आसपास औद्योगिक गतिविधियों का व्यापक विस्तार हो रहा है। भोपाल सहित रायसेन, सीहोर, राजगढ़ और नर्मदापुरम के 50 किलोमीटर के दायरे में 88 इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किए जा चुके हैं और 51 नए औद्योगिक क्षेत्र निर्माणाधीन हैं। इस पहल से पारंपरिक भारी उद्योगों पर निर्भरता कम हो रही है और विभिन्न क्षेत्रों के लिए विशेष क्लस्टर बनाए जा रहे हैं। तीन नए औद्योगिक हब – बैरसिया, सतगढ़ी और बड़वई – लगभग 11,000 युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेंगे। मौजूदा औद्योगिक क्षेत्रों का भी आधुनिकीकरण किया जा रहा है।
उज्जैन देश की ‘स्पिरिचुअल इकोनॉमी’ का नया मॉडल बनने की ओर अग्रसर है। केंद्र और मध्यप्रदेश सरकार की 18 हजार करोड़ की विकास योजनाएं सिंहस्थ-2028 को अगले कई दशकों की अर्थव्यवस्था की बुनियाद बना रही हैं। इन योजनाओं में नए घाट, पुल, जल प्रदाय, सीवरेज नेटवर्क, यूनिटी मॉल और मेडिकल कॉलेज जैसे स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण शामिल है। महाकाल महालोक के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि से स्थानीय व्यापार में तेजी आई है, और अब सिंहस्थ की तैयारी इसे स्थायी आर्थिक ढांचे में बदल रही है।
भोपाल और उसके 50 किलोमीटर के दायरे में औद्योगिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। यह क्षेत्र अब बीएचईएल और भारी इंजीनियरिंग के बजाय सेक्टर-वाइज इंडस्ट्रियल क्लस्टर पर केंद्रित हो रहा है। अचारपुरा, तामोट और बड़ियाखेड़ी-आष्टा जैसे नए हब विकसित हो रहे हैं। इस बेल्ट में 88 विकसित पार्कों के साथ 51 से अधिक नए औद्योगिक क्षेत्र निर्माणाधीन हैं, जिनमें विभिन्न क्षेत्रों के क्लस्टर शामिल हैं। एमपीआईडीसी के एमडी चंद्रमौली शुक्ला के अनुसार, पुरानी इंडस्ट्रीज का पुनर्विकास और शहरी खाली जमीनों का उपयोग कर हजारों नए रोजगार सृजित किए जा रहे हैं।
मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और अचानकमार टाइगर रिजर्व को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण बाघ कॉरिडोर के पास तीसरे कोयला ब्लॉक, पिथोरा ईस्ट परियोजना, को खनन के लिए पर्यावरण मंत्रालय की एक्सपर्ट कमेटी ने स्वीकृति दे दी है। इस परियोजना का खनन पट्टा क्षेत्र एक हजार हेक्टेयर से अधिक है, जिसमें 800 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि शामिल है। कमेटी ने इससे पहले मरवटोला-सात और अर्जुन वेस्ट कोल ब्लॉक को भी मंजूरी दी थी, जो कॉरिडोर से क्रमशः 53 मीटर और 3.9 मीटर की दूरी पर स्थित हैं।
मध्य प्रदेश सरकार ने निवेश सुगमता के लिए सड़कों को औद्योगिक गलियारे के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना बनाई है। इसका उद्देश्य लॉजिस्टिक्स लागत कम करना, कनेक्टिविटी सुधारना और निवेशकों के लिए व्यापारिक प्रक्रियाओं को आकर्षक बनाना है। इसके तहत 13 नए मार्ग विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें NHAI चार और MPRDC नौ मार्गों का निर्माण करेगा। इन गलियारों से शहरों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ेगी और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। वर्तमान में प्रदेश में 4.2 लाख किलोमीटर का रोड नेटवर्क है।
केंद्र सरकार ने पश्चिमी घाट के 56,825.7 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र (ईएसए) घोषित करने के लिए एक नया मसौदा जारी किया है। इस प्रस्ताव के लागू होने पर पश्चिमी घाट के लगभग 3,000 गांवों में नए खनन कार्य, बड़े टाउनशिप का निर्माण, रेड कैटेगरी के उद्योगों की स्थापना और नए थर्मल पावर प्लांट लगाने पर रोक लग सकती है। यह मसौदा इन विशिष्ट गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान करता है।
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने देश में मेडिकल सॉफ्टवेयर के सुरक्षित उपयोग के लिए मेडिकल डिवाइस सॉफ्टवेयर (एमडीएसडब्ल्यू) के लिए अंतिम दिशानिर्देश जारी किए हैं। ये दिशानिर्देश 21 जुलाई से लागू हो गए हैं। औषधि महानियंत्रक डॉ. राजीव रघुवंशी द्वारा जारी सर्कुलर में कहा गया है कि ये गाइडलाइंस मेडिकल डिवाइस नियम-2017 के तहत मेडिकल सॉफ्टवेयर से जुड़े नियमों को स्पष्ट करती हैं। इनमें सॉफ्टवेयर की श्रेणी, सुरक्षा, गुणवत्ता, जरूरी दस्तावेज और बाजार में आने के बाद उसकी निगरानी के नियम शामिल हैं। कंपनियों को मंजूरी के लिए आवेदन करते समय इनका पालन करना होगा।