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भोपाल में प्राकृतिक संपदा संरक्षण की जिम्मेदारी बंटी; तेलंगाना और कर्नाटक में अलग अथॉरिटी, 5 साल तक जेल का प्रावधान

भोपाल, जिसे झीलों का शहर कहा जाता है, गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना कर रहा है, जहाँ तालाबों, पहाड़ियों और हरित क्षेत्रों पर लगातार अतिक्रमण हो रहा है। इसके विपरीत, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे दक्षिणी राज्यों ने तालाब संरक्षण के लिए अलग प्राधिकरण स्थापित किए हैं और नियम तोड़ने वालों के लिए 5 साल तक की जेल का प्रावधान किया है। भोपाल में प्राकृतिक संपदा के संरक्षण की जिम्मेदारी विभिन्न एजेंसियों में बंटी हुई है, जिससे समन्वय की कमी और कार्रवाई में जिम्मेदारी तय न हो पाने की समस्या है।