राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए संविदा आयुष चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। इसका उद्देश्य जिला और ब्लॉक स्तर पर रिक्त पदों को भरना है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत, आयुष डॉक्टर आंगनबाड़ियों और सरकारी स्कूलों में 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण करेंगे। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य नेटवर्क को मजबूत करेगी और बच्चों में जन्मजात बीमारियों, कुपोषण जैसी समस्याओं की समय पर पहचान व नि:शुल्क इलाज सुनिश्चित करेगी, जिससे पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की पहुंच भी बढ़ेगी।
मध्य प्रदेश में दूरस्थ क्षेत्रों के अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने ‘यू कोट, वी पे’ योजना शुरू की है। इस योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन में सबसे कम वेतन मांगने वाले रेडियोलॉजिस्ट, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ और शिशु रोग विशेषज्ञों को पदस्थ किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश के लिए 14 नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों को स्वीकृति दी है, जिनमें से छह आदिवासी बहुल जिलों में बनाए जाएंगे। यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्य प्रदेश ने महिलाओं को सुरक्षित गर्भपात की सुविधा समय पर उपलब्ध कराने के लिए एक नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत अब हर जिले में साल में दो बार प्रशिक्षित डॉक्टरों और नर्सों की समीक्षा बैठक होगी। इन बैठकों की अध्यक्षता जिला स्वास्थ्य अधिकारी-1 करेंगे और इनमें एमएमए व एमवीए किट की उपलब्धता, दवाओं की स्थिति, उपकरण तथा रेफरल व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य मैदानी स्तर पर आने वाली समस्याओं का समाधान करना है।